For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)

1212 - 1122 - 1212 - 22

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

वो दास्तान ज़ुबाँ पर जो आ गई फिर से 

ये उम्र कैसे कटेगी कहाँ बसर होगी 

अँधेरी रात की जाने न कब सहर होगी 

शिकस्त सारी उमीदें मिटा गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

मुझे गुमाँ भी नहीं था हबीब बदलेगा 

बदल गया है मगर, यूँ नसीब बदलेगा? 

बहार बनके ख़िज़ाँ ही जला गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

ज़माने में है कहाँ और वक़्त सा मरहम

नहीं है दूसरा कोई भी ऐसा ही बरहम 

घड़ी वो कैसी थी आई रुला गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

वो दास्तान ज़ुबाँ पर जो आ गई फिर से 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 162

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on March 2, 2021 at 1:08pm

आदरणीया वीणा गुप्ता जी आदाब, नग़्मा पर आपकी आमद बाइस-ए-शरफ़ है, मशकूर ओ ममनून हूँ। सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। 

Comment by Veena Gupta on March 2, 2021 at 4:09am

 ख़ूबसूरत नग़मा,मुबारकबाद क़ुबूल करें

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on February 23, 2021 at 11:46pm

जनाब कृष मिश्रा 'जान' साहिब आदाब, नग़्मा पर आपकी दाद, मुबारकबाद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 23, 2021 at 4:24pm

बहोत खूबसूरत नग़मा हुआ है आदरणीय अमीरुद्दीन सर जी ढेरों मुबारकबाद।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on February 22, 2021 at 9:32pm

जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, रचना पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। 

Comment by Aazi Tamaam on February 22, 2021 at 9:45am

सादर प्रणाम आदरणीय अमीर जी

अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय निलेश जी अच्छी ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें आख़िर में नाकाम हुए,मक़्ता ख़ूब हुआ। सादर।"
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय निलेश जी बहुत शुक्रिया आपका। सादर।"
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण जी,अभिवादन जी धन्यवाद आपका। बेहतर है, ठीक करती हूँ इसे। सादर।"
1 hour ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी नमस्कार, बहुत ही उम्दः ग़ज़ल हुई है, बहुत बधाई बेहतरीन ग़ज़ल के लिए।"
2 hours ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आ. रिचा जी नमस्कार,बहुत ही उम्दः ग़ज़ल हुई है, बहुत बधाई आपको"
2 hours ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय सालिक जी नमस्कार,बहुत ही उम्दः ग़ज़ल कही है आपने बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल के लिए।"
2 hours ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"सुब्ह के जैसे चमक रहे थें देख के तुझको शाम हुए कर के रौशन तेरी दुनिया हम तो माह-ए-तमाम हुए। तंज…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई । /जाने नज़र ये किसकी लगी है हम बुझती सी…"
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार कीजिये सादर।"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय सालिक जी,नमस्कार बहुत खूब ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । एक बेहतरीन गजल से मंच का शुभारम्भ करने के लिए बहुत बहुत बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"चौराहे  पर  मान  गँवाना  मर्यादा  के  काम हुएपूछ रहा मन सोते जगते…"
5 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service