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नादिर ख़ान's Blog – February 2014 Archive (1)

दरमियाँ जब हमारे बढ़ी दूरियाँ

212   212   212   212

रोज़ ख़्वाबों में मेरे वो आने लगे

और नींदें हमारी उड़ाने लगे //1

 

खुद से शरमा के पलकें झुकाने लगे

हमसे नज़रें भी अब वो चुराने लगे //2

 

क्या बयाँ हम करें उनकी हर इक अदा

जान हम हर अदा पर लुटाने लगे//3

 

प्यार आता हमें उनकी हर बात पर

झूठे गुस्से से हमको डराने लगे //4  

 

छा गई है खुशी मिट गए सारे गम

याद बनकर वो अब गुदगुदाने लगे //5

 

दरमियाँ जब हमारे बढ़ी…

Continue

Added by नादिर ख़ान on February 19, 2014 at 11:30pm — 13 Comments

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