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ग़ज़ल--जिंदगी एक रेल होती है.......

जिंदगी एक रेल होती है
ये न समझो कि खेल होती है।

जिंदगी का सफर बहुत लम्बा,
रूक गये तो ये फेल होती है।

वो जहाँ चाहे मोड दे हमको,
हाथ उसके नकेल होती है।

आजकल जिंदगी की भागमभाग,
पानी कम ज्यादा तेल होती है।

आज कानून ही बदल गया है,
बोल दो सच तो जेल होती है।

अब तो राशन की लाइने या सडक,
हर जगह धक्का पेल होती है।।।।

सूबे सिंह सुजान

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Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2012 at 10:43pm

आपका मंच पर बने रहना उम्मीद जगाता है .. हार्दिक बधाई

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 1, 2012 at 7:50am

Rekha Joshi,,,,,,,,,,,,जी शुक्रिया

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 1, 2012 at 7:49am

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी..........जी, धन्यवाद।।।। सुजान  ही मुझे भी अच्छा लगता है

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on August 31, 2012 at 6:38pm
वाह सुजान सिंह जी(बुरा मत मानियेगा मुझे सूबे सिंह जमा नहीं इसीलिए सुजान सिंह लिखा है,और आपका उपनाम भी सुजान है,इसीलिए ये गुस्ताखी कर बैठा,क्षमा प्रार्थी हूं।) वाह आनन्ददायक और आंख खोलू गजल।आपको बार-बार बधाई।और वाह........ वाह........ वाह........
Comment by सूबे सिंह सुजान on August 25, 2012 at 5:02pm

Rekha Joshi.........जी, आपकी प्रतिक्रिया पर मैं  बहुत आभारी हूँ।.................

Comment by सूबे सिंह सुजान on August 25, 2012 at 5:01pm
Comment by सूबे सिंह सुजान on August 25, 2012 at 4:57pm

Arun Kumar Pandey 'Abhinav'...आपकी दाद पाकर धन्य हुआ।

Comment by Rekha Joshi on August 25, 2012 at 12:59pm

आज कानून ही बदल गया है, 
बोल दो सच तो जेल होती है। ,बहुत खूब सुबेसिंह जी अक्षरक्षर सत्य ,बधाई 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on August 25, 2012 at 11:34am

उम्दा ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय सुजान जी
इस उम्दा ग़ज़ल के लिए दिली दाद क़ुबूल कीजिये

वैसे तो सारे शेर उम्दा हैं

पर इस शेर में दोष है इसे सुधार कर लें
गुरजन आपको अपनी संजीवनी राय अवश्य देंगे

आज कानून ही बदल गया है,
बोल दो सच तो जेल होती है।

Comment by Abhinav Arun on August 25, 2012 at 11:28am

आजकल जिंदगी की भागमभाग,
पानी कम ज्यादा तेल होती है।

आज कानून ही बदल गया है,
बोल दो सच तो जेल होती है।
ye do sher vishesh pasand aaye sujaan ji hardik badhai

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