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मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)

खाली हो गई हूँ

इच्छाओं से, आशाओं से

व्यर्थ विचारों से

निरर्थक प्रवाहों से

अस्थिर लगावों से

अनर्गल खिंचावों से

आधुनिक चकाचौंध से

कौन जाने, मौत

कब दरवाजा खटखटा दे

साथ ले जाने को

किन्तु वह क्या साथ

ले जा पाएगी ?

वह तो पंच तत्वों में

तन को मिलाएगी

मुझे ना मार पाएगी

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on October 1, 2021 at 7:22pm

आ0 विजय निकोरे जी ,जानकर अत्यन्त हर्ष हुआ कि इस रचना से आपने आश्वासन प्राप्त किया। मेरा लेखन सार्थक हुआ।

Comment by vijay nikore on September 30, 2021 at 12:41pm

बहुत ही सुन्दर रचना...

मुझको आश्वासन दे रही है कि जीवन में घबराना नहीं है

Comment by Usha Awasthi on September 22, 2021 at 6:11pm

आ0 समर कबीर साहेब, रचना सुन्दर लगी , जानकर प्रसन्न हूँ।

बहुत आभार आपका

Comment by Usha Awasthi on September 22, 2021 at 6:06pm

आ0 लक्ष्मण धामी  'मुसाफिर ' जी । आपको रचना सुन्दर लगी , जानकर खुशी हुई।

हार्दिक  धन्यवाद

Comment by Samar kabeer on September 22, 2021 at 3:08pm

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 18, 2021 at 4:58am

आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। सुन्दर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।

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