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करोना -योद्धाओं के नाम

करोना -योद्धा  सखी    के नाम 
 
 सुनो ! अपना ध्यान रखना 
हरगिज़ हरगिज़ न डिगना 
हौसलों को हिम्मत बँधाते रहना 
धैर्य  ध्वजा   है  फहराते  रहना 
हमेशा से ही  सिपाही  हो तुम 
विजय सी ही वाहवाही  हो तुम 
अब के जंग निज अपने संग है 
वैरी का बिलकुल अजीब रंग है 
कितने ही समर तुमने हैं जीते 
कितने ही वार किए हैं रीते 
कितने चक्रव्यूह तुमने हैं तोड़े 
कितने टूटते तार हैं जोड़े 
तो जोश तुम्हारा बरकरार रहे 
सिला जो ये सिलसिलेवार रहे 
तो जंग तो बस जीती ही समझो 
स्याही भरी रात बीती ही समझो 
ये जो है भीतर भयावह  लड़ाई 
सीने मे सुलगती गुफा  सुलगाई 
अनोखी ये रणनीति अद्भुत  है वार 
लेकिन जीजीविषा भी बिलकुल तैयार 
 विषाणु का ये समरथता  से युद्ध है 
देख लिया मानव तू कितना प्रबुद्ध है 
अस्त्र -शस्त्र शक्ति ये बल -वर्धक 
सीमाएं -सेनाएँ सब ही  निरर्थक
निज के भीतर जो निज की है शक्ति 
वही केवल वो ही है शक्ति की शक्ति 
देखनी  है बाकि सहने की सीमा 
हे धैर्य - धावक तू न होना  धीमा 
सुनो ! अपना ध्यान रखना 
हरगिज़ हरगिज़ न डिगना 
हौसलों को हिम्मत बँधाते रहना 
धैर्य  ध्वजा   है फहराते  रहना 
..............................
..मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by amita tiwari on December 3, 2020 at 1:36am

आदरणीय  समीर साहब तथा बृजेश जी 

रचना के स्वागत के लिए  आभारी हूँ

सादर 

अमिता 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 2, 2020 at 12:41pm

अच्छी कविता लिखी है आदरणीया...

Comment by Samar kabeer on November 29, 2020 at 8:23pm

मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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