For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें

दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
चार दिन की ज़िन्दगी में और क्या क्या हम करें?
.
एक दिन बौनों की बस्ती से गुज़रना क्या हुआ
चाहने वो यह लगे क़द अपना छोटा हम करें.
.
हाथ बेचे ज़ह’न बेचा और फिर ईमाँ बिका  
पेट की ख़ातिर भला अब और कितना हम करें?
.
चाहते हैं हम को पाना और झिझकते भी हैं वो  
मसअला यानी है उनका ख़ुद को सस्ता हम करें.
.
इक सितम से रू-ब-रु हैं पर ज़ुबां ख़ुलती नहीं
ये ज़माना चाहता है उस का चर्चा हम करें.
.
बा-अदब हैं हम सो जाहिल से फ़क़त इतना कहा
आप अपने से न जाएँ तो रवाना हम करें.
.
निलेश "नूर"
मौलिक अप्रकाशित 

Views: 238

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 15, 2021 at 9:49am

धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 11, 2021 at 7:01pm

आ. भाई नीलेश जी सादर अभिवादन ।सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 11, 2021 at 12:22pm

शुक्रिया आ. सालिक जी 

Comment by सालिक गणवीर on June 11, 2021 at 11:40am

आदरणीय भाई Nilesh Shevgaonkarजी

आदाब

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने,बधाई स्वीकार करें । 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 10, 2021 at 11:29am

शुक्रिया आ. समर सर 

Comment by Samar kabeer on June 9, 2021 at 2:45pm

जनाब निलेश जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 9, 2021 at 10:24am

शुक्रिया आ. आज़ी साहेब 

Comment by Aazi Tamaam on June 8, 2021 at 12:31pm

सादर प्रणाम आ नीलेश जी

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई है

सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post प्रश्न .....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी कविता हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
"जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब, बहुत दिनों बाद ओबीओ पर आपकी ग़ज़ल पढ़ने का मौक़ा मिला है । ग़ज़ल हमेशा की तरह…"
4 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
"नमस्कार, आदरणीय  सौरभ  साहब,  ग़ज़ल प्रथम श्रेणी  का काव्य  है, आपकी…"
4 hours ago
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post प्रश्न .....
" नमन,  सुशील  सरना  साहब,  अंतस की विवरणिका  है, आदरणीय आप की …"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
" आ० चेतन प्रकाश जी आप ग़ज़ल को समझें.  ओबीओ की पाठकीयता इतनी निरीह नहीं है. या…"
5 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमको समझ नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post फ़र्ज़ ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।"
6 hours ago
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'मंज़िल की जुस्तजू में…"
6 hours ago
Om Parkash Sharma shared their blog post on Facebook
7 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
"आदरणीय सौरभ साहब, नमन! प्रश्न सूर्य जैसे जीवन की धुरी के रुपक पर, मान्यवर आप, अपनी ग़ज़ल के माध्यम…"
7 hours ago
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कबीर साहब ग़ज़ल तक आने और पसंद कर हौसला बढ़ाने का बहुत बहुत शुक्रिया "
11 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service