For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अमासी रात मेरे घर के तारे ..

बह्र:-1222-1222-1222-1222
अमासी रात मेरे घर के तारे छीन लेती है।।
तूफानी रात आये तो गुजारे छीन लेती है।।

मैं आँखें बन्द रखता हूँ मेरी यादें छुपा कर के।
खुला पाती है जब भी वो नज़ारे छीन लेती है।।

मेरी किस्मत को ऐ मालिक कभी उम्दा भी लिख्खा कर।
ये हसरत जिन्दगानी के सहारे छीन लेती है।।

नशा जिनको है दौलत का उन्हें कोई ये समझाए।
ये लत हमसे जरुरत में हमारे छीन लेती है।।

नहीं है हमजुबां कोई मेरा इस दौर हाजिर में।
कसक इतनी मेरे दिल से शरारे छीन लेती है।।

किसी रददी से कागज को जो हालेदिल बयाँ कर दूँ।
कोई कविता गजल बनकर के सारे छीन लेती है।।
मौलिक/ अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी

Views: 293

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 6, 2016 at 11:47am

वाह वाह बहुत अच्छी ग़ज़ल लिखी है आपने सभी अशआर शानदार हुए जिसके लिए दिल से बधाई लीजिये आमोद जी .मक्ते के  सानी में कुछ अटकाव एवं  भाव सम्प्रेषण में कमी सी  महसूस हो रही  है इसे ऐसे लिखें तो कैसा रहे 

ग़ज़ल बन कोई/मेरी कविता भाव सारे छीन लेती है |

Comment by Rahila on March 30, 2016 at 1:17am
नहीं है हमजुबां कोई मेरा इस दौर हाजिर में।
कसक इतनी मेरे दिल से शरारे छीन लेती है।। वाह्ह. .शानदार लिखते है आप आदरणीय आमोद जी! काबिले तारीफ़ है आपकी ग़ज़ल । यूं ही पढ़ती रही इस मंच पर इतनी उम्दा ग़ज़ले तो यकीनन ग़ज़लो का शौक हो जायेगा । बहुत बधाई ।सादर
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 29, 2016 at 10:06pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय आमोद जी। दाद कुबूल करें

Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 28, 2016 at 12:45pm
आ रामबली सर आप को सादर नमन
सर गजल की बिधा में हम बिलकुल नए है । कभी अच्छा तो कभी बहुत बुरा लिख जाता है । कोई गुरु न होने के कारण अकेले ही साहित्य का पथ चल रहे हैं। इसलिए त्रुटि के लिए सदा क्षमा प्रार्थी हूँ । .....कृपया मार्गदर्शन स्नेह देते रहें
Comment by रामबली गुप्ता on March 28, 2016 at 12:22pm
वाह वाह वाह क्या खूब ग़ज़ल कही आ.आमोद जी
Comment by Samar kabeer on March 28, 2016 at 11:52am
समीर नहीं जनाब 'समर'
Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 28, 2016 at 11:34am
आकांता दीदी उत्साह वर्धन और स्नेह के लिए सादर नमन....
Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 28, 2016 at 11:34am
आ समीर साहब आप का स्नेह पा कर गर्वंवित महसूस हो रहा है। आप को सादर नमन
Comment by Samar kabeer on March 28, 2016 at 11:29am
जनाब आमोद बिन्दोरी जी आदाब,तरही मिसरे पर आपने अच्छी ग़ज़ल कही, बधाई स्वीकार करें
Comment by kanta roy on March 28, 2016 at 10:44am

अमासी रात मेरे घर के तारे छीन लेती है।।
तूफानी रात आये तो गुजारे छीन लेती है।।....वाह  !  क्या  खूब  ग़ज़ल  कही  है  आपने आदरणीय आमोद  जी , बधाई  आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई शून्य आकाशी जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आ. प्रतिभा बहन सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए सहृदय शुक्रिया आ धामी सर बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है माँ पर"
22 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"माँ पर लिखी गई एक बेहतरीन ग़ज़ल | बधाई स्वीकारें लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर  जी | "
yesterday
Ram Ashery posted a blog post

हम होगें कामयाब

लेन देन जगत में, कुदरत रखे सब हिसाब । मिलता न कुछ मुफ्त में, हम हो कामयाब ॥ अपने आतीत से सीख लें,…See More
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"गीत......  फिर भी हम जीतेंगे बाजी.. !  कोरोना की मार पड़ी है मौत ताण्डव मचा रही है हर…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"सादर अभिवादन आदरणीय सौरभ पाण्डे जी "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"हम होंगे कामयाब_____________ तू' और 'मैं' से उठकर जिस दिन हम 'हम'…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"जनाब विनय जी अच्छी रचना है"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"स्वागतम् !! "
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service