For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
Share

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Friends

  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Pratibha Pandey
  • babita garg
  • Ajay Tiwari
  • amod shrivastav (bindouri)
  • TEJ VEER SINGH
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • harivallabh sharma
  • Manoj Chhapariya
  • Dr.Vijay Prakash Sharma
  • भुवन निस्तेज
  • gumnaam pithoragarhi
  • Nilesh Shevgaonkar
  • गिरिराज भंडारी
 

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई राजनवादवी जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई दण्डपाणि जी हार्दिक धन्यवाद ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, हार्दिक आभार ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई राज नवादवी जी, सादर अभिवादन । गजल की प्रशंसा के लिए आभार । मंच पर लम्बे अंतराल के बाद आपकी उपस्थिति सुखद है ।"
Mar 28
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, कोरोना पर अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।  द्वार'घर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार' इस पंक्ति में एक वचन,बहुवचन दोष देख लें । 'कोरोना पर  वार  को, यही सफल …"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई अनीस जी, हार्दिक आभार ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. अंजलि जी, हार्दिक धन्यवाद।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा व मार्गदर्शन के लिए आभार ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई गुलशन जी, इस प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई अनीस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. अंजलि जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई गलशन जी, सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । सुंदर गिरह के साथ बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"बात जायज है के कोरोना का डर बनता हैहाथ पर हाथ  रखे  छुपना किधर बनता है।१।**सिर्फ सरकार भरोसे तो न होगा कुछ भीकीजिए खूब जो सहयोग अगर बनता है।२।**घर में टिकना भी तो महफूज रखेगा हमकोसोचिये आप  न  इस  वक्त  सफर बनता…"
Mar 27
Dr Ashutosh Mishra commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह शानदार भाई लक्ष्मणजी हार्दिक बधाई आपको"
Mar 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी -गजल
"रचना को फीचर्ड करने के लिए सम्पादक मण्डल का हार्दिक आभार ।"
Mar 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कोरोनामय जग हुआ, फीका पड़ा बसन्तमाँगे खुद की खैर अब, राजा, रंक, महन्त।१।**जन्मा चाहे चीन में, लाये अपने लोगजिससे सारे देश में, फैल रहा यह रोग।२।**विकट घड़ी में आपदा, आयी सबके द्वारघर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार।३।**घर में बैठो चन्द दिन, ढककर खिड़की द्वारकोरोना पर  वार  को, यही सफल  हथियार।४।**आज चिकित्सक का कहा, थोड़ा मानव मानघर  में  चुपके  बैठ  कर, होगा  रोग  निदान।५।**करो नमस्ते दूर से , नहीं मिलाओ हाथवरना झट से आएगा, कोरोना भी साथ।६।**सजग नागरिक बन करो, शासन का सहयोगफिर  पहुँचेगा  अन्त  को,  यह  कोरोना  रोग।७।**कोरोना  के  अन्त  तक, रहें  भीड़  से  दूरदिनभर जितना हो सके, तरल पियें भरपूर।८।** दूरी अपने - गैर से, रखने  का  औचित्यजीवन तेरा जो बचा, खूब मिलेगा नित्य।९। **कोरोना से  भय  नहीं, जिन  लोगों  को यारज्ञानी उनको मत समझ, वो जग पर हैं भार।१०।**मौलिक-अप्रकाशितSee More
Mar 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post was featured

किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी -गजल

१२२२ /१२२२/ १२२२ /१२२२/* कभी कतरों में बँटकर  तो  कभी सारा गिरा कोई मिला जो माँ का आँचल तो थका हारा गिरा कोई।१।* कि होगी कामना  पूरी किसी  की लोग कहते हैं फलक से आज फिर टूटा हुआ तारा गिरा कोई।२।* गमों की मार से लाखों सँभल पाये नहीं  लेकिन सुना हमने यहाँ  खुशियों  का भी मारा गिरा कोई।३।* किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी उसी की फड़फड़ाहट से वहाँ कारा गिरा कोई।४।* पतित कर आचरण को नित धरासायी उजाले हैं सुना अबतक मगर यारो न अँधियारा गिरा कोई।५।*मौलिक.अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Mar 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कोरोनामय जग हुआ, फीका पड़ा बसन्त

माँगे खुद की खैर अब, राजा, रंक, महन्त।१।

**

जन्मा चाहे चीन में, लाये अपने लोग

जिससे सारे देश में, फैल रहा यह रोग।२।

**

विकट घड़ी में आपदा, आयी सबके द्वार

घर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार।३।

**

घर में बैठो चन्द दिन, ढककर खिड़की द्वार

कोरोना पर  वार  को, यही सफल  हथियार।४।

**

आज चिकित्सक का कहा, थोड़ा मानव मान

घर  में  चुपके  बैठ  कर, होगा  रोग  निदान।५।

**

करो नमस्ते दूर से , नहीं मिलाओ…

Continue

Posted on March 24, 2020 at 8:04pm — 2 Comments

किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी -गजल

१२२२ /१२२२/ १२२२ /१२२२/

*

कभी कतरों में बँटकर  तो  कभी सारा गिरा कोई

मिला जो माँ का आँचल तो थका हारा गिरा कोई।१।

*

कि होगी कामना  पूरी किसी  की लोग कहते हैं

फलक से आज फिर टूटा हुआ तारा गिरा कोई।२।

*

गमों की मार से लाखों सँभल पाये नहीं  लेकिन

सुना हमने यहाँ  खुशियों  का भी मारा गिरा कोई।३।

*

किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर…

Continue

Posted on March 18, 2020 at 6:17am — 3 Comments

रंगों के घन खूब उड़ायें - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

***

आओ नाचें,  झूमें, गायें  फिर  से अब के होली में

इक-दूजे को खूब लुभायें फिर से अब के होली में।१।

**

देख के जिसको मन ललचाये ज़न्नत के वाशिन्दों का

रंगों के  घन  खूब  उड़ायें  फिर  से  अब के होली में।२।

**

जीवन में  रंगत  हो  सब  के  संदेश  हमें देे होली 

रोते जन को यार हँसायें फिर से अब के  होली में।३।

**

आग सियासत चाहे कितनी यार लगाये नफरत की

प्रेम…

Continue

Posted on March 10, 2020 at 7:30am — 8 Comments

रक्खो भुजंग जैसा चन्दन में आदमी को - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२२/२२१/२१२२

*

फूलों की क्या जरूरत उपवन में आदमी को

भाने  लगे  हैं  काँटे  जीवन  में  आदमी  को।१।

**

क्या क्या मिला हो चाहे मन्थन में आदमी को

विष की तलब रही  पर  जीवन में आदमी को।२।

**

आजाद जब है  रहता उत्पात करता बेढब

लगता है खूब अच्छा बन्धन में आदमी को।३।

**

आता बुढ़ापा जब है रूहों की करता चिन्ता

तन की ही भूख केवल यौवन में आदमी को।४।

**

कितना हरेगा विष ये चाहे पता नहीं पर

रक्खो भुजंग जैसा चन्दन में आदमी…

Continue

Posted on March 5, 2020 at 4:21pm — 2 Comments

Comment Wall (15 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dr. Geeta Chaudhary commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर सर, सुंदर प्रस्तुति, बिल्कुल सही कहा आपने बहुत ही अनोखा अनुभव इस मंच का। …"
7 hours ago
Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) posted a blog post

ग़ज़ल: अमर नाथ झा

चाहते हो तुम मिटाना नफ़रतों का गर अँधेरा हाथ में ले लो किताबें जल्द आएगा सवेराहै जहालत का कुआँ गहरा…See More
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

क्षणिकाएँ :

क्षणिकाएँ :थरथराता रहा एक अश्क आँखों की मुंडेर पर खंडित हुए स्पर्शों की पुनरावृति की प्रतीक्षा…See More
10 hours ago
कंवर करतार posted a blog post

ग़ज़ल

ग़ज़ल 1222    1222      1222       1222कोई कातिल सुना जो  शहर में है बेजुबाँ आयाकिसी भी भीड़ में छुप…See More
10 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)
"भाई Salik Ganvir  जी , उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार | "
12 hours ago
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कवीर साहब ,आदाब कवूल करें I आपके सुझाव बेमिसाल हैं , अश'आर को निखारने के लिए बहुत…"
13 hours ago
Salik Ganvir commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)
"आदरणीय गहलोत जी एक शानदार ग़ज़ल पोस्ट करने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. वाह. कबूतरों की हवस हो…"
14 hours ago
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कवीर साहब ,आदाब कवूल करें I आपके सुझाव बेमिसाल हैं , अश'आर को निखारने के लिए बहुत…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"'धरा रह जायेगा  इन्सान का हथियार हर कोई ' ये मिसरा ठीक है । 'घरों में कैद होकर…"
16 hours ago
Dr Vandana Misra posted a blog post

"विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक

विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक*****************************सर्वे भवन्तु सुखिनः की आज करें मिल…See More
17 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय प्रयास जारी रहेगा आशीर्वाद बनाए रखें"
18 hours ago
Salik Ganvir posted blog posts
19 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service