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  • सुरेश अग्रवाल
 

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sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"अप्रतिम! अनुपम लेखन आदरणीया ,नमन है आपकी लेखनी को । मेरा हौसला बढ़ाने के हृदयतल से आभार आदरणीया ।"
Dec 15, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आपको रचना पसन्द आई लेखन सार्थक हुआ आदरणीया ,हृदयतल से आभार आपका ।"
Dec 15, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"हृदयतल से आभार आदरणीय ,रचना आपको पसन्द आई ।लेखन सार्थक हुआ सादर।"
Dec 15, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"विषयानुसार बहुत सुंदर कुंडलिया लिखी आदरणीय।कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर । "
Dec 15, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"बहुत ही सुंदर दोहे विषय को सार्थक करते ,कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर।"
Dec 14, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"हृदयतल से आभार आदरणीय रचना की सराहना के लिए ।"
Dec 14, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"लावणी छन्द कोमल है तू कभी कुसुम सी ,तीखी कभी कटारी है। रूप ईश का लेकर नारी ,धरती पर अवतारी है। कभी तोड़ती पत्थर मग में ,गर्मी में भूखी प्यासी। गर्म कराती भोजन सब को ,खुद खा लेती है बासी। अपने शिशु को बाँध पीठ से,रण-कौशल दिखलाती है । कभी धाय पन्ना…"
Dec 14, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"उत्साह वर्धन के लिए हृदयतल से आभार आदरणीया ।"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"उत्साहवर्धन के लिए हृदयतल से आभार आदरणीय ,प्रयास करुँगी उत्तम तुकांत लिखने की । "
Oct 13, 2019
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on sunanda jha 's blog post समानिका छंद
"पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है । बहुत बहुत बधाई"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"हृदयतल से आभार आदरणीय ,यह 16,11 मात्राओं वाला सरसी छन्द है सादर ।"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"पानी तेरी अजब कहानी ,महिमा अपरम्पार।पानी के ही इर्दगिर्द है ,नाचे यह संसार। पानी से ही जीवित रहते ,जीव जंतु या झाड़ ।कम हो तो सूखा कहलाता ,अधिक हुआ तो बाढ़। ढुलक गया तो आँसू बनता ,सूख गया तो शर्म।प्यास मिटाई प्यासे की तो,खूब कमाया धर्म। कहने को…"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"दरख़्त-जंगल, पशु-परिंदेमिट्टी पर सारे वाशिंदेएक-दूजे ख़ातिर जीतेजल से जीवन चला-चलाजल से कल, आज, कल भलाकर भला, सो हो भला .... वाहहहहह !!आदरणीय बहुत सुंदर सटीक संदेश देती सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें सादर ।"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"मुक्तछंद में अनुपम काव्य -सृजन के लिए हृदय से बधाई स्वीकारें सादर ।"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"अद्भुत है यह नीर धन, गुण इसके पहचानस्वर्ग साध सातों जनम, कर प्यासे को दान। वाहहहह!! आदरणीय बहुत सुंदर दोहों के लिए बधाई स्वीकारें सादर ।"
Oct 13, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"बहुत ही सुंदर जनक छंद में रची गई रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें सादर ।"
Oct 13, 2019

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

समानिका छंद

यह एक समवार्णिक छंद है ,जिसमें प्रत्येक चरण में 7 वर्ण होते हैं ,जिनका क्रम 1 रगण + 1 जगण + 1 गुरू होता है।



21 21 21 2 ,21 21 21 2





चाँद खो गया कहीं रात है बता रही।

नींद में सुहासिनी स्वप्न है सजा रही।



प्रीत खो गयी कहीं बावरी पुकारती । पैर के निशान को आस से निहारती ।



तेज है हवा हुई रात भी सियाह है ।

सूझती न राह भी ,वेदना अथाह है ।



ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।

पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है… Continue

Posted on August 28, 2017 at 7:41pm — 10 Comments

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 10 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

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At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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