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आज फिर ... क्या हुआ

थरथरा रहा

दुखात्मक भावों का

तकलीफ़ भरा, गंभीर

भयानक चेहरा

आज फिर

दुख के आरोह-अवरोह की

अंधेरी खोह से

गहरी शिकायतें लिए

गहराया आसमान

आज फिर 

ढलते सूरज ने संवलाई लाली में रंगी

कुछ खोती कुछ ढूँढ्ती

एक और मटमैली

उलझी-सी शाम

आज फिर

सिमटी हुई कुछ डरी-डरी

उदास लटकती शाम

डूबने को है ...

डूबने दो 

मन में हलचल गहरी

मरूस्थल-सा सूखापन

एक और "आज" को जाते-जाते

इस आज की व्यथा-कथा

कहने दो

भटक गई हवायों को  पलटने दो

आज फिर प्यार के दर्द के पन्ने

प्यार जो पागल-सा

तैर-तैर दीप्त आँखों में तुम्हारी

गया था नभ को छूने

आज फिर ...

ठहरता नहीं है "आज" मुठ्ठी में

रुकी है अभी गई-गुज़री कुछ रोशनी

अन्धेरा होने को है

सहने दो

           --------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by vijay nikore on July 19, 2019 at 3:49pm

सरहाना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय भाई समर कबीर जी।

Comment by Samar kabeer on July 19, 2019 at 11:20am

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह एक उम्द: और दिल को छू लेने वाली रचना हुई है आपकी,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारकरें ।

Comment by vijay nikore on July 17, 2019 at 9:25pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीया प्रतिभा जी

Comment by pratibha pande on July 17, 2019 at 11:21am

आज फिर ...

ठहरता नहीं है "आज" मुठ्ठी में

रुकी है अभी गई-गुज़री कुछ रोशनी

अन्धेरा होने को है

सहने दो//अप्रतिम भाव बहुत गहरे तक छूते हैं। बधाई इस सृजन पर आदरणीय विजय निकोर जी

Comment by vijay nikore on July 16, 2019 at 10:18pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on July 15, 2019 at 7:33pm

भटक गई हवायों को पलटने दो

आज फिर प्यार के दर्द के पन्ने

प्यार जो पागल-सा

तैर-तैर दीप्त आँखों में तुम्हारी

गया था नभ को छूने

आदरणीय विजय निकोर जी सादर प्रणाम , सर आपका सृजन पाषाणों की दरारों में छुपी अंतर्व्यथा की अभियक्ति को पृष्ठ पर साकार कर देता है। उलझनों से जूझती इस अनुपम कृति के लिए दिल से बधाई बधाई बधाई। सादर ...

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:48pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय अजय तिवारी जी।

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:47pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय लक्ष्मण जी।

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:47pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी। मेरा मनोबल बढ़ाए रखें।

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:46pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार,आदरणीय तेज वीर सिंह जी।

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