For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

dandpani nahak
Share

Dandpani nahak's Friends

  • Mohammed Arif
  • Samar kabeer
  • Harash Mahajan
 

dandpani nahak's Page

Latest Activity

dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय गंगाधर शर्मा 'हिंदुस्तान' जी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी नमस्कार ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाई "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी  सादर अभिवादन "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय मुनीश "तन्हा" नादौन जी नमस्कार ग़ज़ल का उम्दा प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सालिक गणवीर जी "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब आदाब बहुत बहुत शुक्रिया आपका "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम बहुत बहुत शुक्रिया आपका आपकी कृपा बानी रहे "
Mar 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर ' साहब आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं शैर दर  शैर दाद हाजिर है बहुत ख़ूब वाह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत बधाई "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय संजय शुक्ला जी नमस्कार उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय निलेश बरई ( नवाज़िश ) जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय आज़ी तमाम जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें चौथा शैर ख़ास तौर पे बहुत पसंद आया! बहुत बहुत बधाई "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब आदाब उम्दा ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें चौथा शैर क्या ख़ूब हुआ है वाह्ह्हह्ह्ह्ह! क्या कहने! बहुत बहुत बधाई "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय नाथ सोनाँचली जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें 'कभी सच कह के फंस जाते हैं हम ऐसा भी होता है ' वाह  बहुत उम्दा बहुत बधाई "
Mar 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर '  जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Mar 26

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई
ज़िन्दगी है की हादसा कोई

वो पुराने ज़माने की बात है
अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का है न फ़लसफ़ा कोई

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 27, 2020 at 6:02pm — 13 Comments

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

22 22 22 2जग में नाम कमाना हैबाद उसके मर जाना है. (1)रखता हूँ मैं दर्द छुपा कर दिल में जो तहख़ाना…See More
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आ. आकांशी जी, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सबसे बड़े डॉक्टर (लघुकथा): डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आपकी सार्थक लघुकथा पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई | वर्तमान में इस प्रकार…"
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" and Pratibha Pandey are now friends
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||. कभी धूप कुहरा घना, कभी…See More
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , अत्यंत मार्मिक , सामयिक प्रस्तुति के लिए अनेकानेक बधाइयां , सादर।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , आपकी रचना पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. अमिता जी, गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार ।"
Thursday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service