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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अनीस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Wednesday
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"अच्छी  ग़ज़ल  हुई है, भाई 'मुसाफिर,  ! लेकिन  चौथा शैर , बात औरों के सिर डाल कर देखो  / अपने ईमान को तौलता  कम है " में  रब्त का अभाव है, सादर  "
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार ।  क्या इस बह्र को किसी और प्रचलित बह्र में बदला जा सकता है? मार्गदर्शन करने की क्रिपा करें।"
Wednesday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ये प्रचलित बह्र नहीं है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । "
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आ. भाई सुशील जी, अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Om Parkash Sharma's blog post दोहे
"आ. भाई ओम प्रकाश जी, सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।  दूसरे दोहे में वसन को वस्त्र करने से विन्यास अच्छा लगेगा। देखिएगा"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२/२१२/२१२ /२२जिसका अपना यहाँ दायरा कम है आसमाँ को भी  वो  मानता कम है।१। * मुझसे कहता है क्यों पूजता कम है देख तुझ  में  भी  तो  देवता कम है।२। * जो  ठहरना  नहीं  चाहता  साथी उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है।३। * बात औरों के सिर डालकर देखो अपने  ईमान  को  तौलता कम है।४। * पास  बैठा  है  लेकिन  अबोला  ही कौन कहता है अब फासला कम है।५। * हर बुराई  यहाँ  मिट  तो  जायेगी अच्छे लोगो में पर हौसला कम है।६। * नींद इस को भले ढब नहीं आती देश अपना  मगर  जागता कम है।७। (१५-७-२१) मौलिक अप्रकाशित लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"See More
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"आ. भाई चेतन जी, सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
Jul 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"आ. भाई दयाराम जी, प्रदत्त विषय पर अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , सराहना और गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार..."
Jul 17
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रात भर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'बजती हवा से दूर जो मंदिर की घन्टियाँ' इस मिसरे में 'बजती' को "बजतीं" कर लें । 'साकी गगन से जाम गिराती है रात…"
Jul 17
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'है रक्त बेबशों  का  भी  इन में लगा हुआ' इस मिसरे में 'बेबशों' को "बेबसों" कर लें ।"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहते पुजारी मुझ से हैं तू देवता बदल- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहते पुजारी मुझ से हैं तू देवता बदल- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद ।"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भूख का व्यापार मत करवाइए- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"पहली प्रस्तुति - दोहे कैसे कैसे लोग ये, खुश जो होकर लाशइनमें से कुछ गिद्ध सा, मौका रहे तलाश।१।*एक निवाला बाँटकर, मान रहे जो छीनकैसे कैसे  लोग  ये, हैं  तन मन  से हीन।२।*मैली  रखते  जिन्दगी, कैसे  कैसे  लोग…"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"सादर अभिवादन।"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आ. रचना बहन, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति .......
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर अभिव्यक्ति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post सुलगते अन्धेरे. . . .
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jul 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२/२१२/२१२ /२२

जिसका अपना यहाँ दायरा कम है

आसमाँ को भी  वो  मानता कम है।१।

*

मुझसे कहता है क्यों पूजता कम है

देख तुझ  में  भी  तो  देवता कम है।२।

*

जो  ठहरना  नहीं  चाहता  साथी

उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है।३।

*

बात औरों के सिर डालकर देखो

अपने  ईमान  को  तौलता कम है।४।

*

पास  बैठा  है  लेकिन  अबोला  ही

कौन कहता है अब फासला कम है।५।

*

हर बुराई …

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Posted on July 21, 2021 at 9:43am — 3 Comments

रात भर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२१/१२२१/२१२

आँखों में नींद ला के जगाती है रात भर

पाकर अकेला याद जो आती है रात भर।१।

*

कैसे हो चैन देह को मन को सुकून तब

शोलों सी चाँदनी ये जलाती है रात भर।२।

*

होने लगी है जुल्फ जो उसकी सफेद यूँ

आँखों के आँसुओं से नहाती है रात भर।३।

*

बजती हवा से दूर जो मंदिर की घन्टियाँ

आवाज दे के लगता बुलाती है रात भर।४।

*

आता है याद माँ का वो दामन हमें बहुत

जब रात सर्दियों  की सताती है रात…

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Posted on July 12, 2021 at 7:30am — 5 Comments

करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



सेवा  के  नाम  खाते  हैं  मेवा  छिपा  हुआ

इनके सिवा बताओ तो किसका भला हुआ।१।

*

मिलती हैं रोटियाँ जो ये कुर्सी के खेल से

है रक्त बेबशों  का  भी  इन में लगा हुआ।२।

*

मुकरे  हैं  नेता  सारे  ही  देकर  वचन हमें

करके दिखाया देश  में  किसने कहा हुआ।३।

*

नेता हुए हैं आज  के  गिरगिट सरीखे सब

खादी को ऐसे कर दिया सबसे गिरा हुआ।४।

*

ये  नीरो  जैसे  देश  में  रहते  हैं …

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Posted on July 11, 2021 at 2:41am — 4 Comments

कहते पुजारी मुझ से हैं तू देवता बदल- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



रस्ता बदल न और कभी काफ़िला बदल

केवल तू अपनी सोच का ये दायरा बदल।१।

*

मिलती है राह कर्म से जन्नत की भी मगर

किस्मत को जीतने के लिए हौसला बदल।२।

*

है जानकार जो  भी  वो  पैसों के पीछे बस

जिसको पता न रोग का कहता दवा बदल।३।

*

चेहरा ही अपना दाग से करता जो गुफ्तगू

क्या होगा हमको लाभ बता आईना बदल।४।

*

पूजा का खुद को तौर तरीका न आता है

कहते पुजारी मुझ से  हैं  तू देवता बदल।५। …

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Posted on July 10, 2021 at 7:00am — 4 Comments

Comment Wall (20 comments)

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At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

 
 
 

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