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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन।गीत पर पुनः उपस्थिति और विस्तृत सुझावपूर्ण टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार। आपके द्वारा बताई गीत की बारीकियों से लेखन में सुधार करने में बहुत सहायता मिलेगी। इन बारीकियों को समझाने के लिए अतिरिक्त आभार। गीत में सुधार का…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। रचना पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गीत का प्रयास अच्छा हुआ है। लेकिन कई जगह गेयता बाधित हो रही है।लगता है इस बार आपने जल्दबाजी में प्रस्तुति दी है।  फिलहाल इस प्रस्तुति के लिए बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। बहुत उत्तम गीत रचा है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई समर जी,सादर अभिवादन। गीत पर उपस्थिति से उत्साहवर्धन के लिए आभार। इंगित पंक्ति में सुधार करता हूँ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई मिथिलेश जी, इस स्नेहभरी त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आभार। विस्तृत टिप्पणी और सुझाव की प्रतीक्षा है।सादर.."
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई अशोक जी सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। शब्दों में बदलाव का प्रयास करता हूँ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। दोहों पर सुन्दर दोहावली से मनभावन प्रतिक्रिया और स्नेह के लिए बहुत बहुत आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई दिनेश जी, सादर अभिवादन।दोहों पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन, और उत्तम सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन।  सार छंद के माध्यम से आपने प्रदत्त  विषय को सार्थकता प्रदान की है। सभी छंद मनोरम हुए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकारें। "
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई दिनेश जी, सादर अभिवादन।प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई."
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय को साकार करती सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर उत्तम गीत हुआ है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"जन-जन बन जाता जो मालीसधते  जल-जीवन-हरियाली।।*काटे जंगल, नदियाँ लूटी व्यापारी बन दौलत कूटी।।मोल न जाना इस माटी कादोहन कर डाला धरती का।।गगन भले पिण्डों की थालीगढ़ी  हुई  सब  नजरें काली।।*मंगल, चाँद तलाशे अम्बरसंचित करते नहीं धरा…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-164
"दोहे *** जनसाधारण मौन  है, चुप्पी  साधे संतमंथर मंथर हो रहा, हरियाली का अन्त।१।*मुरझायी यूँ ही  नहीं, हरियाली की धारअमृत पानी का करे, सारा जग व्यापार।२।*उद्योगों  की  गन्दगी, डाल  नदी  के तीरहरियाली जीवन सहित,…"
Jul 13
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आ. भाई संजय जी, सादर आभार।"
Jun 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आ. भाई दयाराम जी, स्नेह के लिए सादर आभार।"
Jun 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आ. भाई जैफ जी, सादर आभार।"
Jun 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

सीमा के हर कपाट को - (गजल)-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

कानों से  देख  दुनिया  को  चुप्पी से बोलना

आँखों को किसने सीखा है दिल से टटोलना ।१।

*

कौशल तुम्हें तो आते हैं ढब माप तौल के

जब चाहो खूब नींद को सपनों से तोलना।२।

*

कब जाग जाये कौन  सा  बदज़ात जानवर

सीमा के हर कपाट को खुलकर न खोलना ।३।

*

करना हमेशा अन्न का जीवन में मान तुम

चाहे पड़े  भकोसना  या फिर कि चोलना।४।

*

चक्का समय का घूम के लौटा है फिर वहीं

जिस में…

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Posted on June 8, 2024 at 5:44am

बनो सब मीत होली में -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

निभाकर  रीत होली में

दिलों को जीत होली में।१।

*

भरें  जीवन  उमंगों से

चलो गा गीत होली में।२।

*

सभी सुख दुश्मनी छीने

बनो सब  मीत  होली में।३।

*

बहुत विरही तड़पता है

सफल हो प्रीत होली में।४।

*

किसी को याद मत आये

गयी  जो  बीत  होली  में।५।

*

लगे अब रोग कहते हैं

दुखों को पीत होली में।६।

*

गिरा दो  रंग  बरसाकर

खड़ी हर भीत होली में।७।

*

यही अरदास है पिघलें

दिलों की शीत होली…

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Posted on March 21, 2024 at 6:55am

है खुश खूब झकझोर डाली हवा- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२/१२२/१२२/१२

नगर भर  चले  दौड़  काली हवा

है खुश खूब झकझोर डाली हवा।१।

*

गिरे फूल कलियाँ विवश भूमि पर

बजा  पात  कहती  है  ताली हवा।२।

*

कभी दान जीवन सभी को दिया

हुई  आज  लेकिन  सवाली  हवा।३।

*

कहाँ  से  प्रदूषण  धरा  का  मिटे

नहीं  सीख  पायी  जुगाली  हवा।४।

*

कँपा शीत में नित बढ़ी जब तपन

गयी   लौट   कुल्लू मनाली   हवा।५।

*

तनिक तो कहीं बात होती है कुछ

किसी की चली कब है…

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Posted on March 6, 2024 at 11:04am — 6 Comments

चलो अब तो साँसों इसे छोड़कर- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२/१२२/१२२/१२

*

हमें  एक  नदिया  मिली  नाम की

न थी वो किसी प्यास के काम की।१।

*

जिसे देश कहते  हैं  सब राम का

वहीं  पर  फजीहत  हुई  राम की।२।

*

दुखाती है मन जो  महज याद से

करो अब न  बातें  उसी शाम की।३।

*

बिना उस के ये भी परायी गली

शरण में चलें  कौन  से धाम की।४।

*

मिटायेगी  वाणी  सभी  दूरियाँ

मिठासें रखो बस पके आम की।५।

*

चलो अब तो साँसों इसे छोड़कर

घड़ी आ गयी तन…

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Posted on February 29, 2024 at 10:42pm

Comment Wall (17 comments)

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At 10:59am on January 25, 2023, Anita Bhatnagar said…

सादर आभार आदरणीय 

At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

 
 
 

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