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धारावाहिक कहानी : कौन देगा इस रिश्ते को नाम ? अंक-२

कौन देगा इस रिश्ते को नाम ?

लेखक -- सतीश मापतपुरी

करवट बदल कर नाजिमा ने सर तक कम्बल खींच लिया, तभी उसे लगा कि बाहर के दरवाज़े पर कोई दस्तक दे रहा है .................. एकबारगी उसका पूरा बदन काँप उठा ..........................................................

दस्तक बंद हो गयी . भ्रम समझ वह गले तक पुनः चादर समेट ली . "ठक....ठक ठक ......ठक........ दस्तक पहले से अधिक स्पष्ट थी ........ लगभग उछल पड़ी नाजिमा ........ झटके से चादर फेंककर खड़ी हो गयी . "कौन हो सकता है ?..... क्या रुरपुर के हिन्दू-दंगाई ?...... यहाँ किसलिए आये होंगे ?......... क्या करना चाहिए मुझे ?.......अब्बा को जगाना चाहिए ?" . एक साथ अनेक प्रश्न उभरे . अगले ही क्षण नाजिमा ने स्वयं को संभाल लिया .

उसने सोचा,अब्बा नाहक डर जाएंगे . कोई भी हो, अन्दर आना इतना आसान नहीं . इसके लिए फाटकनुमा किवाड़ तोड़ना होगा और तबतक रुसुलपुर के लोग सोये नहीं रहेंगे . सांस रोके दबे पाँव वह बाहर के दरवाजे तक आयी. कान लगाकर सुना , धीरे-धीरे कोई सिसक रहा था . किवाड़ की दरार से झाँक कर देखा . गली में जल रहे बिजली के लट्टू की आड़ी-तिरछी पड़ रही मद्धिम रौशनी में उसकी आँखें यह देखकर फटी की फटी रह गयी कि उसकी हम उम्र एक लड़की सिसकते हुए दरवाजे पर लगातार दस्तक दे रही थी. फिर एक पल के लिए भी उसने बिलम्ब नहीं किया, फटाक से किवाड़ खोल दिया . किन्तु इसके पूर्व कि वह उस लड़की का हाथ पकड़ कर अन्दर खींचती एक युवक ने कस कर नाजिम का हाथ पकड़ लिया ..... पलटकर उसने उस युवक को जलती हुयी नज़रों से घूरा . युवक ने नाजिमा का हाथ नहीं छोड़ा बल्कि उन हाथों पर अपना माथा टेकते हुए बोला--"बहन जी, हम भाई-बहन बड़ी मुसीबत में है. हमें पता नहीं था इधर स्थिति इतनी खराब है. हम सूरजगढ़ी के पंडित रामदीन के घर के हैं . बड़ी मुश्किल से छिपते-छिपाते यहाँ तक पहुचें है ".

"सूरजगढ़ी के हैं तो इधर कैसे आ भटके ?"

"गिरधरपुर उतरने पर पता चला की बस कहीं नहीं जा रही है . हमने वहाँ ही रुक जाने को सोचा था पर अचानक भगदड़ मच गयी . जिधर रास्ता मिला हम भाग खड़े हुए. हमें तो यह भी पता नहीं कि यह कौन सी जगह है." वह अपरिचित युवक इतनी सारी बातें एक ही सांस में कह गया . किसी के आने की आहट सुनकर नाजिमा ने दोनों को अन्दर करके सांकल चढ़ा दिया.

आँगन में आते ही युवक इस तरह उछल पडा मानों उसके पाँव तले विषधर आ गया हो............. क्रमश:

 

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Comment by Rash Bihari Ravi on August 30, 2011 at 2:15pm

bahut badhia sir ji bahut khubsurat kahani chuna hain aapne

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