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Maharshi tripathi's Blog (23)

मेरा वो घर मुझे मिला उजड़ा मुझे जो घर बसाना था

बह्र 1222/1222/1222/1222



अकेला ही रहा था मैं मेरा छप्पर उठाना था

हजारों लोग तब आये मेरा जब घर गिराना था



वो बोतल फेंक देते है गरम जब हो गया पानी

तड़पकर मर गया देखो जिसे पानी पिलाना था



तड़पकर और रो कर के बताओ क्या मिला तुमको

मोहब्बत थी तुम्हें हमसे नही तुमको छिपाना था



मुझे तो देखना ये था कि मेरे हीर कितने है

ये मैंने कब कहा था की मुझे रिश्ता निभाना था





तुम्हारी ही दुआओं का असर है माँ बुलंदी पर

जहाँ मैं आज पहुचा हूँ… Continue

Added by maharshi tripathi on October 31, 2017 at 4:00pm — 3 Comments

वो इक बार दिल में हमें दाखिला दें

बहर- 122*4



सभी आज शरमों हया हम मिटा दें

हमें है मुहब्बत उन्हे हम बता दें





सजोंये सदाचार है जो अभी तक

अनोखा मेरा गाँव तुमको दिखा दें





नज़र लग न जाये बड़ी खूबसूरत

ये तस्वीर उनकी कहीँ हम छुपा दें





न हो दुश्मनी साथ मिलकर रहे हम

कोई फूल यारो हम ऐसा खिला दें





डिग्री साथ होगी हमारी विदाई

वो इक बार दिल में हमें दाखिला दें



यही आरजू है हमारी खुदा से

हमें हर जनम में उन्ही का बना… Continue

Added by maharshi tripathi on June 15, 2016 at 1:06pm — 14 Comments

दुरुपयोग

"हेलो,बहना क्या हाल है,ससुराल में सब ठीक है ना "

"क्या ठीक है भैया "

"अरे क्या हो गया,किसी नें कुछ कहा क्या ?

"अभी 2 सप्ताह ही हुए हैं आये और सभी खाना बनाने को कह रहे हैं "

"अच्छा,किसकी इतनी हिम्मत है,जो तुमसे खाना बनवायेगा "

"अरे,ये जो बुड्डी है ना वही,आप तो जानते हो भैया मुझे खाना बनाना......"

"रो,मत पगली,तू चिंता ना कर,ज्यादा बोलेंगे तो....तू जानती है ना "

"क्या भैया मैं समझी नही "

"अरे तू टेंशन ना ले,तेरा ये वकील भाई कब काम आयेगा .ज्यादा जुबान चलेगी… Continue

Added by maharshi tripathi on June 8, 2016 at 2:06pm — 9 Comments

अपने मित्रों को समर्पित एक गज़ल

बहर - 222 221 221 22

माला के मोती बिखर जा रहे हैं
सब एक एक कर अपने घर जा रहे हैं

कर आँखें नम छोड़कर यूँ अकेला
देकर इतनें गम किधर जा रहे हैं

ढूंढेगें फ़िर भी नही अब मिलेंगे
हमसा कोई भी जिधर जा रहे हैं

देखो पूरी हो गयी है पढ़ाई
ले बिस्तर वापस शहर जा रहे हैं

भगवन मेरे यार रखना सलामत
साथी मेरे जिस डगर जा रहे हैं

.
मौलिक व अप्रकाशित
(बी.टेक पूरा होने पर अपने मित्रों के जाने पर लिखी गज़ल )

Added by maharshi tripathi on June 3, 2016 at 11:30pm — 4 Comments

सदा ही ख्वाब में आऊ सदा जगाऊ मैं तुमको

बहर -1222 1222 1212 2222

सदा ही ख्वाब में आऊ सदा जगाऊ मैं तुमको

खुले जब आँख लूँ जब नाम पास पाऊ मैं तुमको

तेरी जब गोद में रखकर के सर गजल मैं पढता था

मेरा अरमान है इक बार फिर सुनाऊ मैं तुमको

गये जब से अकेला छोड़ हम तभी से रोते हैं

नहीं हसरत मेरी रोऊँ नहीं रुलाऊ मैं तुमको

भटकता दर-ब-दर हूँ फिर रहा कहाँ हो बोलो ना

सहा क्या क्या गवायाँ क्या मिलो गिनाऊ मैं तुमको

सहा जाता न अब हमसे विरह भरा मेरा जीवन

मेरी बाहें खुली आओ गले लगाऊ मैं…

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Added by maharshi tripathi on June 1, 2016 at 11:10pm — No Comments

छोटे भगवान्

अदभुत अकथनीय वातावरण

आज भगवान स्वयं घर पधारे हैं ,

चारों –ओर खुशियाँ ही खुशियाँ लाये है

भगवान् या देवी जो भी हों

घर को खुशियों से भर दिया है 

आज अम्बर भी ,देव वियोग में आसूं बहा रहा है

हवायें भी व्याकुल हो

प्रभु को ढूढने चली आ रही हैं

इससे अनभिज्ञ ,अंजान हैं

हमारे छोटे भगवान् जी

घरवालों के प्रान जी

पर क्या इनकी पूजा होगी ?

क्या इनकी किलकारियां ,नटखट अदाएं यूँ ही रहेंगी ?

ऐसा प्रश्न क्यूँ आया

आना…

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Added by maharshi tripathi on April 12, 2016 at 10:39am — 2 Comments

भारतीय वीरों को समर्पित गजल (महर्षि त्रिपाठी )

२२१२  २२१ २२२ 

जय हिन्द की आवाज़ सीमा पर 

होगा समर आगाज़ सीमा पर 

सुधरेंगे कब हालात सीमा पर 

कबतक मरें जाबाँज सीमा पर 

जारी रही यूँ सेंध दुश्मन की 

बदलेंगे हम अल्फाज सीमा पर 

कुर्बा किया है जान वीरों नें 

रखकर वतन की लाज सीमा पर 

काटेंगे सर-ओ-हाथ दुश्मनों की 

पहना शरम का ताज सीमा पर 

 

जबतक रहें यूँ वीर भारत में 

तबतक करें हम नाज सीमा…

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Added by maharshi tripathi on January 10, 2016 at 6:20pm — 6 Comments

प्राकृतिक सौन्दर्य पर हमने दाग लगाया है (कविता )

चहुँ ओर फैली हरियाली 

देती जो हमको खुशहाली 

पर यह कब तक बनी रहेगी 

जब न मोटर - कार रहेगी 

इसे चलाकर हमने दूषित वायु किया 

जानबूझकर हमने छोटा आयु किया 

कर वायु प्रदूषित हमने महाप्रलय बुलाया है 

प्राकृतिक सौन्दर्य पर हमने दाग लगाया है |

भारतवासी पवन गंगा जिससे बुलाते हैं 

पापतारने हेतु इसी गंगा में डुबकी लगाते हैं

भूल गए पावन गंगा ,हम भूल गये कहानी को

अपवित्र करडाला गंगा लाकर गंदे पानी को

खुद की…

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Added by maharshi tripathi on October 2, 2015 at 2:52pm — No Comments

सुनो-सुनाओ, दर्द घटाओ अपनी अपनी प्रेम कहानी

है सजी महफ़िल यारों 

फिर से जख्मों को उठाओ 

याद फिर कर लो उसे 

जिससे मोहब्बत की थी यारों

फिर वही कुछ हँसते गाते 

रुठते और फिर मनाते 

अश्क़ जब आँखों में आये 

गीत  बन जब दर्द जाये

जख्म तुम सबको दिखाओ

फिर वही अपनी पुरानी

सुनो-सुनाओ, दर्द घटाओ

अपनी अपनी प्रेम कहानी |

उसको भी बतलाओ यारों

वो कहाँ और हम कहाँ हैं 

हमने तो जख्मों को अपने 

जीने का जरिया बनाया

गिर के खुद संभले जहाँ…

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Added by maharshi tripathi on July 22, 2015 at 7:00pm — 11 Comments

गलत संगति

"अरे मिश्रा जी ,इतना सामान कहाँ ले जा रहे हैं "-पड़ोस के एक सज्जन ने पूछा |

"कुछ नही ,भाई रमेश ,मेरे बेटे का बी.टेक में सिलेक्शन हो गया है न ,उसे हास्टल  छोड़ने जा रहा  हूँ"-मिश्रा जी ने बड़े गर्व से कहा |

"देखो ,बेटे ,वहां सभी गन्दी चीज़ों से दूर रहना ,अब तक तो हम तेरे साथ थे ,अब तुझे खुद ही सब कुछ करना होगा "-बेटे को समझाते हुए मिश्रा जी ने कहा |

बेटा  जो अभी  कच्ची मिटटी था  ,अपने माँ बाप से कभी दूर नही हुआ आँखों में आंसू भरकर बोला "जी,पिता जी"

इतना कह कर बेटा…

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Added by maharshi tripathi on June 6, 2015 at 8:00pm — 16 Comments

सजा पायी है

क्या कहूँ सच का हाल इस दौर में मित्रों 

मैंने अपनों से सच कहने की सजा पायी है 

अब तो हद है जुल्मों सितम गरीबों पर 

आम को इमली न कहने की सजा पायी है 

अब तो जुर्म करने वाले भी बेबाक घूमते हैं

कईयों ने तो जुर्म सहने की सजा पायी है

 बक्शा नही प्रभु ने मेरे आलिन्द गिरा दिए 

मैंने माँ को बेघर करने की सजा पायी है 

टूटा है दिल मेरा आँखों में सिर्फ पानी है 

हाँ मैंने इश्क़ करने की सजा पायी है 

कैद हैं पिजड़े में, माँ संग नीड में रहने…

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Added by maharshi tripathi on June 3, 2015 at 6:01pm — 11 Comments

भारत -मेरी कल्पना

सुबह हो हमारी अपनों के बीच रहकर हो 
हमारे ख्वाब और कोलाहल वाले नभचर हों 
चहचहाती चिड़ियों के आनंदित लम्हें हों 
सुगन्धित वायु से परिपूर्ण सब पुष्प सुनहरे हों 
हमारी जिद है ,भारत की सुबह बनाने की 
जिद है हमारे दिल में ,एक भारत बनाने की |
लहलहाते हुए सब खेत और खलिहान गाते हों 
न फ़िल्मी दुनिया के सब अपमान गाते हों 
एकसाथ मिलकर हमसब राष्ट्रगान गाते हों 
सुबह उठकर सभी अपने प्रभु गुणगान गाते…
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Added by maharshi tripathi on April 6, 2015 at 11:00pm — 9 Comments

मेरी ज़िन्दगी तुम हो ,मेरी बंदगी तुम हो

मेरी ज़िन्दगी तुम हो ,मेरी बंदगी तुम हो 

मेरे आँखों की पानी तुम हो 

मेरे ख्वाबों की रानी तुम हो 

मेरे दर्द की कहानी तुम हो 

हाँ तुम हो ,

मेरी ज़िन्दगी तुम हो ,मेरी बंदगी तुम हो |

तुझसा कोई न आये

गर आये तो फिर न जाये 

तेरे बिन जिया न जाये 

ये दिल पाये जिसे पाये ,तुम हो 

हाँ तुम हो 

मेरी ज़िन्दगी तुम हो ,मेरी बंदगी तुम हो |

हर जगह से था मैं हारा 

था मैं वक़्त का मारा

मुझे मिला…

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Added by maharshi tripathi on March 13, 2015 at 10:42pm — 11 Comments

रख के गिरवी अपनी जाँ तुम्हें फिर माँग लूँगा मैं

बनके अश्रु जब टपकेगी दिल की बेचैनी

मोहब्बत है तुझे हमसे फिर मान लूँगा मैं |



बयां कर न कर पढ़ के चेहरे की हालत

जरुरत है तुझे मेरी फिर जान लूँगा मैं |



जाके मिल गयी तुम गर सितारों में

देख चमकने की अदा फिर पहचान लूँगा मैं |



पकड़ हाथों में हाथ बनाके दिल की रानी

जहाँ कोई न हो दुश्मन फिर जहान लूँगा मैं |



सुनहरे केश और आँखों पे पलकों का ज़ेबा

बनाके तुझे भेजा उसका फिर एहसान लूँगा मैं |



बुलावा आ गया तेरा गर मुझ से पहले…

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Added by maharshi tripathi on February 26, 2015 at 10:00pm — 14 Comments

पीछे मेरी दुआ है |

वो आज है नही मेरी दुनिया में 

फिर भी बसती है मेरे जिया में 

लगता है आज भी याद करती है 

मुझे पाने की फ़रियाद करती है

शायद  खुश है ,जिन्दा है

क्यूंकि उसे कुछ हुआ है

वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

मन करता है फिर से पाऊं उसे

दर्द भरी दुनिया से चुराऊं उसे

वो चली गयी पर कुछ कशिश तो है

चिराग न सही ,पर माचिस तो है

एहसास हो रहा है , उसने ख़त छुआ है

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है…

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Added by maharshi tripathi on February 19, 2015 at 10:30pm — 16 Comments

रेलवे पुलिस (लघुकथा )

"साहब इस डिब्बे में एक आदमी अचेत पड़ा है,शायद जहरखुरानी  का शिकार है " रेलवे पुलिस का कर्मचारी बोला |

"देख अपने लिए भी कुछ छोड़ा है या सब ले गए ?- अफसर 

"सब ले गए साहब "- कर्मचारी 

"कहता हूँ ,सालों से किसी की चीज मत खाया करो ,छोड़ ये सब चल एक कप  चाय पिला "- अफसर कहते हुए बाहर निकल आते हैं |

"मौलिक व् अप्रकाशित "

Added by maharshi tripathi on January 19, 2015 at 3:00pm — 16 Comments

मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया

हम तुम्हारे थे पर तुम क्यूँ समझी नही

बेवजह सबकी बातों में उलझी रही

संदेहात्मक परिस्थिति भी सुलझी नही

तुम से जुड़ना ही मेरा गुनाह हो गया

मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया |

तुम से मिलकर फ़कीर दिल भी राजा हुआ

मन का मुरझाया फूल भी ताजा हुआ

मेरे हर दुःख-दर्द का भी जनाजा हुआ

तुम्हारा पास आना भी गुनाह हो गया

मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया |

तुमने दिए जो जख्म अब वो भरते नही

मेरी सांसे भी रुकने से अब तो डरते नही

मर चुके जो…

Continue

Added by maharshi tripathi on January 5, 2015 at 6:53pm — 8 Comments

नया साल आया

बीते वर्षों में जो भी मिला है मुझे

नहीं उससे कोई गिला है मुझे

नयन नीर मिले कुछ पीर मिले

दिल के राजा हैं ऐसे फ़कीर मिले

इन्हें राजा बना दें नया साल आया

खुशियाँ बिछा दें नया साल आया|

टुकड़े-टुकड़े किये जिनके सपनों को मैंने

खंडित किया जिनके अपनों को मैंने

व्यतित वर्ष में जिनका भी दिल दुखाया

हँसता हुआ मैंने जो महफ़िल जलाया

हँसी…

Continue

Added by maharshi tripathi on January 3, 2015 at 6:51pm — 7 Comments

बस तू साथ है |

हर जगह हर घडी बस तू साथ है

जहाँ मेरी नज़रे पडी बस तू साथ है

छोड़ा वक़्त ने जहाँ मुझ बदनसीब को

वहां पे मिली खड़ी बस तू साथ है



मेरे नये संसार में बस तू साथ है

प्यार के व्यवहार में बस तू साथ है

बदल गये जिसमें मेरे सब चाहने वाले

उस वक़्त के रफ़्तार में बस तू साथ है



मोहब्बत के इस कर्ज़ में बस तू साथ है

इंसानियत के फ़र्ज़ में बस तू साथ है

यूँ तो खुशियों के हमदर्द सब हैं मगर

मुझे मिले हर दर्द में बस तू साथ है



सावन का असर है जब तू…

Continue

Added by maharshi tripathi on December 25, 2014 at 8:38pm — 7 Comments

बस तू साथ है |

हर जगह हर घडी बस तू साथ है 

जहाँ मेरी नज़रे पडी बस तू साथ है

 छोड़ा वक़्त ने जहाँ मुझ बदनसीब को

वहां पे मिली खड़ी बस तू साथ है

मेरे  नये संसार में बस तू साथ है

प्यार के व्यवहार में बस तू साथ है

बदल गये जिसमें मेरे सब चाहने वाले 

उस वक़्त के रफ़्तार में बस तू साथ है

मोहब्बत के इस कर्ज़ में बस तू साथ है

इंसानियत के फ़र्ज़ में बस तू साथ है

यूँ  तो खुशियों के हमदर्द  सब हैं मगर 

 मुझे मिले हर दर्द में बस तू साथ…

Continue

Added by maharshi tripathi on December 25, 2014 at 12:00pm — 3 Comments

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