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seemahari sharma
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Hoshangabad
Profession
house wife
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having fond of reading & writing.

Seemahari sharma's Blog

कितना तामझाम...(नवगीत ) सीमा हरि शर्मा

कितना तामझाम....(नवगीत)



कितना तामझाम पसराया

जीवन आँगन में।



स्वर्णिम किरणें सुबह जगाती

दिन भर आपाधापी है।

साँझ धुँधलके से घिर जाती

रात तमस ले आती है।

तम को रोज झाड़ बुहरया

जीवन आँगन में।....कितना तामझाम पसराया



गजब मुखोटे मुख पर सजते

तन मशीन के कलपुर्जे।

जीने का दम भरने वाले

मानव ने ये खुद सरजे।

दूर खड़ा मन है खिसियाया

जीवन आँगन में।.....कितना तामझाम पसराया



रेलम पेला धक्का मुक्की

चलती…

Continue

Posted on December 26, 2014 at 12:00pm — 14 Comments

गज़ल ज़िन्दगी जाती सरकती..... सीमा हरि शर्मा

जिंदगी जाती सरकती

ज़िन्दगी जाती सरकती।
लाख पकड़ो कब ठहरती।

जो भी पल समझा मुकम्मल।
फिर नई इक दौड़ चलती।

सूर्य समझा जो सहर का।
शाम थी लाली फिसलती।

थक चुका है जिस्म चलते।
चाह से क्या जां निकलती।

धुन्द जब है कुछ पलों की।
रश्मि आखिर क्यों अटकती।

झूमती दिखती जो डाली।
आँधियों से है सिहरती।

रात से लड़ता है दीपक।
आस सुबहा की मचलती।
सीमा हरि शर्मा 24.12.2014
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on December 24, 2014 at 12:43pm — 18 Comments

नव वर्ष पर ...हों सृजन अब कुछ नये से..

नव वर्ष पर....



हों सृजन अब कुछ नये से.....

कुछ नई सी कल्पनाएं।

फिर नया यह वर्ष आओ

हम सभी मिलकर मनाएं।



छोड़ दें हम पंगु सब

परिपाटियों को।

दें नये स्वर से गुँजा

इन वादियों को।

जो सुखद सी सीख गत से

है मिली थाती हमें

साथ ले बढ़ते चले हम

तोड़ कर सब वर्जनाएं।



फिर नया यह वर्ष आओ

हम सभी मिलकर मनाएं।



मुफलिसी सीलन भरे

कोनों पसरती।

जिन्दगी भय लूट के

सायों सिसकती

घूप पर हक है सभी… Continue

Posted on December 19, 2014 at 5:38pm — 12 Comments

बालपन की मस्तियाँ ....(.नवगीत) सीमा हरि शर्मा

* बालपन की मस्तियाँ *



इंद्रधनुषी रंग उतरे

हैं फलक पर से जमीं

बालपन की मस्तियों में

रंग सारे चुन रहे।



मन लुभाती हैं सदा ही

तोतली सी बोलियाँ

बात बेमतलब भले पर

शब्द मिसरी गोलियाँ

फूल झरते ओंठ से सब

तोल मोलों से परे

बस करें अपने दिलों की

ना किसी की सुन रहे।...बालपन की मस्तियों में



सर्द शामें पैर नंगे

फर्श पर जब दौड़ते

घुमती पीछे तभी माँ

चप्पलों को हाथ ले

चूमती है गाल ढककर

माँ कभी आँचल… Continue

Posted on November 22, 2014 at 12:30am — 16 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 6:51pm on November 18, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीया सीमाहरी शर्मा जी माह की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर आपको हार्दिक हार्दिक बधाई. 

At 11:40am on November 16, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

महनीया सीमाहरी जी

आपकी कविता का विषय  इतना अच्छा था की i इसे पुरस्कार मिलना ही चाहिये था i एडमिन ने बिलकुल सही निर्णय लिया i आपको हजारों हजार बधाई   सादर i

At 9:39am on November 16, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया सीमाहरी शर्मा जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना " गीत:गलती क्या थी मेरी माई" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
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शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 12:17pm on October 9, 2014, Chhaya Shukla said…

 स्वागत है प्रिय बहन सीमा हरी शर्मा जी सादर 

At 12:07pm on September 18, 2014, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

आदरणीया सीमाजी ............ राधे - राधे 

आपने इस योग्य समझा , हृदय से धन्यवाद , आभार ।

At 8:59pm on July 29, 2014, vandana said…

सादर स्वागत आदरणीया 

At 11:23am on July 29, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आदरणीया  सीमा हरि शर्मा जी, आपके मित्रता निवेदन  हेतु आपका आभारी हूँ 

. सादर!

At 8:27pm on July 20, 2014, Ashok Kumar Raktale said…

सादर स्वागत है आदरणीया सीमा हरि शर्मा जी. 

At 4:33pm on July 19, 2014, seemahari sharma said…
बहुत आभार आपका आदरणीय डॉ.गोपाल नरायन श्रीवास्तव जी।
At 4:31pm on July 19, 2014, seemahari sharma said…
ह्रदय से आभार आपका आदरणीय कल्पना रामानी जी।
 
 
 

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