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जरुरी नहीं वो भला हो
मगर जो जैसा है वैसा हो

यही गुण हो बस आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता है तो अच्छा
नहीं जानता क्यों बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही शुभ दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

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Comment by dandpani nahak on October 18, 2019 at 10:56am
आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब बहुत शुक्रिया आप सही है ठीक करने की कोशिश करता हूँ!
Comment by dandpani nahak on October 18, 2019 at 10:55am
परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम आपका आदेश सर माथे पर!
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 16, 2019 at 7:41pm

आ. भाई दण्डपाणि जी, हार्दिक धन्यवाद।

Comment by SALIM RAZA REWA on October 15, 2019 at 8:20am

भाई बधाई स्वविकरण मतला मज़ा नहीं दे ,

Comment by Samar kabeer on October 11, 2019 at 7:08pm

जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब,ग़ज़ल के साथ अरकान भी लिखा करें,इससे पाठकों को अपनी बात कहने में आसानी होती है ।

ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी समय चाहती है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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