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नाम आपका रोशन कर दूं

शिक्षा देने वाले हे गुरुजनों,
कैसे आपका बखान करूं।
सूरज को दिया दिखाने जैसा,
कैसे ये तुच्छ काम करूं।।

ज्ञान शस्त्र जो मिला आपसे,
फिर दुनियां से क्यूं डरूं।
अज्ञानता के अन्धकार को,
जन जन के जीवन से दूर करूं।।

शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को,
हाथ जोड़ वंदन करूं।
बिना रुके बिना झुके,
आपके प्रशस्त मार्ग पर बढ़ती रहूं।।

किताबी ज्ञान को व्यवहारिक कर
जीवन में कूट कूट कर भर लूं।
समानता का अधिकार दिलाने,
दुनियां से भी मैं लड़ लूं।।

बुराई पर अच्छाई की विजय ,
उम्मीद का दिया ना बुझने दूं।
बनकर सबकी रोल मॉडल,
नाम आपका रोशन कर दूं।।

नीता तायल
कासगंज ,उत्तर प्रदेश
"मौलिक और अप्रकाशित"

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Comment by Neeta Tayal on September 12, 2020 at 8:48pm

आदरणीय सर जी ,आपके प्रोत्साहित शब्दों ने मुझ में एक नई ऊर्जा भर दी है

Comment by Harash Mahajan on September 12, 2020 at 8:33pm

आदरणीय नीता तयाल जी खूबसूरत आगाज़ किया है आपने । बहुत अच्छी रचना । दाद कबूल कीजियेगा ।

Comment by Neeta Tayal on September 12, 2020 at 7:49pm
आदरणीय सर,आपके कथित नियमों का पालन करने की पूरी कोशिश करूंगी,आगे भी आप इसी तरह मुझे मार्ग प्रशस्त करते रहिएगा
Comment by Samar kabeer on September 12, 2020 at 7:43pm

//जी शुक्रिया//

एक बात आपको बताना चाहता हूँ, और वो ये कि ओबीओ दूसरे मंचों से अलग है,इसे सीखने सिखाने के उद्देश्य से बनाया गया है, कुछ नियम तो इसमें लिख दिए गए हैं और कुछ आपसी सहयोग से इसकी परिपाटी बन गए हैं ।

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दूसरी तरफ़ जब हम अपनी रचना पर आई टिप्पणियों के जवाब दें तो पहले जिस जिस ने आपकी रचना पर टिप्पणी दी है उन्हें अलग अलग पहले आदर सूचक शब्दों से उनका नाम लेकर उन्हें सम्बोधित करें,फिर उनकी टिप्पणी का उचित जवाब दें ।

उम्मीद है मंच की इस परिपाटी को निभाने में आप सहयोग करेंगी ।

Comment by Neeta Tayal on September 10, 2020 at 10:37pm

जी शुक्रिया

Comment by आशीष यादव on September 10, 2020 at 10:27pm

बहुत अच्छे विचार आए हैं। एक बेहतर प्रयास है। और अभ्यास से शिल्प भी बेहतर होता जाएगा। इस रचना पर बधाई स्वीकारें। 

Comment by Samar kabeer on September 7, 2020 at 7:44pm

मुहतरमा नीता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

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