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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जैसे तैसे यार  सीखे  फूल  सा शरमाना हमपर अदा से कर न पाये चाँद को दीवाना हम।१।*हमको किस्मत ने बहारें यार जब लिक्खीं नहींजायें तब किस ठौर बोलो छोड़कर वीराना हम।२।*आये थे गम यूँ मिटाने पर उभरकर आया वोहो गये साकी से रुसवा तोड़ कर पैमाना…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"सभी माननीयों को सादर अभिवादन।"
17 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमको समझ नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. दीपांजलि जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, उत्साहवर्धन के लिए आभार.."
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई चेतन जी, रचना पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन और सुझाव के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, चित्रानुरूप बहुत सुन्दर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत ही उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई । "
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"जी, निश्चित तौर पर कई जगह गेयता बाधित हो रही है । आपके सुझावानुसार शब्द संयोजन पर ध्यान देकर सुधारने का प्रयास कर अन्य रचनाओं के साथ प्रस्तुति का प्रयास करूँगा । सादर.."
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। रचना पर आपकी उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार । मैंने 16-15 की यति का ही प्रयास किया है। फिर भी गणना किस प्रकार से लेना चाहिएकुछ दुविधा सी है। अतः  रचनागत कमियों को थोड़ा इंगित कर देते तो इस छंद में पारंगत होने…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हमको समझ नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ कहते है लोग प्रीत  की  हमको समझ नहीं दुश्मन के साथ मीत की हमको समझ नहीं।१। * नफरत ही नित्य बँट  रही  सरकार इसलिए आँगन में उठती भीत की हमको समझ नहीं।२। * न्योतो  न  आप  मंच  से  महफिल  बिगाड़ने कविता गजल या गीत की हमको समझ नहीं।३। * हम ने सदा  ही  धूप  का  रस्ता  बुहारा  पर रिश्तों में पसरी शीत की हमको समझ नहीं।४। * समझा नहीं है  खेल  मुहब्बत  को इसलिए इस में ही हार जीत की  हमको समझ नहीं।५। * यूँ तो समूचे जग  का  चलन सीखा यार पर क्योंकर स्वयं के रीत की हमको समझ नहीं।६। * हस्ती हमारी मिट के ही इक दिन रहेगी फिर कुछ भी अगर अतीत की हमको समझ नहीं।७। (२२-७-२१) मौलिक /अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई चेतन जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Saturday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//क्या इस बह्र को किसी और प्रचलित बह्र में बदला जा सकता है?// बिल्कुल बदला जा सकता है, आपका मतला देखें:- 'जिसका अपना यहाँ दायरा कम हैआसमाँ को भी  वो  मानता कम है' अब आपके इस मतले को हम 2122 1212 22/112 पर ऐसे कर सकते…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आकाश लाल है सूर्य उदित, जनता उठी सवेरा जान।सत्ता के सारे झूठ मिटा, वो गढ़ने अब नव प्रतिमान।।पाये हैं शासन से जितने, हर  दुख का अब उसको भान।अभिलाषा है मन में केवल, हर मुख पर हो बस मुस्कान।।*इठलाते हैं सेवक राजा, सिर पर पहन दम्भ का ताज। देते झूठे…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन.."
Saturday
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर अभिवादन अच्छी  ग़ज़ल  हुई है, बधाई स्वीकार करें"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अनीस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jul 21
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"अच्छी  ग़ज़ल  हुई है, भाई 'मुसाफिर,  ! लेकिन  चौथा शैर , बात औरों के सिर डाल कर देखो  / अपने ईमान को तौलता  कम है " में  रब्त का अभाव है, सादर  "
Jul 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार ।  क्या इस बह्र को किसी और प्रचलित बह्र में बदला जा सकता है? मार्गदर्शन करने की क्रिपा करें।"
Jul 21
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ये प्रचलित बह्र नहीं है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । "
Jul 21

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

हमको समझ नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



कहते है लोग प्रीत  की  हमको समझ नहीं

दुश्मन के साथ मीत की हमको समझ नहीं।१।

*

नफरत ही नित्य बँट  रही  सरकार इसलिए

आँगन में उठती भीत की हमको समझ नहीं।२।

*

न्योतो  न  आप  मंच  से  महफिल  बिगाड़ने

कविता गजल या गीत की हमको समझ नहीं।३।

*

हम ने सदा  ही  धूप  का  रस्ता  बुहारा  पर

रिश्तों में पसरी शीत की हमको समझ नहीं।४।

*

समझा नहीं है  खेल  मुहब्बत  को इसलिए

इस में ही…

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Posted on July 25, 2021 at 5:17am — 1 Comment

उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२/२१२/२१२ /२२

जिसका अपना यहाँ दायरा कम है

आसमाँ को भी  वो  मानता कम है।१।

*

मुझसे कहता है क्यों पूजता कम है

देख तुझ  में  भी  तो  देवता कम है।२।

*

जो  ठहरना  नहीं  चाहता  साथी

उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है।३।

*

बात औरों के सिर डालकर देखो

अपने  ईमान  को  तौलता कम है।४।

*

पास  बैठा  है  लेकिन  अबोला  ही

कौन कहता है अब फासला कम है।५।

*

हर बुराई …

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Posted on July 21, 2021 at 9:43am — 5 Comments

रात भर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२१/१२२१/२१२

आँखों में नींद ला के जगाती है रात भर

पाकर अकेला याद जो आती है रात भर।१।

*

कैसे हो चैन देह को मन को सुकून तब

शोलों सी चाँदनी ये जलाती है रात भर।२।

*

होने लगी है जुल्फ जो उसकी सफेद यूँ

आँखों के आँसुओं से नहाती है रात भर।३।

*

बजती हवा से दूर जो मंदिर की घन्टियाँ

आवाज दे के लगता बुलाती है रात भर।४।

*

आता है याद माँ का वो दामन हमें बहुत

जब रात सर्दियों  की सताती है रात…

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Posted on July 12, 2021 at 7:30am — 5 Comments

करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



सेवा  के  नाम  खाते  हैं  मेवा  छिपा  हुआ

इनके सिवा बताओ तो किसका भला हुआ।१।

*

मिलती हैं रोटियाँ जो ये कुर्सी के खेल से

है रक्त बेबशों  का  भी  इन में लगा हुआ।२।

*

मुकरे  हैं  नेता  सारे  ही  देकर  वचन हमें

करके दिखाया देश  में  किसने कहा हुआ।३।

*

नेता हुए हैं आज  के  गिरगिट सरीखे सब

खादी को ऐसे कर दिया सबसे गिरा हुआ।४।

*

ये  नीरो  जैसे  देश  में  रहते  हैं …

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Posted on July 11, 2021 at 2:41am — 4 Comments

Comment Wall (20 comments)

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At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

 
 
 

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