For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उमर तनहा गुजर जाये सहारा ढूढते जग में ,

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ - हजज मुसम्मन सालिम
चमन में फूल खिलते हैं खुशी का राज होता है |
ख़ुशी में झूमते  भौंरे  मजे  से  काज होता है |
खिले जब फूल डाली में नजारा ही बदल जाये ,
हजारों लोग  आते हैं  अनोखा  साज होता है |
उदासी का सबब होता उजाड़े जब चमन कोई  ,
विराने में कहाँ कोई खुशी का  काज  होता है |
मजा वैसा  नहीं आता  अकेले  राह चलने में ,
अगर  हो साथ में कोई मजे से काज होता है |
अगर कुछ  हो  परेशानी  बताते हैं अकेले  में ,
अगर साथी सफर में हो अलग ही नाज़ होता है|
उमर तनहा गुजर जाये   सहारा  ढूढते जग में ,
उजाड़ो ना चमन  वर्मा  जहाँ   बेताज  होता है |
श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 230

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shyam Narain Verma on March 27, 2015 at 9:49am

आदरणीय डा. आशुतोष मिश्र जी रचना भाव पसंद करने के लिए हार्दिक आभार।
आदरणीय श्री गिरिराज जी और श्री समर कबीर जी रचना भाव पसंद करने के लिए और अमूल्य सलाह के लिए हार्दिक आभार।
सादर ............

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2015 at 3:51pm

आदरणीय श्याम जी ..आपकी इस सुंदर ग़ज़ल पर मेरी हादिक बधाई सादर 

Comment by Samar kabeer on March 25, 2015 at 10:38am
जनाब गिरिराज भंडारी जी,आदाब,हम ग़ज़ल कहेंगे तो ग़ज़ल के नियमों का पालन करना आवश्यक है,क़ाफ़िये का इस्तेमाल हम इच्छानुसार नहीं कर सकते,और जनाब यह हिंदी नहीं देवनागिरी है |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 24, 2015 at 11:36pm

आदरणीय श्याम भाई , अच्छी ग़ज़ल हुई है , गज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । मै आदरणीय मिथिलेश भाई जी बात से सहमत हूँ , कहीं कहीं बात साफ नहीं कह पाये हैं आप । लेकिन आदरणीय समर भाई जी की बात से  असहमत हूँ । हिन्दी ग़ज़ल में नुक्तों के अनुसार काफिया बन्दी संभव नहीं है , इस नियम को उर्दू लिपि मे लिखने वालों को ज़रूर निभाना चाहिये , ऐसा मेरा मत है । आगे गुणिजनों के ऊपर है , जैसी सलाह दें ।

Comment by Shyam Narain Verma on March 24, 2015 at 5:38pm

आदरणीय , रचना भाव पसंद करने के लिए और  अमूल्य सलाह के लिए हार्दिक आभार। 

Comment by Samar kabeer on March 24, 2015 at 4:43pm
जनाब श्याम नारायण वर्मा जी आदाब,सुन्दर ग़ज़ल के लिये बधाई स्वीकार करें,आपने ग़ज़ल में बह्र से तो इन्साफ़ किया है लेकिन क़ाफ़िये से कई अशआर में इन्साफ़ नहीं हो सका,आपकी ग़ज़ल के क़ाफ़िये "काज","राज","आज" हैं,इसमें आपने "साज़","नाज़" क़ाफ़िये भी इस्तेमाल किये हैं जो इस ग़ज़ल के क़ाफ़िये ही नहीं हैं,कृपया अन्यथा न लें |
Comment by Shyam Narain Verma on March 24, 2015 at 9:57am

आदरणीय डा. विजय शंकर जी और श्री सोमेश कुमार जी रचना भाव पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार।
सादर

Comment by somesh kumar on March 23, 2015 at 8:36pm

मजा वैसा  नहीं आता  अकेले  राह चलने में

सही कहा जीवन का कोई भी पथ हो ,बिना संग-साथ के सफ़र नीरस और थकाऊ लगता है |अब इस साहित्यिक सफ़र में ही इतने मित्रों के सान्निध्य में सबके सृजन में निखर आ रहा है |बधाई इस प्रस्तुति पर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 23, 2015 at 6:54pm
लयबद्ध , सुन्दर , बधाई, आदरणीय श्याम नारायण जी, सादर।
Comment by Shyam Narain Verma on March 23, 2015 at 5:54pm

आदरणीय श्री गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी और श्री मिथिलेश जी रचना भाव पसंद करने के लिए और अमूल्य सलाह के लिए हार्दिक आभार।
सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"//आठवें शेर में पर का अर्थ दूसरों से है । // जनाब लक्ष्मण धामी भाई जी, 'पर' शब्द को…"
7 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय अबोध बालक जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। "
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' नमस्कार। भाई बहुत बहुत धन्यवाद। "
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह 'जम्मू' जी आभारी हूँ। आपने सही कहा ,सर् का मार्गदर्शन मिलना हमारी…"
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। बहुत खूबसूरत आपने मतला बना दिया। सच बताऊं सर् मैंने जो सानी बदलने के…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"धन्यवाद लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी, मेरी तरफ़ से भी आपको और सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ परिवार के समस्त सदस्यों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..."
Tuesday
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है…"
Monday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"बहुत शुक्रिय: प्रिय ।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"रूह के पार मुझको बुलाती रही' क्या कहने.. आ. भाई समर जी।"
Monday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"भाई गुरप्रीत सिंह जी आदाब, बहुत अर्से बाद ओबीओ पर आपको देख कर ख़ुशी हुई ।"
Monday
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"/रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही वाह वाह आदरणीय समर…"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service