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dandpani nahak
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dandpani nahak commented on vijay nikore's blog post समय पास आ रहा है
"आदरणीय विजय निकोरे जी प्रणाम ! बहुत बहुत बधाई बेहतरीन रचना के लिए वाह क्या कहने ! "इस"घड़ी का शायद समय आ रहा है ! बहुत सुन्दर पुनः बधाई"
6 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"ये ज़मीन है वही तो ये वही तो आसमाँ है जिसे सब तलाश करते वो वफ़ा बता कहाँ है तेरे सामने कहूं कुछ ये कहाँ मज़ाल मेरी मेरी आँख ने कहा सब मेरा दिल तो बेज़बाँ है मुझे हिज़्र कि ये रातें हैँ क़ुबूल, जनता हूँ अभी इश्क़ में तुम्हारे मेरा और इम्तिहाँ है कोई…"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"ये जमीं वही तो है और वही ये आसमाँ है हाँ मगर वफ़ा जिसे कहते थे शै वो अब कहाँ है न कुसूर है किसी का न शिकायतें हैँ कोई जो कहा कहा है आँखों से ये दिल तो बेज़बाँ है तेरी चाह में गुजारी है सभी हिज़्र की रातें ये सुना है कि अभी इश्क़ के और इम्तहाँ है मैं…"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय दिनेश कुमार जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय अनीस 'अरमान' जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ' मेरी फूल की दुकाँ ' या 'फूलों की दुकाँ ' कोई फर्क पड़ रहा है क्या? गुस्ताखी माफ़ बाकि हर शैर बहुत अच्छे हुए हैं बधाई"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला बहुत अच्छा है सभी शैर बहुत अच्छे हुए है बहुत बधाई !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी"
Dec 28, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम बहुत शुक्रिया सब आपकी कृपा है कृपा बनायें रखें"
Dec 28, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"संशोधित ग़ज़ल हाय दिल चीर दे ऐसा वो नज़ारा निकला चाँद तन्हा रहा कोई न सितारा निकला बेवफ़ाई का तेरी करते हुए फिर मातम तेरे कूचे से कोई दर्द का मारा निकला बस्तियाँ ख़ाक हुई कैसे बताऊँ क्या अब राख़ जब हम ने कुरेदी तो शरारा निकला आज मिसरा ये दिया है हमें…"
Dec 28, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"आदरणीय रवि भसीन जी मुआफ़ी चाहता हूँ मैंने आपका तखल्लुस शाहिद की जगह शहीद लिख दिया है यह टाइपिंग त्रुटि है कृपा कर नज़रअंदाज़ करें और शाहिद ही पढ़ें फिर से एक बार मुआफ़ी चाहता हूँ"
Dec 27, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"बहुत शुक्रिया भाई लक्ष्मण धामी जी आपने अपना समय निकाला ग़ज़ल तक आए ,उसे सराहा मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत बहुत शुक्रिया"
Dec 27, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें सभी शैर बहुत अच्छे कहे हैं बहुत मुबारकबाद"
Dec 27, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी नमस्कार ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें खासकर मतला बहुत अच्छा है और गिरह भी सारे शैर कमाल हैं मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
Dec 27, 2019
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"हाय दिल चीर दे ऐसा वो नज़ारा निकला देखता गौर से चाँद को सितारा निकला माँगता जो मैं भी तो और भला क्यूँ बोलो जो भी दुनिया से गया हाथ पसारा निकला क्या कहूँ जिस के लिए दिल जो हुआ दुश्मन हाँ ये जो इश्क़ है कम्बख्त ज़रारा निकला पहलू में तुमको रखा था की…"
Dec 27, 2019
Samar kabeer commented on dandpani nahak's blog post 122 122 122 12 ग़ज़ल
"जनाब नाहक़ जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,शिल्प,व्याकरण और बह्र पर और अभ्यास करें,रदीफ़ से कुछ मिसरों में इंसाफ़ नहीं हुआ है,देखियेगा ।"
Nov 7, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

ग़ज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
अगर सच भी जो बोलता हो

रहे गुण सभी आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता तो अच्छा
नहीं जानता क्या बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही बस दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 18, 2019 at 11:30am — 4 Comments

गज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
मगर जो जैसा है वैसा हो

यही गुण हो बस आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता है तो अच्छा
नहीं जानता क्यों बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही शुभ दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 8, 2019 at 3:07pm — 5 Comments

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At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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