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ग़ज़ल--हंसी और भी तुमको मौसम मिलेंगे।

हंसी और भी तुमको मौसम मिलेंगे।

मगर दोस्त तुमको कहां हम मिलेंगे।।

मेरा दिल दुखाकर अगर तुम हंसोगे।

तुम्हें जिंदगी में बहुत ग़म मिलेंगे।।

अगर जिंदगी में खुशी चाहते हो।

तो इस राह कांटे भी लाज़िम मिलेंगे।।

कभी भी किसी ने ये सोचा न होगा।

कि इनसान के पेट में बम मिलेंगे।।

खुशी सबको मिलती नहीं मांगने से।

बहुत लोग दुनिया में गुमसुम मिलेंगे।।

तुम्हारी खुशी को जुदा हो गया हूँ।

अगर जिंदगी है तो फिर हम मिलेंगे।।

...........................सूबे सिंह सुजान...................

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Comment

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Comment by सूबे सिंह सुजान on September 28, 2012 at 6:03pm

Rajesh Kumar Jha......ji aapki bat sahi hai.......अर्थ अलग अलग हैं

Comment by राजेश 'मृदु' on September 28, 2012 at 12:50pm

बहुत सुंदर गज़ल कही  है आपने हार्दिक बधाई । एक उलझन में हूं हसीं एवं हंसी क्‍या दोनों के ही अर्थ एक होते है अगर बतायें तो उलझन दूर हो जाएगी

Comment by वीनस केसरी on September 28, 2012 at 12:01am

वाह सुजान जी अशआर की मार्फ़त बहुत सुन्दर बातें साझा की है
हार्दिक बधाई

तुम्हारी खुशी को जुदा हो गया हूँ।

अगर जिंदगी है तो फिर हम मिलेंगे।।
वाह वा



ओ बी ओ पर ग़ज़ल से सम्बन्धित अनेक पोस्ट में काफिया के सिनाद दोष पर खूब चर्चा हुई हैआप सिनाद दोष को स्पष्ट कर सकें तो ग़ज़ल और निखरेगी  

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 27, 2012 at 10:59pm

neeraj......jiआपकी पंक्तियां मेरे लिये प्रिय हैं। मुझे उत्साहित कर गई।.............मित्र बहुत-बहुत धन्यवाद।

कृपया ध्यान दे...

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