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ग़ज़ल

1212 1122 1212 22/112

सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआ
हज़ार बार यही मुझसे इक सवाल हुआ

 

तमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारो
हमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआ

 

लिखा न जाएगा ख़त में ख़ुद आके देख लो तुम
तुम्हारे इश्क़ में जो भी हमारा हाल हुआ

 
हुनर नहीं ये हमारा अता ख़ुदा की है
कि शे'र जो भी कहा हमने बेमिसाल हुआ

 

ज़बाँ से कह न सके वो मगर सुना ये है
हमारे जाने का उनको बहुत मलाल हुआ

 

ख़ज़ाने हुस्न के रब ने अता किये जो उसे
तो मैं भी इश्क़ की दौलत से माला माल हुआ

 

'समर' वो फूल बड़ा ही नसीब वाला था
जो उनके पा-ए-मुबारक से पाएमाल हुआ 

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on July 27, 2021 at 6:21pm

जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना और टंकण त्रुटि की तरफ़ ध्यान दिलाने के लिये आपका आभारी हूँ ।

Comment by Md. Anis arman on July 26, 2021 at 1:41pm

जनाब समर कबीर साहब, बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई, उम्दा ग़ज़ल हुई है हर शेर लाजवाब है 

Comment by Rachna Bhatia on July 26, 2021 at 12:18pm

आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर् शानदार ग़ज़ल हुई। सर् हर शे'र पर दाद क़ुबूल करें।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 26, 2021 at 9:43am

हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी। बेहतरीन ग़ज़ल।

तमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारो
हमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 26, 2021 at 8:22am

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, हरिक शे'र दाद का मुस्तहिक़ है, मक़्ता लाजवाब है। शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।

Comment by Chetan Prakash on July 25, 2021 at 11:54pm

आदाब, आदरणीय समर कबीर साहब, नाचीज की बात का आपने संज्ञान लिया और, बह्र सही कर मुझे उपकृत  किया, आपका  बहुत-बहुत आभारी  हूँ ! सादर  ,,!

Comment by Chetan Prakash on July 25, 2021 at 8:52am

गुरु पूर्णिमा  के मुबारक मौक़े  पर  'गुरु-प्रसाद चाकर मन निहाल  हो गया, गुरुवर  ! एक से  एक बेहतर  शेयर हुआ  है । किन्तु, मुआफ करें , गुरुवर , बह्र भूलवश  ग़लत  लिखी गई  !

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