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नादिर ख़ान's Blog – December 2013 Archive (2)

माँ – बाप (क्षणिकाएँ )

(1)

हमारे सपने लेते रहे आकार

बड़े और बड़े

महानगर की इमारतों की तरह

भव्य और विशाल

हमारे सपने

बढ़ते रहे

आगे और…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 20, 2013 at 12:30pm — 22 Comments

अपनों को आपस में लड़ा देता है पैसा

  2212     2212     2212      2

दीवार नफरत की उठा देता है पैसा

कमज़ोर रिश्तों को बना देता है पैसा

 

उल्टा चलन कैसा सिखा देता है पैसा

ईमान आबिद का गिरा देता है पैसा

 

अंगूरी सा पहले नशा देता है पैसा

बीमार फिर खुद का, बना देता है पैसा

 

आता है मंजूरे नज़र, बनकर यही और

अपनों को आपस में लड़ा देता है पैसा

 

बैठे हैं महफिल में सभी बनकर जो अपने

दरबार झूठों का सजा देता…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 11, 2013 at 6:30pm — 15 Comments

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