For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

DR ARUN KUMAR SHASTRI's Blog (8)

प्रतिकर्ष

तेरे आकर्षण का पल पल प्रतिकर्ष सताता है

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

नदिया के पास जाऊं तो शीतल हो जाऊं

साथ दो अगर तो मैं मुस्कान बन जाऊं //

आकर्षक सा छद्म आव्हान मुझे बुलाता है //

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

तुमसे कहने का मैं कोई मौका न छोड़ता

बस एक इशारा मिलता तो ही तो बोलता //

ऊहा पोह के सागर में अब गोता खाता हूँ

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

दर्द की बात न करूंगा दर्द अब बेमानी हुआ

चाय…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on February 2, 2021 at 4:45pm — 2 Comments

एक नज़्म - बे - क़ायदा

वक़्त मिलता है कहाँ

आज के मौसुल में

रक़ीबा दर - ब - दर

डोलने का हुनर मंद है

ये ख़ाक सार

इक अदद पेट ही है

जिसने न जाने कितनी

जिंदगियां लीली है

तुखंम उस पर कभी भरता नहीं

हर वक्त सुरसा सा

मुँह खोल के रखता है

न जाने किस कदर

इसमें ख़ज़ीली हैं।

ईंते ख़ाबां मुलम्मा कौन सा

इस पर चढ़ा होगा

दिखाई भी तो नहीं देता

मगर इक बात मुझको

इसके जानिब ये ज़रुर कहनी है।

अगरचे ये नहीं होता

बा कसम ये दुनिया नहीं होती

ये जो…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on February 2, 2021 at 4:30pm — No Comments

नज़्म

बेबाक दिलबरी का आलम न पूँछिये। 

हम से मोहब्बत का बस हुनर सीखिये ।

दिल में लगी हो आग तो सेक लीजिये। 

वरना लगा के दाग यूँ सितम न कीजिये। 

तारीफ़ कीजिये या के…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on January 25, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

आणविक अनुप्रस्थान

आणविक अनुप्रस्थान लघु कथा



वेदना से संवेदना हो तो मानवीय प्रकल्प उपजता है ऐसा मेरा सोचना था , तुम क्या सोचती हो इसी विषय में मैं अनभिज्ञ था , फिर एक दिन तुम बिना बताये कहीं चली गई। आभास था जाओगी और वो आभास प्रकटतः घटित भी हुआ। मुझे लेकिन इस अजन्मे विरह का अभ्यास किंचित न था सो मैं खिन्नता से खिसियानी बिल्ली अर्थात बिल्ले सा भ्रमित मन से एकांत में उतर गया। अब तक अपने…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on January 12, 2021 at 3:29am — No Comments

अबोधिता

छंद मुक्त रचना  

तिथि १२ जनवरी 21 समय 2.3 6 सुबह 

डॉ अरुण कुमार शास्त्री / एक अबोध बालक //  अरुण अतृप्त

 

मिला है वक्त जो भी इस ज़हान में …

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on January 12, 2021 at 2:41am — No Comments

सिकुडते हुये सद्भाव

छंदमुक्त काव्य 

 

जिंदगी से जिंदगी लड़ने लगी है

आदमी को आदमी की शक्ल

अब क्यूँ इस तरह अखरने लगी है //

आँख में आँख का तिनका…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on November 19, 2020 at 1:00pm — 1 Comment

मौसम त्योहार का ओर तुम

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

मुझ से तो तुम बस सहयोग ही करो 

मानव जनम मिला है तत्सम आचरण करो  

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

प्रेरणा न बन सको तो कोई फरक नही

लेकिन किसी सन्मार्ग में कंटक तो न बनो

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

मै आज हूँ बस आज और अभी

गुजरे हुये पलो  से मेरी तुलना तो न करो 

भविष्य से मेरा कोई सम्बन्ध है कहा 

वर्तमान को ही मैंने जीवन कहा 

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

मुझ से तो तुम बस सहयोग…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on November 14, 2020 at 6:00pm — 6 Comments

दिल्लगी

जिस इश्क में दिल्लगी नही होती 

उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होती

सिलसिला साँसों का जिस रोज़ थम गया 

रौशनी गई दिये से और प्यार मर गया

धड़कन में अगर खून की लाली नही होती 

उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होती

दिखावा प्यार का तुम खूब कर चुके 

दे दे के तोहफे प्यार में मिरा घर भर चुके

सेंकडो तो आने जाने के बहाने कर चुके 

जोश था जो मिलन का वो आज मर चुका

जिस इश्क में दिल्लगी नही…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on September 19, 2020 at 3:00am — 2 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आ. आकांशी जी, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, हार्दिक धन्यवाद।"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
20 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सबसे बड़े डॉक्टर (लघुकथा): डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आपकी सार्थक लघुकथा पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई | वर्तमान में इस प्रकार…"
22 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" and Pratibha Pandey are now friends
22 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||. कभी धूप कुहरा घना, कभी…See More
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , अत्यंत मार्मिक , सामयिक प्रस्तुति के लिए अनेकानेक बधाइयां , सादर।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , आपकी रचना पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. अमिता जी, गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार ।"
Thursday
amita tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"पीता  हर  उम्मीद  हमारीकैसी तेरी प्यास ओ राजा बहुत उत्तम ,बहुत सटीक  गागर मे…"
Wednesday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' updated their profile
Wednesday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service