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संदेश समय यह देता है!

प्रभु ने तुम्हें बनाया था जब
साथ तुम्हारे और बहुत कुछ
भी सिरजा था,
तुम अपने मद में भूल गए
किरदार में अपने फूल गए
 
दोहन तो सबका खूब किया
पोषण पर किंतु न ध्यान दिया
सब जीव-जंतु और वृक्ष, नदी
ये सब तुमको कुछ देते हैं
बदले में कुछ ना लेते हैं
 
अस्तित्व से तेरे जुड़े हैं ये
सबके पीछे कुछ कारण हैं
उस कारण को भी भूल गए
तुम सीमित ज्ञान में फूल गए
 
संतुलन प्रकृति का छेड़ोगे
या अपनी आंखें मूंदोगे
यदि अब भी तुम ना चेतोगे
तो काल यही दिन लाएगा
ये वक़्त मिला है इसीलिये
तुम सीखो, गुनो और समझो
फिर औरों को भी समझाओ
जिनको तुम जाहिल कहते हो
 
है प्रकृति तुम्हें ये सिखा रही
एक सूक्ष्म तार से जुड़े हैं सब
न भेद करो न बाँटो अब
अपनी भाषा में बता रही
 
तुम ज्ञानवान, वो ज्ञानहीन
तुम पर ही जिम्मेदारी है
देना होगा तुमको ही उन्हें
तुम समय की अब ये पुकार सुनो
 
निष्क्रियता में यूँ न बैठो
ख़ुद करो सृजन और करवाओ
तुम मेरा यूँ उपयोग करो
सन्देश समय ये देता है...
सन्देश समय ये देता है....
सन्देश समय ये देता है!!
 
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Samar kabeer on March 31, 2020 at 12:33pm

मुहतरमा डॉ. वंदना मिश्रा जी आदाब,ओबीओ पटल पर आपका हार्दिक स्वागत है ।

अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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