For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - लोग हैं तैयार खुद की लाश ढोने के लिए

ख्वाब के मोती हकीकत में पिरोने के लिए।
लोग हैं तैयार खुद की लाश ढोने के लिए।

झोंपड़े में सो रहा मजदूर कितने चैन से,
है नहीं कुछ पास उसके क्योंकि खोने के लिए।

आसमां की वो खुली, लंबी उड़ानें छोड़कर,
क्यों तरसते हैं परिंदे कैद होने के लिए।

जिंदगी भर खून औरों का बहाते जो रहे,
जा रहे हैं तान सीना पाप धोने के लिए।

जगमगाते हैं दिखावे से शहर के सब मकान,
सादगी तो रह गई है मात्र कोने के लिए।

पुष्प सारे चल दिए रंगीन गमलों की तरफ,
रह गया उजड़ा चमन बदहाल रोने के लिए।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 575

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 10, 2013 at 9:56am

हृदयतल से आपका आभार प्रिय मित्रवर अरुन शर्मा जी, आपका स्नेह सर-आँखोंपर...........

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 10, 2013 at 9:55am

प्रोत्साहन हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सुशील जोशी जी.............

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 10, 2013 at 9:54am

आपका दिल से आभार आदरणीय बृजेश भैया..........

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 9, 2013 at 5:41pm

आदरणीय प्रिय मित्रवर वाह मन प्रसन्न हो उठा बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने सभी के सभी अशआर बहुत ही उम्दा बन पड़े हैं ढेरों दिली दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 9:26am

शानदार गज़ल के लिए हार्दिक बधाई गौरव जी.....

Comment by बृजेश नीरज on November 6, 2013 at 9:45am

एक अच्छी ग़ज़ल के लिए आपको हार्दिक बधाई!

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 5, 2013 at 6:31pm

दिल से आभार आपका मित्र राम पाठक जी.........

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 5, 2013 at 6:31pm

आदरणीय सौरभ सर, आपका स्नेह पाकर मेहनत सफल हुई, हार्दिक आभार..........

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 5, 2013 at 6:29pm

प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय विजय जी..........

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 5, 2013 at 6:28pm

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद........

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"//सुनहरे की मात्रा गणना 212 ही होगी ॥ शायद ॥ 122 नहीं  । // सु+नह+रा = 1 2 2 .. यगणात्मक शब्द…"
15 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'
"वाह अच्छा है मुसाफिर साहब ॥ वाह "
16 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"धन्यवाद दोस्तो ..   आपके सलाह सुझाव का स्वागत है । सुनहरे की मात्रा गणना 212 ही होगी ॥…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"आ. भाई गुमनाम जी , सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक वधाई। हिन्दी में "वहम" बोले…"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख दिलों के साथ में ठूँसी दिमाग में - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//कालिख दिलों के साथ में ठूँसी दिमाग में// यूँ पढ़े कालिख दिलों के साथ ही ठूँसी दिमाग में"
18 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक .....

दोहा  मुक्तक ........कड़- कड़ कड़के दामिनी, घन बरसे घनघोर ।    उत्पातों  के  दौर  में, साँस का …See More
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"जनाब गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, एक ग़ैर मानूस (अप्रचलित) बह्र पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"जनाब गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२*जब कोई दीवानगी  ही  आप ने पाली नहींजान लो ये जिन्दगी भी जिन्दगी सोची नहीं।।*पात…See More
yesterday
gumnaam pithoragarhi posted a blog post

गजल

212  212  212  22 इक वहम सी लगे वो भरी सी जेब साथ रहती मेरे अब फटी सी जेब ख्वाब देखे सदा सुनहरे दिन…See More
Monday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service