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Manoj kumar Ahsaas's Blog (119)

ग़ज़ल मनोज अहसास

2122   2122     2122    212

तोड़ने से पहले मुझको आजमा कर देख ले

अपने घर के एक कोने में सजा कर देख ले

आज भी ज़िंदा है दुनिया में वफ़ा की रोशनी

अपने आंगन में कोई पौधा लगाकर देख ले

कोई अक्षर तुझको मिल जाएगा मेरे नाम का

अपने हाथों की लकीरों को मिला कर देख ले

हौसला करने से मिल ही जाता है सब कुछ यहाँ

वक़्त की भट्टी में बस खुद को तपा कर देख ले

सबसे बढ़कर खूबसूरत कैसे हैं तेरी हया

आइने को आंखों में काजल सजाकर देख…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on March 31, 2020 at 12:31am — 6 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

कैसा हाहाकार मचा है मालिक करुणा बरसाओ

सन्नाटा खुद चीख रहा है मालिक करुणा बरसाओ

भूख, गरीबी, लाचारी से पहले ही आतंकित थे

एक नया तूफान उठा है मालिक करुणा बरसाओ

वादा तुमने किया था सबसे भीड़ पड़ी तो आओगे

खतरे में फिर मानवता है मालिक करुणा बरसाओ

कौन सुनेगा टेर हमारी बिना तुम्हारे ओ पालक

बेबस मानव कांप गया है मालिक करुणा बरसाओ

तुमने साथ दिया न तो फिर किसके दर पर जाएंगे

सबके मन मे व्याकुलता है मालिक करुणा…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on March 30, 2020 at 10:19pm — 1 Comment

ग़ज़ल मनोज अहसास

1222×4

किसी की याद में ज़ख्मों को दिल मे पालते रहना,

तबाही का ही रस्ता है यूँ शोलों पर खड़े रहना।

न जाने कौन से पल में कलम गिर जाए हाथों से,

मगर तुम आखिरी पल तक ग़ज़ल के सामने रहना।

जहाँ पर शाम ढलती है वहाँ पर देखकर सोचा,

मेरी यादों में रहकर तुम यूँ ही मेरे बने रहना।

वो आएं या न आएं ये तो उनकी मर्जी है लेकिन,

मुहब्बत की है तो बस रास्ते को देखते रहना।

किसी सूरत भी मेरा दिल बहल सकता नहीं फिर…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on March 4, 2020 at 11:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल मनोज अहसास

122×8



मेरे साथ कोई ज़रा मुस्कुरा ले,

कलेजा बहुत भारी होने लगा है।

ये जीवन का रस्ता वहाँ आ गया है,

जहाँ हर किसी को मुझी से गिला है।



वो बचपन के साथी जो खाते थे कसमें,

रहेंगे सदा साथ जीवन डगर में।

कोई अपनी मंजिल पर तन्हा खड़ा है,

कोई जिंदगी के भंवर में फंसा है।



जो पाए हैं तुझको खुदी को मिटा कर,

वो पैगाम ए उल्फत ही देकर गए पर,

तेरा सबसे मिलना वो चेहरे बदल कर,

जमाने में झगड़े का जरिया बना है।



मुलाकात का कोई वादा… Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on March 1, 2020 at 10:45pm — 4 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

2122   2122   2122   22

जनाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल 'अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको' जिसे जगजीत सिंह साहब ने गाया है उसी ग़ज़ल को गुनगुनाते हुए ये ग़ज़ल हुई है बहर थोड़ी परिवर्तित हुई है

तमाम दोस्तों को सादर समर्पित

स्वीकारें

कुछ हसीं फूलों से जीवन को सजा ले अब तो,

खुद को गुमनामी के पतझड़ से बचा ले अब तो.

मेरे जख्मों पे बड़ी तेरी इनायत होगी,

संग हाथों में कोई तू भी उठा ले अब तो.

अपनी गुल्लक को दिखा माँ को…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on February 16, 2020 at 10:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

2×15

बीच सफर में धीरज टूटा,हाथों से पतवार गई.

मेरे मन की लाचारी से मेरी कोशिश हार गई.

एक अधूरा ख्वाब जो मुद्दत से आंखों में जिंदा है,

उसको लिखने की कोशिश में स्याही भी बेकार गई.

पिछले साल में और कोई था अब के साल में और कोई,

एक नए इजहार को चाहत फूलों के बाजार गई.

बरसों पहले जिसको चाहा उसकी यादें साथ रहें,

एक दुआ के आगे मेरी हर इक ख्वाहिश हार गई.

पापा की आंखों ने उसको जाने क्या क्या समझाया,

बेटी जब…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on February 12, 2020 at 1:10pm — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

221   2121   1221   212

आएगा जब तलक नहीं मौसम गुलाब का,

बदला रहेगा मूड मेरे आफताब का।

मज़बूरियों में जल गई इक उम्र की वफ़ा,

उसने दिखाया मुझको सलीका नकाब का।

मैं ऐसी शाइरी की तमन्ना में कैद हूँ ,

इक शेर में जो कह दे फसाना किताब का।

वो बेहिसाब बातों से भर देंगे सबका पेट,

जिनको समझ रहा है तू पक्का हिसाब का।

तासीर क्या है होठों से छूकर पता करो,

इक जाम ही बहुत है सुखन या शराब…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on February 9, 2020 at 11:30pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2122   2122     2122     212

जब सफलता मिल गई खुद का किया लिक्खा गया,

अपनी हारों को खुदा का फैसला लिक्खा गया।

आपके शफ्फाक दामन को बचाने के लिए,

कत्ल मुझ बदबख्त का इक हादसा लिक्खा गया।

दर ब दर होते रहे वो सारे खत खुशियों भरे ,

जिन पर तेरा नाम और मेरा पता लिक्खा गया।

चार भाई साथ रहकर कितने खुश थे हम कभी,

टूटकर बिखरे तो फिर दिल भी जुदा लिक्खा गया।

अब हमारी जिंदगी में एक उलझन ये भी है,

उसके दिल में…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on February 1, 2020 at 12:07am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

221  2121   1221  212

दिल से सवाल होठों से ताले नहीं गए.

दुनिया के ज़ुल्म खाक में डाले नहीं गए

.

जिस दिन से इंतज़ार तेरा दिल से मिट गया,

उस दिन से मेरे दिल में उजाले नहीं गए.

अपनी समझ से कैसे बने बच्चों का वजूद,

अपनी समझ से शेर तो ढाले नहीं गए.

कल रात उसने ख़्वाब में आकर कहा मुझे,

रिश्तें तो आपसे भी संभाले नहीं गए.

बरसों पुरानी बातों ने दिल को जकड़ लिया,

कुछ दोस्त जिंदगी से निकाले नहीं…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 31, 2020 at 12:07am — 1 Comment

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2122    2122    2122   212

महकते अल्फाज़ जैसे अब शरारे हो गए

वक़्त की गर्दिश में शामिल ख़त तुम्हारे हो गए

जिंदगी की उलझनों ने जेहन को घेरा है यूं

तेरी यादों के मरासिम खुद किनारे हो गए

शायरी, सिगरेट, तंबाकू ज़िन्दगी भर की तड़प

एक सहारा क्या गया कितने सारे हो गए

पहले एहसास ओ सुखन में इश्क थे कायम सभी

ओढ़कर जिस्मों को ही अब इश्क़ सारे हो गए

बागवां से जिंदगी का ये सबक सीखा हूं मैं

फूल खिल जाने पर…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 29, 2020 at 9:00am — 1 Comment

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2×15

अपने बीते कल के मुख पर काजल मलते देखा है,

एक ग़ज़ल कहने की खातिर खुद को जलते देखा है.

गफलत में जिन रास्तों पर चल लोगों ने मंज़िल पाई,

लाख संभलकर चल के उन पर खुद को फिसलते देखा है.

तेरे पास नहीं है मेरे एक सवाल का एक जवाब,

मैंने बात बात में तुझको बात बदलते देखा है.

कुछ भी देखके मेरे मन में आशा जीवित नहीं हुई,

सूरज को हर रोज तमस को चीर निकलते देखा है.

वक्त का चूहा कुतर गया है धीरे-धीरे याद…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 27, 2020 at 12:22am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

221  2121  1221  212

उस बेमिसाल दौर का दिल से मलाल कर

जब फैसले हो जाते थे सिक्का उछाल कर

तेरे ख्याल में हूं तू मेरा ख्याल कर

मैं तेरी जिंदगी हूं मेरी देखभाल कर

वो दे रहा है देर से पानी उबालकर

हँस हँस के पी रहे हैं सभी ढाल ढाल कर

उसमें कमी न ढूंढ न कोई सवाल कर

तू भी सलाम कर कोई जुमला उछाल कर

है तीरगी जो अपना मुकद्दर तो क्या हुआ

इल्मों अदब से सारे जहां में जलाल कर *

यह हादसा तो…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 22, 2020 at 12:04am — 5 Comments

ख्वाब के दो खत -एक नज़्म

मेरी आंखों में बीते कल के सरमाये की छाया है।

तुम्हें ख्वाबों में मैंने खत नया फिर लिखके भेजा है।।

(1)

लिखा है प्यार तुमको ढेर सारा सबसे पहले ही,

तुम्हारी खैरियत पूछी लिखी बातें मोहब्बत की।

फिर उसके बाद तुमको दिल का अपने हाल बतलाया,

लिखा है बिन तुम्हारे जिंदगी का दर्द गहराया।

बता सकता नहीं मैं जाने जां हालत तुम्हें अपनी,

ये जीवन यूं है जैसे पेड़ की लटकी हुई टहनी।

वो रिश्ते जिनकी खातिर तुमको खुद से दूर कर डाला,

उन्हीं सबने मेरे सीने का दर्पण…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 20, 2020 at 10:18am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2×15

तदबीर लगाकर कुछ सोचो तहरीरों से बहलाओ मत,

अपने वादे जब याद नहीं तो किस्से नए सुनाओ मत।

लालच पर आधारित निष्ठा दुख देगी निश्चित इक दिन,

झूठी कथा लक्कड़हारे की बच्चों को सिखलाओ मत।

जीना मुश्किल कर देंगे जब होगी इनकी सोच अलग,

सबसे गहरे मित्रों को भी दिल के राज बताओ मत।

सच्चा इतिहास न जाने क्या था न जाने हालात थे क्या,

सदियों पहली बातों पर अब घर में आग लगाओ मत।

तेरा वादा सबको रोटी देने का है ओ मालिक,

चार…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 20, 2020 at 10:12am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2×16

अशआर की आंखें खुलती है, जब सारा आलम सोता है।

मेरे कमरे में रात गए तंजीम का मौसम होता है।

तकदीर के हाथों सौंप दिया जब तूने मुझे महबूब मेरे,

मेरी हालत को सुनकर क्यों अब तन्हाई में रोता है।

खुशियों से गम का रिश्ता जग में ऐसा लगता है हमको,

कोई हाथों में रसगुल्लें देकर पीठ में कील चुभोता है।



मैंने तो सदा चाहा है यही इस गम को रिहा कर दूं खुद से,

हर और शिकारी बैठा है और ये पिंजरे का तोता है

उसकी मेहनत का फल…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 15, 2020 at 12:38am — 6 Comments

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2122   2122   2122   212

सब हवाले कर दिया तुझको मसीहा जान कर,

अब कहाँ जायें बता गैरों को अपना मान कर।

मत करो उससे शिकायत अपने घाटे लाभ की,

जिसको तुमने सर चढ़ाया दिल की बातें मान कर।

तेरा उससे प्यार है औरों से नफरत की उपज,

बरसों के रिश्ते भी चल उसके लिए कुर्बान कर।

वक्त का पहिया है ये तो चलना इसका काम है,

आने वाले कल की खातिर आज की पहचान कर।

खुद को उसको सौंपकर निश्चित हुए बैठे हैं हम,

उसको बस इतनी…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 12, 2020 at 11:00pm — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2×16

बेकार सताते हो खुद को बेकार तमाशा करते हो,

जो छुपकर तुमको देख रहा तुम उसको ढूंढा करते हो।

जब पास कोई तस्वीर नहीं, न उसका पता मालूम तुम्हें,

दर दर की ठोकर खाकर बस तकलीफ़ बढ़ाया करते हो।

मिल जाएगा वो है शक इसमें, खो जाओगे तुम ये मुमकिन है

सागर को पाने की जिद में क्यों झील का सौदा करते हो।

ऐसा तो कोई दस्तूर नहीं अजनबियों में कोई बात न हो,

तुमको ही पुकारा है मैंने,पीछे क्या देखा करते हो।

गर मांगने से…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 11, 2020 at 12:27am — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

221  2121  1221  212



मंजिल भी थी, चराग भी थे ,हौसला न था ।

अब सबसे कह रहा हूं ,उधर रास्ता न था ।

यह किसकी दस्तरस में धुँआ है मेरी सहर,

कल शब तो इस मकां में दिया भी जला न था।

लेकर चला रकीब मुझे तेरी राह पर,

इक शख्स बस वही था जो मुझसे खफा न था।

मुद्दत के बाद भी तेरी तस्वीर दिल में है,

तेरा फरेब तेरे करम से बड़ा न था ।

उसके जवाब में थे कई उंगलियों के रंग,

लगता है उसने खत मेरा पूरा पढ़ा न था…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 9, 2020 at 11:39pm — No Comments

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

12122×4

समझ नहीं आ रही है हमको ज़माने वाले तेरी पहेली,

शिकन से माथा भी भर दिया है लकीरों से जब भरी हथेली.

उदास बच्चे ने माँ के आंचल से अपनी आंखों को ढक लिया है,

गुज़र ही जाएगी रात काली जो चांद तारों की ओट लेली.



इक ऐसा गम है मैं जिससे यारों नजर चुरा के ही जी रहा हूँ,

ज़रा सा उसके करीब जाऊं बिखरने लगती है जां अकेली.

अजब है दुनिया का ये बगीचा ,अजब है इसका हठीला माली

तमाम…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 5, 2020 at 1:53am — No Comments

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

1222   1222   1222   1222

हमारे सारे मिसरे मुख्तलिफ अर्थों में लिपटे हैं,

तुझे अब याद भी करते हैं तो डर कर ही करते हैं.

बहुत मुमकिन है इसमें फिर तुम्हारा ज़िक्र आ जाए,

नज़र में आज लेकिन दर्द सब दुनिया जहां के हैं.

जरा सा ध्यान से आ जाते हैं छोटे से मिसरे में,

मुहब्बत के सभी अफसाने रेशम के दुपट्टे हैं.

कई खुदगर्ज मछुआरों ने कब्जा कर लिया उस पर,

वह दरिया जिसमें अपनी नेकियां हम डाल आते हैं.

जहाँ से…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on January 4, 2020 at 12:30am — 4 Comments

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