For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मोहब्बत क्या है .......

मोहब्बत क्या है .......


तुम समझे ही नहीं
मोहब्बत क्या है
मेरी तरह
कुछ लम्हे
तन्हा जी कर देखो
दीवारों पर अहसासों के अक्स
रक्स करते नज़र आएंगे
दर्द के सैलाब
आखों में उतर आएंगे
लबों के साहिल पर
अलफ़ाज़ कसमसायेंगे
अंधेरों के कहकहे
रूह तक पसर जाएंगे
तब तुम जानोगे
मोहब्बत क्या है
उलझी लटों को सुलझाना
मोहब्बत नहीं है
ज़िस्मानी गलियों से गुजर जाना
मोहब्बत नहीं है
हिर्सो-हवस के पैराहन
पहने रहना
मोहब्बत नहीं है
तन्हाईयों की नोकों को
आज़ा में महसूस करना
शायद
मोहब्बत की इन्तिहा है
चलते हुए वक़्त का
ठिठुर कर ठहर जाना
चश्म से
दर्द के चश्मे का उबल कर
रुखसारों पर ठहर जाना
शायद
मोहब्बत है
सच
तुम नहीं जानते
मोहब्बत क्या है
तुम सिर्फ़ जिस्म को मोहब्बत का
मक़ाम समझते रहे
तुम्हारी की रूह के लम्स
मेरी रूह को छू भी नहीं पाए
रूहानी मोहब्बत के अलफ़ाज़
तुम समझ ही नहीं पाए
वरना मेरी आँखों में
मोहब्बत की नमी न होती
मेरी ज़बीं में
तुम्हारी कमी न होती
तुम समझे ही नहीं
मोहब्बत क्या है
(आज़ा=शरीर के अंग )


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 46

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on August 12, 2020 at 1:24pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से शुक्रिया ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2020 at 9:57am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"aadardiya समीर सर जी ,बधाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया, टंकण त्रुटियों को सुधारने की पूरी कोशिश…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर बहुत उम्द: ग़ज़ल कही आपने, शैर दर शैर दाद के…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :

हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :हिन्दी हिन्दुस्तान के,माथे का सरताज।जन-जन की ये आत्मा,हर मन की आवाज।।१अपने…See More
15 hours ago
Samar kabeer commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"मुहतरमा नीता तायल जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों की तरफ़ जनाब हर्ष…"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय  Harash Mahajan जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार ।"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन पर आपका द्वारा दिया गया संशोधन कहीं भी हिन्दी शब्दकोष में नज़र…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"आ. भाई विनय कुमार जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
17 hours ago
Harash Mahajan commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन । बहुत ही सुंदर दोहों का सृजन । सादर ।"
19 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"// यहां दासता का भाव हमारी सोच में भाषा की गुलामी से है ।// इसके लिये 'दास्ता' नहीं…"
22 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । इंगित त्रुटि मैं अभी संशोधित कर…"
23 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service