For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

February 2012 Blog Posts (71)

मुक्ति ......

सुंदर -असुंदर

रूप-रंग

उच्च-नीच

उतार-चढ़ाव

गुड़िया-गहने

बादल-बिजली

फूल-काँटे

जीत-हार

अपना-पराया

मान-अपमान…

Continue

Added by MAHIMA SHREE on February 29, 2012 at 11:00pm — 12 Comments

माँ

बचपन का क्या बयान करू, कुछ याद नहीं रहा दुनियादारी में, 

बस ये नहीं भूला की माँ जागती थी रात भर, मेरी हर बीमारी में. …

Continue

Added by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on February 29, 2012 at 7:30pm — 14 Comments

"मुद्दतें" - ग़ज़ल

हुईं थीं मुद्दतें फिर, वक़्त कुछ ख़ाली सा गुज़रा है;

कोई बीता हुआ मंज़र, ज़हन में आके ठहरा है;



कहीं जाऊं, मैं कुछ सोचूँ, न जाने क्या हुआ है,

मेरी आज़ाद यादों पर किस तसव्वुर का पहरा है;…

Continue

Added by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on February 29, 2012 at 2:51pm — 37 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
तुम्हारी प्रेरणा

उपलब्धियों के मंच पर 

जब भी  कोई तुमसे पूछता कि 
तुम्हारी सफलता के पीछे किसका हाथ है 
तुम हमेशा मुझको अपनी ताकत 
बताते रहे |और उसके बाद
करतल ध्वनी 
की गूंजती आवाज से 
मेरा वो प्रेम का एहसास 
और बुलंद और गर्वित होता चला गया|
याद आया है वो हमारे मिलन का पहला दिन 
जब तुमने मेरे हाथ को थामते हुए कहा था 
कि मेरे अस्तित्व को आज पंख 
मिल गए |
और…
Continue

Added by rajesh kumari on February 29, 2012 at 1:52pm — 14 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
फागुनी दोहे



फाग बड़ा चंचल करे, काया रचती रूप !

भाव-भावना-भेद को, फागुन-फागुन धूप !!



फगुनाई ऐसी चढ़ी,  टेसू धारें आग

दोहे तक तउआ रहे,  छेड़ें मन में फाग ॥



भइ, फागुन में उम्र भी करती जोरमजोर

फाग विदेही कर रहा, बासंती बरजोर !!…



Continue

Added by Saurabh Pandey on February 29, 2012 at 7:30am — 21 Comments

दस फागुनी दोहे -

दस फागुनी दोहे -

मन में संशय न रहे खुले खुले हों बंध ,

नेह छोह के पुष्प से निकले मादक गंध |

 

हुलस उलस इतरा रहे गोरी तेरे अंग ,

मेरे मन बजने लगे ढोल मजीरा चंग |

 

गोरी फागुन रच रहा ये कैसा षडयन्त्र ,

तू कानो में फूंकती आज मिलन के मन्त्र |

 

रंग लगाने के लिए तू बैठी थी ओट ,

मेरा मन…

Continue

Added by Abhinav Arun on February 29, 2012 at 7:30am — 26 Comments

आदर्शों पर चल कर तो देखो

आदर्शों पर चल कर तो देखो,

सर उठा कर जी कर तो देखो.



अत्याचार, ज़ुल्म, और भ्रष्टाचार के आगे

आवाज़ बुलंद करके तो देखो.

मन की राह कठिन है

चुनौतियाँ जटिल है,

पर एक बार आवाज़

बुलंद करके तो देखो

आत्मसम्मान से भर उठोगे

गर्व से सर उठा सकोगे (और)

एक बार जो चख लिया

आत्मसम्मान का स्वाद

तो हर चुनौती पार करने को

बलवला उठोगे

बस ज़रूरत है साहस की

ज़रूरत है हिम्मत की.



आदर्शों पर चल कर तो देखो, …

Continue

Added by Monika Jain on February 29, 2012 at 12:00am — 6 Comments

''चंदा तुम रूठ ना जाना''

कोई सूरज की तारीफ करे तो      

चंदा तुम ना होना गुमसुम l  

 

सूरज की साँसों की गर्मी 

करती है भू का उर्वर तन    

और तुमसे शीतलता पाकर      

कन-कन में होता परिवर्तन

है दोनों की ही हमें जरूरत  

धरती पर मुस्काना दोनों तुम l

 

मौसम के कई रूप बदलते 

कभी पतझर या फिर बसंत 

पर तुम दोनों अटल सदा से   

नभ पर है साम्राज्य अनंत

तुम पर है सारा जग निर्भर   

क्या होगा वरना क्या मालुम…

Continue

Added by Shanno Aggarwal on February 28, 2012 at 9:30pm — 6 Comments

दो मुक्तक

(1)
पीर का सागर हृदय में, मन में भारी वेदना.
अश्रु भी छलके नयन से,शून्य हो गई चेतना.
टूटता है जब हृदय, यह दशा होती सभी की.
जाने कैसे सीखते हैं, लोग दिल से खेलना. ...

(2)
वक़्त की बेवफ़ाई पर तू, आज क्यों पछता रहा.
तू भी सदा वक़्त के संग खिलवाड ही करता रहा.
वक़्त ने तो चाहा हमेशा संग लेकर तुझको चलना,
आलसी बन तू ही बैठा, वक़्त तो चलता रहा. .

.

- प्रदीप बहुगुणा दर्पण

Added by Pradeep Bahuguna Darpan on February 28, 2012 at 10:30am — 3 Comments

दोहे

दोहे सुनकर जीत के, मन को लेंगे जीत.

प्रेम मिलेगा आपको, साथ निभाए प्रीत..

 

सोमवार में पूज्य हैं, हम सबके शिवनाथ.

मंगल जो सुमिरन करे, बजरंगी हों साथ.

 

बुद्ध दिनों में शुद्ध अति, मिले त्याग उपदेश.

गुरु को गुरु पूजन करें, दूर रहें सब क्लेश..

 

शुक्रवार को साधिए, मन में हो संतोष.

शनि पूजन शनिवार जो, मिटे तभी सब दोष.

 

मन प्रसन्न रविवार को, सुख मिलता भरपूर.

सूर्य देव की हो कृपा, कष्ट सभी हों…

Continue

Added by Jeet Gaurav Awasthi on February 27, 2012 at 5:00pm — 2 Comments

आह



आह देशभक्त की है आह  एक पितृ की है ,

आह माँ की लिखने को कलम  उठाई  है .
आह बेटियों की है पुकार के ये  पूंछ…
Continue

Added by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 27, 2012 at 12:47am — No Comments

गोपी गीत दोहानुवाद -- संजीव 'सलिल'

  गोपी गीत दोहानुवाद

संजीव 'सलिल'

*

श्रीमदभागवत दशम स्कंध के इक्तीसवें अध्याय में वर्णित पावन गोपी गीत का भावानुवाद प्रस्तुत है.

धन्य-धन्य है बृज धरा, हुए अवतरित श्याम.

बसीं इंदिरा, खोजते नयन, दरश दो श्याम.. 

जय प्रियतम घनश्याम की, काटें कटें न रात.

खोज-खोज हारे तुम्हें, कहाँ खो गये तात??

हम भक्तन तुम बिन नहीं, रातें सकें गुजार.

खोज रहीं सर्वत्र हम, दर्शन दो बलिहार.. 

कमल सरोवर…

Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on February 26, 2012 at 12:02pm — No Comments

जन्मदिन...

जन्मदिन पर .

तुमनें दी 

शुभकामनाएं

कुछ की

प्रभु से प्रार्थनाएं .

सोचता हूँ

तुम्हें आभार दूँ

या दिल की

गहराइयों से चलकर

रूह के धरातल पर

उबलते , उफनते

विचार दूँ ?

क्या बता दूँ ?

की मैं क्यों

हो जाता हूँ उदास

क्यों बस

एक ही एहसास

मुझे कर जाता है

अंतर से बदहवास

हर साल

जब देती हो तुम

कुछ सपनों में ढाल

प्रेम से बुना

दिल से…

Continue

Added by Dr Ajay Kumar Sharma on February 25, 2012 at 5:30pm — 2 Comments

कंगूरों तक चढूंगा

सुनो राजन !

तुम्हे राजा बनाया है हमीं ने !

और अब हम ही खड़े है

हाथ बांधे

सर झुकाए

सामने अट्टालिकाओं के तुम्हारे !

जिस अटारी पर खड़े हो

सभ्यता की ,

तुम कथित आदर्श बनकर ,

जिन कंगूरों पर

तुम्हारे नाम का झंडा गड़ा है ,

उस महल की नींव देखो !

क्षत-विक्षत लाशें पड़ी है

हम निरीहों के अधूरे ख्वाहिशों की ,

और दीवारें बनी है

ईंट से हैवानियत की !

 

है तेरे संबोधनों में दब…

Continue

Added by Arun Sri on February 25, 2012 at 10:55am — 6 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
(लघु कथा) अपना आशियाना

लघु कथा 

अरे भाई हँसमुख जी, आज क्यूँ उदास हो, क्या हुआ ? क्या बताऊँ मैं आज बहुत परेशां हूँ, आप ही बताओ आप को कैसा लगेगा यह जान कर कि आप जिस घर में पिछले दस साल से अकेले रहते हो, उसमे आप के अलावा कोई और भी अचानक आकर रहने लगे !! कल रात कुछ लोग अचानक मेरे घर में मेरे ही सामने मेरे घर में डेरा डाल कर बैठ गए और अपना आधिपत्य जताने लगे और मैं कुछ न कर सका | जी में तो आया कि एक एक को उठाकर फेंक दूं पर क्या करे हमारी भी कुछ अपनी…

Continue

Added by rajesh kumari on February 25, 2012 at 10:00am — 14 Comments

गजल : बात करने से ही बनती है बात दोस्तों.

बात करने से ही बनती है बात दोस्तों.

अब छोडो ये ख़ामोशी का साथ दोस्तों.
.

माना की बहूत दर्द है आज हमारे सीने में,

पर महज तड़प से नहीं बदलेगी,हालात दोस्तों,

कुछ ना पावोगे उम्मीदों की महफ़िल सजाने से,

जब तक हो ना उसपे अमल की बरसात दोस्तों.

कल का चेहरा दुनिया में देखा है किसने अबतक,

जो भी करना है कर दो…

Continue

Added by Noorain Ansari on February 24, 2012 at 6:30pm — 2 Comments

पापा

माँ को महसूस करती हूँ उनके अंदर ही,

जब दुनिया मे आऊँगी, मुझसे मिलने पापा आओगे न।

 

दिन भर आपका रास्ता देखती हूँ मै,

शाम को आकर मुझे अपनी बाहों का झूला, पापा झूलाओगे न।

 

आपके संरक्षण मे खुद को सुरक्षित महसूस करती हूँ मै,

यूं ही पूरा जीवन मुझे सुरक्षित महसूस, पापा कराओगे न।

 

छोड़ के अपना प्यारा आँगन,किसी और का घर सजाना हैं,

बेटी से बहू बनने तक का सफर पापा पूरा कराओगे न। 

Added by Vasudha Nigam on February 24, 2012 at 5:52pm — 1 Comment

उदबोध

प्रभुता  की बागडोर आप सबके ही हाँथ,
चेतना में आके मान  देश  का  बढाइये.…
Continue

Added by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 24, 2012 at 4:00pm — 10 Comments

मानसरोवर - 8

         

रे मानव क्या सोच रहा, इस मरघट में क्या खोज रहा ?
यथार्थ नहीं - यह धोखा है, सार नहीं यह थोथा है.
               यह जग माया का है बाज़ार.
               जहाँ रिश्ता का होता व्यापार.
कोई मातु - पिता, कोई भाई है, कोई बेटी और जमाई है.
कोई प्यारा सुत बन आया है, कोई बहन और कोई जाया है.
                    ये रिश्ते हैं छल के प्राकार.
                    ये हैं माया के ही प्रकार.
इस माया को ही…
Continue

Added by satish mapatpuri on February 24, 2012 at 2:05am — 7 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
मुझको दुनिया में आने दो I मुझको दुनिया में आने दो I

यह कविता उन व्यक्तियों ,महिलाओं के सन्दर्भ में है जो कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भागीदार हैं इसके खिलाफ लड़ाई में मेरा यह छोटा सा प्रयास है !मेरी यह कविता QAWWA(मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेन्स )

की बुक में पब्लिश होकर राष्ट्रपति महोदया के निर्देशानुसार स्वास्थ्य,परिवार कल्याण मंत्रालय की किताब हमारा घर में पब्लिश हुई|आज आप सब के सम्मुख रख रही हूँ कृपया प्रतिक्रिया…
Continue

Added by rajesh kumari on February 23, 2012 at 8:36pm — 11 Comments

Monthly Archives

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

आचार्य शीलक राम posted a blog post

व्यवस्था के नाम पर

कोई रोए, दुःख में हो बेहाल असहाय, असुरक्षित, अभावग्रस्त टोटा संगी-साथी, हो कती कंगाल अत्याचार,…See More
5 minutes ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप

2122 2122 2122 212मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप शाम-सी मुझ में उदासी, सुब्ह के मंज़र-से…See More
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा
"आ. अंजुमन जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

गीत -६ ( लक्ष्मण धामी "मुसाफिर")

रूठ रही नित गौरय्या  भी, देख प्रदूषण गाँव में।दम घुटता है कह उपवन की, छितरी-छितरी छाँव में।।*बीते…See More
15 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा

1222 1222 1222 1222अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा परिंदा टूटा है बाहर अभी अंदर नहीं टूटा…See More
Tuesday
AMAN SINHA posted a blog post

नर हूँ ना मैं नारी हूँ

नर हूँ ना मैं नारी हूँ, लिंग भेद पर भारी हूँपर समाज का हिस्सा हूँ मैं, और जीने का अधिकारी हूँ जो है…See More
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मिली मुझे शुभकामना, मिले प्यार के बोलभरा हुआ हूँ स्नेह से,दिन बीता अनमोलतिथि को अति विशिष्ट बनाने…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ. भाई सौरभ जी को जन्मदिन की ढेरों हार्दिक शुभकामनाएँ ।।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तिनका तिनका टूटा मन(गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२/२२/२२/२ सोचा था हो बच्चा मन लेकिन पाया  बूढ़ा मन।१। * नीड़  सरीखा  आँधी  में तिनका तिनका…See More
Saturday
आचार्य शीलक राम posted blog posts
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ आदरणीय सौरभ जी"
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दीर्घायुरारोग्यमस्तु,सुयशः भवतु,विजयः भवतु, जन्मदिनशुभेच्छाः"
Saturday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service