For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manoj kumar Ahsaas's Blog – October 2019 Archive (4)

अहसास की ग़ज़ल

1222   1222   1222   1222

मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है,

यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.

सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,

समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.

उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी,

मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.

फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का,

हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.

कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on October 17, 2019 at 8:51pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×16

इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.

लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.

एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है,

चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.

लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,

किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.

सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,

लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.

व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on October 15, 2019 at 2:01am — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल

1222     1222      122

जमाने भर की बातें सोचता हूँ

मगर मैं खुद में अब कितना बचा हूँ

सुहानी भोर किस्मत में नहीं है

भला मैं रात भर क्यों जागता हूँ

मुहब्बत एक हरजाई का घर है

मैं उस घर से निकाला जा चुका हूँ

तरफदारी से तेरी क्या है हासिल

मैं अपनों में अकेला पड़ गया हूँ

गुजारी जिंदगी सारी जहाँ पर

मैं अब उस शहर में बिल्कुल नया हूँ

तुझे आवाज देने का सबब है

मैं अब तन्हाई से डरने लगा…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on October 13, 2019 at 4:28pm — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×15

चंद मुकम्मल ग़ज़लों से हम दुनिया को बहला देंगे,

और अधूरे मिसरे तेरी यादों का पहरा देंगे.

जो कुछ तेरी इच्छा है वो ही तुझको दिखला देंगे,

हम खुद को धोखे में रखकर प्यार का मोल चुका देंगे.

ऐसे वो अपने चेहरे के सारे दाग छुपा देंगे,

कंप्यूटर से बनी हुई उम्दा तस्वीर दिखा देंगे.

जब तक तेरी आंखों से बरसेगी करुणा की धारा,

तब तक ये दुनिया वाले मेरे अहसास जला देंगे.

कीमत जिन फूलों की दाता के दर पर भी नहीं…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on October 1, 2019 at 12:24am — 4 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

22 22 22 2जग में नाम कमाना हैबाद उसके मर जाना है. (1)रखता हूँ मैं दर्द छुपा कर दिल में जो तहख़ाना…See More
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आ. आकांशी जी, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सबसे बड़े डॉक्टर (लघुकथा): डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आपकी सार्थक लघुकथा पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई | वर्तमान में इस प्रकार…"
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" and Pratibha Pandey are now friends
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||. कभी धूप कुहरा घना, कभी…See More
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , अत्यंत मार्मिक , सामयिक प्रस्तुति के लिए अनेकानेक बधाइयां , सादर।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , आपकी रचना पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. अमिता जी, गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार ।"
Thursday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service