For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मन एक सागर
जहाँ ;
भावनाओं की जलपरियाँ
करती हैं अठखेलियाँ
विचारों के राजकुमारों के साथ ;
घात लगाये छुपे रहते
क्रोध के मगरमच्छ ;
लालच की व्हेल भयंकर मुँह फाड़े आतुर
निगल जाने को सबकुछ ;
घूमते रहते ऑक्टोपस दिवास्वप्नों के ;
आते हैं तूफान दुविधाओं के ;
विशालता ही वरदान है
और अभिशाप भी ;
अद्भुत विचित्रता को स्वयं में समेटे
एक अनोखा सम्पूर्ण संसार है
जो सीमाओं में रहकर भी
सीमाओं से मुक्त है ;

मन एक सागर
जहाँ ;
अतीत डूब के अपने अनुभवों से
प्रशस्त करता है मार्ग
भविष्य का ;
ऊपरी सतह को देख के
असंभव है अनुमान लगाना
तलहटी की वास्तविकताओं के बारे में ;
अथाह जल के मध्य स्थित द्वीप
पर्याप्त हैं बताने के लिए
ठहराव अल्पकालिक होता है
बहाव ही प्रकृति का मूल है ;
पग-पग पर दृष्टिगोचर होते है उदाहरण
धैर्य एवं संयम के लाभ के ;
गहराइयों में जाकर ही
मिलते हैं धर्म के सीप
मर्यादित आचरण के मोती लिये |

Views: 459

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 4, 2012 at 10:59am

आदरणीय गुरुदेव.......स्नेह से भरी आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार........


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2012 at 10:35pm

वाह ! वाह-वाह !!

Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 3, 2012 at 7:02am

स्वागत है अनुज !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 3, 2012 at 6:59am

आदरणीय अग्रज अम्बरीश जी..........आपसे सराहना पाकर मन गदगद हुआ........आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.........

Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 3, 2012 at 6:57am

//ठहराव अल्पकालिक होता है
बहाव ही प्रकृति का मूल है ;
पग-पग पर दृष्टिगोचर होते है उदाहरण
धैर्य एवं संयम के लाभ के ;
गहराइयों में जाकर ही
मिलते हैं धर्म के सीप
मर्यादित आचरण के मोती लिये |//

कुमार गौरव जी, मन सागर की गह्रराइयों में डूब-डूब कर आपके द्वारा चुने हुए ये समस्त मोती स्वयं में लाजवाब हैं ........बहुत बहुत बधाई मित्र !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 3, 2012 at 6:48am

आदरणीया राजेश जी.........सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद...........

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 3, 2012 at 6:48am

आदरणीय ज्येष्ठ भ्राता सुरेन्द्र शुक्ल जी.........रचना को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार........जय श्री राधे.........

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on October 2, 2012 at 8:29pm

प्रिय अजीतेंदु  जी ...महीने  के सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आप की लगन और श्रम को सलाम आप को हार्दिक बधाई .. ये हुयी  न बात ..मेंहदी रंग लाती ही रहे 

जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 30, 2012 at 9:52am

सागर की गहराई में जाकर अंडर वाटर जाकर जो अद्दभुत नज़ारे मिलते हैं उसी तरह मन के सागर की तलहटी में जाकर अद्दभुत   विचार अद्दभुत कल्पनालोक का सामना होता है बहुत गहन प्रस्तुति ...वाह बहुत बधाई आपको कुमार अजीतेंदु जी 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 30, 2012 at 12:45am

ठहराव अल्पकालिक होता है
बहाव ही प्रकृति का मूल है ;
पग-पग पर दृष्टिगोचर होते है उदाहरण
धैर्य एवं संयम के लाभ के ;
गहराइयों में जाकर ही
मिलते हैं धर्म के सीप
मर्यादित आचरण के मोती लिये |

प्रिय अजीतेंदु जी ..बहुत सुन्दर रचना और प्यारा सन्देश उत्साहित करते 

जय श्री राधे अपना स्नेह बनाये रखें 
भ्रमर ५ 

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post बुढ़ापा .....
"आदरणीय सुशील सरना जी, बुढ़ापे पर अति सुंदर सृजन के लिए बधाई।"
5 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख दिलों के साथ में ठूँसी दिमाग में - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह भाई साहब वाह , बहुत खूब ..."
6 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"आप दोनो का बहुत बहुत शुक्रिया ....में कुछ सुधार करता हूं ... धन्यवाद मेरी जानकारी में वृद्धि करने…"
6 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

कुछ उक्तियाँ

कुछ उक्तियाँ उषा अवस्थी आज 'गधे' को पीट कर 'घोड़ा' दिया बनाय कल फिर तुम क्या करोगे जब रेंकेगा जाय?…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

बुढ़ापा .....

बुढ़ापा ....तन पर दस्तक दे रही, ज़रा काल की शाम ।काया को भाने लगा, अच्छा  अब  आराम ।1।बीते कल की आज…See More
12 hours ago
Samar kabeer is now friends with Dayaram Methani and Kamal purohit
13 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल :- हज़रत-ए-'मीर' की ज़मीन में
"जनाब कमल पुरोहित जी आदाब, सुख़न नवाज़ीऔर आपकी महब्बत के लिए बहुत शुक्रिय: ।"
14 hours ago
Samar kabeer left a comment for Kamal purohit
"ख़ुश रहो ।"
15 hours ago
Kamal purohit commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल :- हज़रत-ए-'मीर' की ज़मीन में
"वाह सर जी कमाल ग़ज़ल बेजोड़ काफ़िये इस मिसरे पर मैं सहमत नहीं (बेअदब हूँ अदब नहीं आता) इसके लिए मैं…"
16 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

मैं जताना जानता तो

मैं जताना जानता तो बन बैरागी यूं ना फिरता मेरे ही ख़िलाफ़ ना होता आज ये उसूल मेरा मैं ठहरना जानता तो…See More
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
21 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service