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नादिर ख़ान's Blog – May 2017 Archive (1)

कितना सुकून है तेरी यादों की छाँव में

2212 1212 2212 12

कितना सुकून है तेरी यादों की छाँव  में

लगता है जैसे बैठे हैं जन्नत की ठाँव में

 

फिरते हैं अब तलाश में जिसकी यहाँ वहाँ

मिलता था वो सुकूँ कभी पीपल की छाँव  में

 

आँखों को इंतिज़ार है आने का आपके

मुड़कर तो आइये ज़रा अपने ही गाँव में

 

कुछ इस्तेमाल कीजिये अपना दिमाग भी   

किसको मिला है फायदा नफरत के दाँव में

 

अब क्या सुबूत दें तुम्हें जद्दोजहद की हम

छाले पड़े हैं आज तक हम सब…

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Added by नादिर ख़ान on May 15, 2017 at 12:00am — 11 Comments

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