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दूजा नहीं विकल्प

है मुश्किल आई बड़ी , सारी दुनिया त्रस्त

मिल कर साथ खड़े रहें , कहता है यह वक्त

परमपिता का न्याय तो  सबके लिए समान

अरबों के मालिक भले हों कोई श्रीमान

ईश्वर पर विश्वास का व्यर्थ मुलम्मा ओढ़

कर ना भ्रष्टाचार तू , जीवन यह अनमोल

प्रकृति हमें समझा रही , पर हित लें संकल्प

अन्य बचें तब हम बचें , दूजा नहीं विकल्प

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on March 31, 2020 at 2:40pm

आदाब , हार्दिक आभार आपका

Comment by Samar kabeer on March 31, 2020 at 12:36pm

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Usha Awasthi on March 30, 2020 at 9:51pm

धन्यवाद वन्दना मिश्रा जी

Comment by Dr Vandana Misra on March 30, 2020 at 8:23pm

सुंदर सन्देश

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