For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले

तू ज़रा सोच कभी अपनी अदा से पहले
कहीं मर जाये न इक शख्स क़ज़ा से पहले 

इस लिए आज तलक मुझ से ख़ताएँ न हुईं 
रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले 

हो सके तो कभी देखो मेरे घर में आकर 
ऐसी बरसात जो होती है घटा से पहले 

ग़मे जानां की क़सम अश्के मोहब्बत की क़सम 
थे बहुत चैन से हम दौरे वफ़ा से पहले 

वह फ़क़त रंग ही भर्ती रही अफसानों में
सब पहुंच भी गए मंजिल पे सिया से पहले 

Views: 262

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 6, 2011 at 11:00am

बधाई.  हर शे’र की कहन जज़्बों का गुलदस्ता है.

वह फ़कत रंग ही भरती रही.. .  वाह-वाह !! ..

वीनस भाई के सुझाव और इशारे पर ग़ौर करेंगी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 6, 2011 at 10:31am

इस लिए आज तलक मुझ से ख़ताएँ न हुईं 
रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले

 

वाह सिया जी, अच्छी प्रस्तुति पर बधाई |

Comment by वीनस केसरी on October 4, 2011 at 11:37pm

सिया जी,
ग़ज़ल के कुछ शेर लय से भटक रहे हैं, एक बार नजर-ए-सानी कर लें 

Comment by siyasachdev on October 4, 2011 at 10:09pm

वीनस केशरी ji badi masarrat hui ..aapko peshkash pasand aayi ..salamati ho

 

Comment by वीनस केसरी on October 4, 2011 at 9:49pm

सुन्दर ग़ज़ल है सिया जी

कुछ टाईपिंग की त्रुटियाँ हैं उन्हें सही कर लीजिए 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

नज़्म - शहीद की आरज़ू

2122 - 2122 - 2122 - 212मुझको पहलू में सुला लेना मेरे प्यारे वतनअपने आँचल की हवा देना मेरे प्यारे…See More
3 hours ago
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2122     2122      2122      212वक्त इतना भी कठिन कब है,ज़रा महसूस कर।एक रोशन दिन की ये शब है,ज़रा…See More
13 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted blog posts
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on आशीष यादव's blog post गणतंत्र दिवस गीत
"जय जय जय गणतंत्र दिवस की जय जय संविधान की जय जय जय जय हिंद           …"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गणतंत्र दिवस गीत

जय भारत के लोगों की जय भारत देश महान की जय जय जय गणतंत्र दिवस कीजय जय संविधान कीजय जय जय जय…See More
yesterday
Aazi Tamaam posted a photo
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .राजनीति
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, तुच्छ राजनीति पर कटाक्ष करते सुंदर दोहे रचे हैं आपने, हार्दिक…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on आशीष यादव's blog post नव वर्ष पर 5 दोहे
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, अच्छे दोहे रचे हैं आपने, हार्दिक बधाई।  'मिलता रहे…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी .....

दोहा त्रयी...दुख के जंगल हैं घने , सुख की छिटकी धूप । करम पड़ेंगे भोगने , निर्धन हो या भूप ।।धन वैभव…See More
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी .....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी .....
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय ।सहमत एवं संशोधित ।…"
Tuesday
Aazi Tamaam replied to Aazi Tamaam's discussion Secracy in the group English Literature
"Thanks a lot Mr Asheesh I'm glad to hear you Thanks for Encouraging me"
Tuesday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service