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ग़ज़ल/ इस धरती के नाम लिखूंगा हरियाली मैं (डॉ. राकेश जोशी)

जब भी आऊंगा खाकर तुमसे गाली मैं
इस धरती के नाम लिखूंगा हरियाली मैं

 

छोटे-छोटे बच्चों की उंगली थामूंगा
आसमान तक दौड़ लगाऊंगा खाली मैं

 

हरेक महल के हर पत्थर से बात करूंगा
मज़दूरों के लिए बजाऊंगा ताली मैं

 

जिस दिन तेरे बच्चे भी पढ़ने जाएंगे
उस दिन तुझे कहूँगा 'हैप्पी दीवाली' मैं

 

खेतों में सपने फिर से उगने लगते हैं
जब भी करता हूँ बातें फसलों वाली मैं

 

इक दिन तेरे लिए दमाऊं-ढोल बजेगा
उस दिन झूम के गाऊंगा फिर क़व्वाली मैं

 

"मौलिक व अप्रकाशित"

 

डॉ. राकेश जोशी

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Comment

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Comment by Dr. Rakesh Joshi on September 1, 2014 at 7:25pm

आदरणीय गिरिराज जी,

मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.

आपकी टिप्पणी के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.

सादर,

डॉ. राकेश जोशी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 1, 2014 at 4:12pm

आदरणीय  राकेश जोशी भाई , ग़ज़ल की बातों के लिहाज़ से आपने सुन्दर बातें कहीं हैं , बस मिसरे एक ही बहर में नहीं लग रहे हैं ,गज़ल के गंभीर प्रयास के लिए आपको बधाइयाँ |

Comment by Dr. Rakesh Joshi on August 28, 2014 at 11:02pm

आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा जी,
आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई. मैं इसके लिए आपका आभारी हूँ.
सादर,
डॉ. राकेश जोशी

Comment by Dr. Rakesh Joshi on August 28, 2014 at 11:01pm

धन्यवाद, आदरणीय डॉ. भट्ट जी.
सादर,
डॉ. राकेश जोशी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 2:34pm
इस सुंदर प्रस्तुति के लिए तहे दिल बधाई सादर
Comment by Nilesh Shevgaonkar on August 27, 2014 at 12:10pm

अच्छे भाव है ....मतला समझ नहीं आया ..कि गाली का हरियाली से क्या सम्बन्ध है ...
ग़ज़ल में रदीफ़ काफ़िये के निर्वहन के साथ बह्र का पालन भी जरूरी है ...इस विषय पर बहुत सी सामग्री ग़ज़ल की कक्षा में उपलब्ध है ..आशा है आप लाभ उठाएंगे ..
अच्छे प्रयास हेतु बधाई 

Comment by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' on August 27, 2014 at 8:29am

बहुत सुंदर रचना। अलग तरह की। सुंदर संयोजन। बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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