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शाम

स्वागतम
----------
स्वागत तेरा शाम सदा
श्याम सी सदा शाम हो ,
श्वेत श्याम उन यादों की
हर पल सुनहरी शाम हो

चाहत
--------
दूर होते हम तभी ,
भोर की जब बांग हो .
पास लाती चाहत हमे
नित मिलन की शाम हो

.

जिंदगी
------

जिंदगी तू सुबह भी है
जिंदगी तू शाम भी है
बोझिल कभी तू दर्द से
देती कभी आराम भी है

.

हसरत
---------
हाथ थामे चलते रहें
हसरत मेरी रही सदा
मुडके न देखेंगे कभी
लाख कितने बदनाम हों

.

परिवर्तन
---------

थे चमन में हम तनहा
मरुस्थल के भाल पर
उगने लगे है फूल अब
सूखे कैक्टस की डाल पर

.

संध्या काल
-----------
फ़िक्र न कर तू ए जिंदगी
न तू बुरे हाल है
नियम है प्रकृति का
जीवन का संध्या काल है

.

मैखाना
-------
जख्म मिले सी लिए
उफ़ न करी नाम को
मैखाने न गया कभी
गम भुलाने शाम को।

.

मौलिक / अप्रत्याशित 

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 12, 2015 at 10:20am

आदरणीय डाक्टर साहब 

सादर अभिवादन . 

 आभार 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 12, 2015 at 9:26am

बढ़िया कुश्वाहा जी

सुन्दर प्रयास.

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