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"आदरणीय गंगाधर शर्मा 'हिंदुस्तान ' जी  आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
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"आदरणीया राजेश कुमारी दी प्रणाम बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैं  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
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"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी प्रणाम ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
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"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सभी शैर बहुत अच्छे हुए हैं बधाई "
Saturday
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"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर ' साहब आदाब आहूत बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैं  हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला कमाल हैं शेयर शैर उम्दा और मक़्ता क्या खूब वाह्ह्हह्ह्ह्ह  बहुत बहुत बधाई "
Saturday
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"आदरणीया रक्षिता सिंह  जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
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" आदरणीय नीलेश "नूर"जी नमस्कार वाह्ह क्या कहने बेहतरीन ग़ज़ल मतला बहुत उम्दा सभी शैर वाह वाह बहुत उम्दा मक़्ता क्या शानदार  हार्दिक बधाई वाह्ह ! शानदार ग़ज़ल "
Saturday
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"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैहार्दिक बधाई स्वीकार करें  सारे शैर बेहतरीन हुए हैं हाँ मगर उस एक शैर से बचा जा सकता था शायद !मतला बहुत उम्दा  वाह क्या कहने बधाई "
Saturday
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"आदरणीय अनीस 'अरमान ' जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
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"आदरणीय दयाराम मेठानी जी प्रणाम !बहुत अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सभी शैर बेहतरीन हुए है बहुत बहुत बधाई "
Saturday
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"आदरणीय अजीत शर्मा 'आकाश ' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सभी शैर अच्छे हुए हैं शैर दर शैर दाद हाज़िर  हैं बहुत बधाई "
Saturday
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"आदरणीय नाकाम  जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सभी शैर बहुत अच्छे हुए हैं बहुत बहुत बधाई "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय तस्दीक अहमद ख़ान साहब प्रणाम बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैं शैर दर शैर मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं  ख़ास कर आपका दूसरा दसवां शैर और मक़्ता वाह वाह क्या बात हैं बहुत खूब ! बधाई "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सभी शैर बेहतरीन शैर दर शैर दाद क़ुबूल करें "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"'किसकी कमी थी कहना सुनाना  बहुत हुआ ' भी हो सकता था क्या मुआफ़ी चाहता हूँ "
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें  मतला वाह क्या कहने दूसरा शैर वाह वाह बहुत उम्दा सभी शैर बहुत उम्दा ! 'टी वी पे नित बहस तो कराना बहुत हुआ ' वाह ! बहुत बहुत बधाई "
Saturday

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Male
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arang
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arang
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ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

ग़ज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
अगर सच भी जो बोलता हो

रहे गुण सभी आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता तो अच्छा
नहीं जानता क्या बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही बस दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 18, 2019 at 11:30am — 4 Comments

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At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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