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Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Male
  • gorakhpur, gonda u.p.
  • India
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Samar kabeer commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिम बहुत ज़ियादा मात्रा पतन से मिसरे रवानी में नहीं हैं,बधाई स्वीकार करें । 'सब थकन मेरी पी जाती है ये धूप' इस मिसरे को यूँ कहना उचित होगा:- 'जब थकन पी जाती है मेरी ये धूप'"
11 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आदरणीय समर सर ग़ज़ल पर आपका बेसब्री से इंतजार था। पोस्ट में अरकान लिखना भूल गया।  2122 2122 212"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, इस ग़ज़ल पर कुछ लिखने से पहले जानना चाहता हूँ कि आपने अरकान क्या लिये हैं?"
13 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है बधाई ......"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आ. भाई क्रिस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"जनाब कृष मिश्रा 'जान' साहिब आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत रश्क मुसीबत रंज कयामत। ऊला मिसरे की तरह सानी को भी असरदार बनाने के लिए सानी में 'रश्क' की जगह 'दर्द' करना मुनासिब…"
yesterday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri posted a blog post

ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'

22 22 22 22इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत रश्क मुसीबत रंज कयामत।**किसको क्या होना है हासिल अपनी अपनी है ये क़िस्मत।**क्यूँ मैं छोडूं यार तेरा दर हक है मेरा करना इबादत।**देख ली हमने सारी दुनिया तुझसी न भायी कोई सूरत।**जोर आजमा ले तू भी पूरा.. देखूँ इश्क़ मुझे या वहशत?**दिन 'जान' ये भी कट जायेंगे देखी है जब उनकी नफरत।**तेरे ही दम से सारे भरम हैं वर्ना क्या दोज़ख़ क्या जन्नत।**तुझसे ही थी जीस्त की जीनत 'जान'कहाँ अब पहले सी हालत।************************* मौलिक व अप्रकाशित *************************See More
yesterday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"वाह सादगी भरी खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। नये से बिम्ब देखने को मिले हैं, ढेरों मुबारकबाद आ. रचना जी।"
yesterday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)
"बहोत खूबसूरत नग़मा हुआ है आदरणीय अमीरुद्दीन सर जी ढेरों मुबारकबाद।"
yesterday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रातें तमस भरी हैं उलझन भरे दिवस हैं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
" बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय भैया बहुत बहुत बधाई।"
Sunday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"हार्दिक आभार भाई गुमनाम पिथौरागढ़ी जी ग़ज़ल पर आपकी मोहब्बतों के लिए।"
Sunday
gumnaam pithoragarhi commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"भाई जी वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई।"
Saturday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आ. भाई गुमनाम जी तहेदिल से बधाई। और मेरे सक्रियता बढ़ाने के अनुरोध को सुनने हेतु बहुत बहुत आभार।"
Saturday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम)
"आपके विशाल हृदय को सादर नमन करता हूँ, आदरणीय।"
Saturday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आ.अमीरुद्दीन अमीर सर ग़ज़ल पर आपके सुखद स्नेह और इस्लाह का सदैव आकांछी रहता हूँ। //सब थकन मेरी पी जाती है ये धूप.// इस मिसरे में एक मात्रा की छूट का फ़ायदा उठाया है।  // 'पी' को 1 के वज़्न पर लेना उचित है?//  इस पर मैं बहुत यकीन से…"
Saturday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"शुक्रिया भाई आजी तमाम जी।"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
u.p
Native Place
gorakhpur
Profession
teacher @ basic education department of up gov.

अभिनय भरी इस दुनिया में

पाने के लिए प्रिय वो हृदय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

दुनियाँ का नियम ये तय

जितना अच्छा जिसका अभिनय

उतना विस्तृत उसका संचय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

भाव-भंगिमाओं के अपने ताने-बाने

भेद न इनका कोई जाने

हृदय की जाने केवल हृदय

इस दुनियाँ का नियम ये तय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

जब भी मै अभिनय करने जाऊ

भेद सब खुल ही जाये..

शब्द न मिले,भावहीन खुद को मै पाऊ

अंतर्मन को चुनूँ?

या किरदार नया निभाऊ?

पर तो,इस दुनिया का नियम ये तय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

रह न जाये उन्माद,दुःख-सुख भय

मै भी तब रहे न मै

होता है जब सत्य का उदय

हे निर्विकार ! हे निर्भय !

हर लो अपने,मेरे सारे अभिनय..!!

हे निर्विकार ! हे निर्भय !

हर लो अपने,मेरे सारे अभिनय..!!

"मौलिक व अप्रकाशित"

-‘कृष्णा मिश्रा’

Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's Blog

ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'

22 22 22 22

इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत

रश्क मुसीबत रंज कयामत।

**

किसको क्या होना है हासिल

अपनी अपनी है ये क़िस्मत।

**

क्यूँ मैं छोडूं यार तेरा दर

हक है मेरा करना इबादत।

**

देख ली हमने सारी दुनिया

तुझसी न भायी कोई सूरत।

**

जोर आजमा ले तू भी पूरा..

देखूँ इश्क़ मुझे या वहशत?

**

दिन 'जान' ये भी कट जायेंगे

देखी है जब उनकी नफरत।

**

तेरे ही दम से सारे भरम हैं

वर्ना क्या दोज़ख़ क्या…

Continue

Posted on February 23, 2021 at 5:02pm — 2 Comments

ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'

नेह के आंसू को सरजू कहता हूँ

अपनेपन से तुझको मैं तू कहता हूं।

                    **

रात छत पे जब निकल आता है तू

इन सितारों को मैं जुगनू कहता हूँ।                      **   

       

 ये जो तन से मेरे आती है महक़..

मैं इसे भी तेरी खुशबू कहता हूँ।

                      **

ये अदब,शोख़ी, नज़ाकत, लहज़े में..

मैं इसी लहज़े को उर्दू कहता हूँ।

                      **

सब थकन मेरी पी जाती है ये धूप

मैं सदा को तेरी…

Continue

Posted on February 19, 2021 at 7:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल: 'एक पल को''

2122 1212 22 (112)

मुझको तू गर मिला नहीं होता

इश्क़ है क्या पता नहीं होता।

               **

एक पल को जुदा नहीं होता.

ग़म तेरा बेवफ़ा नहीं होता।

                 **

रोज इक ख़त मैं लिखता हूँ तुझको

और तेरा 'पता' नहीं होता।

                

                  **

दो जहाँ हमने एक कर डाले

दर्द बढ़कर दवा नहीं होता।

                   **

इश्क़ है गर तो सोचता है क्या?

इश्क़ होता है या नहीं होता।

   …

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Posted on February 15, 2021 at 3:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल~ 'इनकार मुझे'

2122 1122 2(11)2

ये अलग बात है इनकार मुझे

तेरे साये से भी है प्यार मुझे।

                **

सामने सबके बयाँ करता नहीं

रोज दिल कहता है, सौ बार मुझे।

                 **

लफ्ज़ दर लफ्ज़ मैं बिक जाऊं अगर

तू खरीदे सरे बाजार मुझे।

                  **

था हर इक दिन कभी त्यौहार की तर्ह

भूल अब जाता है इतवार मुझे।

                  **

चाहकर मैं तुझे, मुजरिम हूँ तेरा

क्यूँ नहीं करता गिरफ़्तार मुझे

   …

Continue

Posted on February 6, 2021 at 11:30pm — 10 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 12:49pm on January 28, 2019, क़मर जौनपुरी said…
आदाब मोहतरम
मोबाइल no देने की मेहरबानी करें
At 4:53pm on August 2, 2015, maharshi tripathi said…

भाई जी ,कृपया  मुझे अपना मोबाइल num  msg करें|

At 10:33pm on July 4, 2015, shree suneel said…
आदरणीय भाई कृष्ण मिश्रा जी, आप से मित्रता मेरे लिए गौरव की बात है. स्वागत.
At 5:10pm on July 2, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका आदरणीय कृष्णा मिश्रा जान गोरखपूरी जी
At 11:27pm on June 30, 2015, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

भाई जी नमस्कार.      हृदय के स्पंदन की भांति दोस्ती भी बडे सौभाग्य से मिलती है.

                           ..आपका हार्दिक स्वागत है.   सादर

At 10:08pm on May 29, 2015, maharshi tripathi said…

आ. बड़े भाई  जी ,,पिछले माह का सक्रिय सदस्य आपको चुने जाने पर ,,हार्दिक बधाई |

At 1:23am on May 22, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय कृष्ण भाई जी,  आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकमनाएं 

At 7:48pm on April 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

प्रिय कृष्णा

आपको मित्र पाकर मेरा गौरव बढा , निस्संदेह .  स्नेह.

At 12:19pm on April 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय
कृष्णा मिश्रा 'जान' गोरखपुरी जी,
सादर अभिवादन

 माह का सक्रिय सदस्य बनने पर मेरी और से बहुत बहुत  बढ़ायी. सस्नेह .

                                                     गोपाल नारायन श्रीवास्तव  

At 10:30pm on April 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
कृष्णा मिश्रा 'जान' गोरखपुरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
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