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dandpani nahak
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय मो. अनीस शैख़ जी आदाब , बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल के लिए ह्रदय से मुबारकबाद स्वीकार करें"
5 hours ago
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"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने का प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद स्वीकार करें"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय मुनीष 'तन्हा' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारक बाद स्वीकार करें"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया !"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी नमस्कार बहुत शुक्रिया आपने मेरा प्रयास सराहा बहुत शुक्रगुज़ार हूँ मतला और अधिक स्पष्ट कैसे करूँ कृपा कर कोई सुझाव देवें"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम , बहुत शुक्रिया मेरा हौसला बढ़ाने के लिए ! बाकि आपकी कृपा है !"
5 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय नादिर खान जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ! ' हर तरफ अँधेरा है झूठ की नुमाइश का सच नज़र नहीं आता दिन के भी उजालों में' वाह !क्या बेहतरीन शैर कहा है ! बहुत बहुत बधाई!"
14 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल ' नमन' जी प्रणाम बहुत बढ़िया ग़ज़ल कहने के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें| एक से बढ़कर एक सारे शैर बहुत मुबारकबाद"
14 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"हर्फ़ कह रहे थे क्या बारहा रिसालों में काश वो बदल जाएं आपके निवालों में एक साँस में उसने सौ सवाल पूछे थे 'हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में' रोशनी अगर हो भी आफताब की तो भी नक़्स ही निकालेंगे खूब वो उजालों में नाम पर यूँ मज़हब के बाँटते हो…"
14 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल से आगाज़ किया है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
17 hours ago
Samar kabeer left a comment for dandpani nahak
"नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।"
Aug 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई दण्डपाणि जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई । बेहतरी के लिए भाई समर जी की बात का संज्ञान अवष्य लें।"
Aug 7

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल

किनारे हो चाहे कि मझधार पे हो
नज़र तो हमेशा ही पतवार पे हो

पड़ी हो अगर दिल के बीच में ये
इक सुराख़ भी जरूर दीवार पे हो

मैं भी तो नहीं चाहता था कभी यूँ
बहस ख़त्म हो भी तो तकरार पे हो

चलो तेज दोस्त चलो कोई बात न
लगाम भी मगर लाज़मी रफ़्तार पे हो

मैं कब चाहता हूँ भला ये फुलों की
कभी बारिश भी मेरे अश्आर पे हो

जुदा हैं अगर राह अपने तो 'नाहक'
क्यूँ एतराज़ उसके सरोकार पे हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on July 30, 2019 at 8:46pm — 3 Comments

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो

1222 1222 1222

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो
अगर ख्वाब हो तो फिर कैसे मुलाकात हो

क़यामत भले हो जाये उस के बाद अच्छा
किनारा झील का औ चांदनी रात हो

तभी तो मैं तुम्हारा हूँ कहूँ खुद को
मेरी आँखों से निकले तेरे ज़ज़्बात हो

फिरूँ हूँ मैं तलाश में तेरी ख्वाब मेरे
कभी तो रु ब रु कोई करामात हो

दुआओं में मांगू मैं यही हर पल
ख़ुशी हो पास तेरे और इफरात हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on July 16, 2019 at 10:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल 122 122 122

हमें क्यों किसी से गिला हो
जिसे भी जो चाहे मिला हो

लूटा सा पिटा सा दिखा था
न रहमत का ही काफिला हो

न जाने ये कब तक यूँ ही बस
जिंदगी तिरा सिलसिला हो

उसे क्या खबर हो जहाँ की
इश्क में किसी मुबतिला हो

कहें क्या अगर सुन के सच भी
गया जो वही तिलमिला हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on May 3, 2019 at 10:46am — 1 Comment

आओ एक सपना देखो

आओ एक सपना देखो

और उसपे विश्वास करो

कठिन डगर मिले अगर

गौरव का अहसास करो

आओ एक सपना देखो.....



देखो बाज़ जो होता है

फ़िक्र न करता मेघों की

और जंगल में हाथी भी

क्या चिंता करे है बाघों की

उड़ो सारा आकाश तुम्हारा

डैनों का विकास करो



आओ एक सपना देखो.....



लगातार लगे रहने से

पर्बत बी देता रास्ता है

कोई चीज़ असंभव है

कौन यहाँ ऐसा कहता है



नया इतिहास रच बसने को

रोज यूँ ही प्रयास करो



आओ एक… Continue

Posted on March 12, 2019 at 10:09am — 2 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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"आ. भाई असद जैदी जी, गजल का सुंदर प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई ।"
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