For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

,12122 12122 12122 12122

1

लगा के ठोकर वो पूछते हैं उठा के सर क्या चला करेंगे

पलट दी बाजी ये कह के हमने ख़ुदा के दम पर बढ़ा करेंगे

2

सजा के महफ़िल मेरी तबाही की पूछते हैं कि क्या करेंगे

सँभाले मिज़्गाँ प अश्क़ हमने कहा सनम अब जफ़ा करेंगे

3

उदास रातों में सर्द रिश्तों की उलझनों को परे हटाकर

नरम गुलाबी सी ऊन पर हम हज़ार सपने बुना करेंगे

4

हज़ार नाले हों जिंदगी के सिसक के चाहे गुज़र रही हो

मगर ख़यालों में ख़्वाहिशों के लगा के पर हम उड़ा करेंगे

5

जला के रक्खा चराग़ दिल में जहाँ  मुहब्बत धड़क रही है

 है और थोड़ी उमीद ज़िन्दा इसी के दम पर जिया करेंगे

6

बिखरती किरणें उमीद की कह रहीं हैं हमदम न उजड़ा कुछ भी

तुम्हारी मेहनत के आब से ही हज़ाराँ गुलशन खिला करेंगे

7

फ़िराक़ में ये मुहीब रातें ये ग़म के बादल ये बेक़रारी 

तुम्हें हमारे दरीदा-दिल का पयाम 'निर्मल' दिया करेंगे

Views: 65

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 3, 2020 at 8:49pm

बहुत बढ़िया आदरणीया रचना जी...आदरणीय समर साहब की इस्लाह शानदार है।

Comment by Rachna Bhatia on November 3, 2020 at 8:32pm

आदरणीय समर कबीर सर् ग़ज़ल की इस्लाह करने के लिए बेहद शुक्रिय:। सर् सभी कमियाँ ठीक करके दिखाती हूँ । सादर।

Comment by Samar kabeer on November 3, 2020 at 12:01pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

'लगा के ठोकर वो पूछते हैं उठा के सर क्या चला करेंगे

पलट दी बाजी ये कह के हमने ख़ुदा के दम पर बढ़ा करेंगे'

मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,ऊला सुधारने का प्रयास करें,ऊला में रदीफ़ 'करेंगे' की जगह "करोगे" हो रही है ।

'सजा के महफ़िल मेरी तबाही की पूछते हैं कि क्या करेंगे'

इस मिसरे में शुतर गुरबा दोष देखें ।

'नरम गुलाबी सी ऊन पर हम हज़ार सपने बुना करेंगे'

इस मिसरे में सहीह शब्द "नर्म"21 है,देखियेगा ।

'जला के रक्खा चराग़ दिल में जहाँ  मुहब्बत धड़क रही है

 है और थोड़ी उमीद ज़िन्दा इसी के दम पर जिया करेंगे'

इस शैर को यूँ कहें:-

'जला रखा है चराग़ हमने जहाँ महब्बत धड़क रही है

जो आस थोड़ी है दिल में ज़िंदा उसी के दम पर जिया करेंगे'

'तुम्हारी मेहनत के आब से ही हज़ाराँ गुलशन खिला करेंगे'

इस मिसरे में 'हज़ाराँ' को "हज़ारों" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"बहुत शुक्रिय: प्रिय ।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"रूह के पार मुझको बुलाती रही' क्या कहने.. आ. भाई समर जी।"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"भाई गुरप्रीत सिंह जी आदाब, बहुत अर्से बाद ओबीओ पर आपको देख कर ख़ुशी हुई ।"
12 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"/रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही वाह वाह आदरणीय समर…"
13 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार। बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास आपकी तरफ से । पहले दोंनों अशआर बहुत…"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"//रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही'"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आ. रचना बहन सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। मेरे हिसाब से मिसरा यह करें तो अधिक…"
14 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् सुधारने की कोशिश की है। देखें क्या सहीह है ? एक आवाज़ कानों…"
15 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई 'मुसाफ़िर' जी आदाब, सहवन बग़ैर तख़ल्लुस मक़्ते की जगह मतला टाईप हो…"
17 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post एक ही जगह बस पड़ा हूँ मैं......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
" मुहतरम अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए…"
19 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post एक ही जगह बस पड़ा हूँ मैं......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"उस्ताद - ए - मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त…"
19 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service