For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सजी दुल्हन के जोड़े में, हंसी वो रूप की रानी।
सुनहरे रंग की बिंदिया, चमक माथे पे नूरानी।
हरी चूनर खिला चहरा, गुलाबी होंठ की लाली।
हजारों हुश्न देखे पर, नहीं उसका कोई सानी।

तुम्हारी सादगी देखी, तुम्हारा साज देखा है।
मगर हर रूप में जाना, जुदा अंदाज देखा है।
तुम्हारी सादगी चमके, कुमुदिनी फूल के जैसे।
तुम्हारे साज में हमने, सदा ऋतुराज देखा है।

खुली आंखें रहीं मेरी, अचानक देखकर उनको।
धरा पर ईश ने भेजा, रमा रति उर्वशी किसको।
अगर नख शिख करूं वर्णन, तो केवल लफ्जबाजी है।
हमारी मति हुई जड़ सी, निहारूं एकटक उनको।

तुम्हारी इक झलक पाकर, हमें इतनी खुशी होती।
किसी प्यासे को ज्यों पानी, किसी भूखे को ज्यों रोटी।
कई दिन से नहीं देखा, लगे कुछ गुम गया मेरा।
दिखे जब आज वो मुझको, मिला अनमोल सा मोती।

परायी वो अमानत है, मेरा अधिकार ना उस पर।
सड़क का एक पत्थर हूं, नहीं उसका कोई रहबर।
कदम से लग कहा मैंने, चले क्या साथ हम दोनों।
बनो मत बावले प्यारे, कहा उसने मुझे हंसकर।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 1068

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 10, 2017 at 11:09pm
बड़े सुन्दर मुक्तक हुए त्रिपाठी जी..बधाई
Comment by Samar kabeer on July 10, 2017 at 10:36pm
जनाब विन्ध्येश्वरी जी,और बहना राजेश कुमारी जी आदाब,'अंदाज़'शब्द फ़ारसी भाषा का है, और 'ऋतुराज' शब्द या तो हिन्दी भाषा को होगा या संस्कृत भाषा का मैं नहीं जानता,और इनकी तुकान्तता किसी भी लिहाज़ से दुरुस्त नहीं हो सकती,ये बात समझने की ज़रूरत है,ज़िद पर अड़ जाने की नहीं,साफ़ ज़ाहिर है कि 'अंदाज़' में 'ज'के नीचे बिन्दी लगी है जो 'ऋतुराज'के 'ज'के नीचे नहीं लगी है,तो फैसला करने के लिये किसी जज के पास जाने की ज़रूरत नहीं आप ख़ुद ही फ़ैसला कर लीजिये की तुकान्तता सही होगी या ग़लत ? और इसके बावजूद आप यही कहें तो आपकी मर्ज़ी आप स्वतंत्र जो हैं ।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 10, 2017 at 6:42pm
आदरणीय गिरिराज सर आपका भूरिशः आभार
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 10, 2017 at 6:41pm
आदरणीया राजेश मैम! आपने रचना पर अपना बहुमूल्य समय और सुझाव दिया आपका आभार। सादर
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 10, 2017 at 6:40pm
आदरणीय लक्ष्मन सर! रचना पर आपने समय दिया,मैं हृदयतल से आभारी हूँ। सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 5, 2017 at 8:26pm

आ. विन्ध्येश्वरी भाई ... खूब सूरत मुक्तकों के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ... आ. समर भाई जी की सलाह मुझे भी सही लगी ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 5, 2017 at 7:17pm

आद० विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी बहुत ही सुंदर मुक्तक लिखें हैं बहुत बहुत बधाई लीजिये दूसरा मुक्तक पूर्णतः शिल्प पर कसा हुआ है बाकी तुकांतता के लिए विद्वद जन कह ही चुके हैं वैसे अंदाज और ऋतुराज की तुकांतता मेरे विचार से भी सही है 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 5, 2017 at 11:36am

 सुंदर और भापूर्ण मुक्तक रचे है \ मुक्तक में तुकांत के साथ ही समान्त का भी ध्यान रखा जाए तो और अच्छा माना जाता है हिसका निर्धारण प्रथम दो पंकितियों से होता है जो दुसरे मुक्तक में है |

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on April 4, 2017 at 12:30pm
आदरणीय सुरेंद्र सर आपका हार्दिक आभार
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on April 4, 2017 at 12:28pm
आदरणीय समर कबीर सर, सादर आभार। अंदाज और ऋतुराज के तुकांत में त्रुटि है लेकिन मैंने अंदाज़ को अंदाज लिखा है। अत: मुझ अल्पमति को ठीक लग रहा है। फिर भी गुरुजन इस पर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देंगे तो बात स्पष्ट हो सकेगी। इसके अलावा मैं तुकांत दोष समझ नहीं पा रहा हूं कि उनमें ऐसा कहां है?
सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

AMAN SINHA posted a blog post

हर बार नई बात निकल आती है

बात यहीं खत्म होती तो और बात थी यहाँ तो हर बात में नई बात निकल आती है यूँ लगता है जैसे कि ये कोई…See More
10 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-106 (विषय: इंसानियत)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इस बार…See More
yesterday
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हम

221 2121 1221 212बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हमअपनी ही सुर्ख़ आँख में चुभते रहे हैं हमये और…See More
yesterday
Usha Awasthi posted a blog post

धूम कोहरा

धूम कोहराउषा अवस्थीधूम युक्त कोहरा सघनमचा हुआ कोहराम किस आयुध औ कवच सेजीतें यह संग्राम?एक नहीं,…See More
yesterday
PHOOL SINGH posted a blog post

वर्तमान के सबसे लोकप्रिय नेता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नए भारत के निर्माण की खातिर, सुशासन का संकल्प लाए मोदीभ्रष्टाचार मुक्त भारत होगा, ये सोचकर आए…See More
yesterday
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

121 22 121 22 121 22 121 22हज़ार लोगों से दोस्ती की हज़ार शिकवे गिले निभाये।किसी ने लेकिन हमें न समझा…See More
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Dr.Vijay Prakash Sharma posted a photo
yesterday
Avery khan is now a member of Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
Thumbnail

पुस्तक समीक्षा : मोहरे (उपन्यास)

समीक्षा पुस्तक   : मोहरे (उपन्यास)लेखक              : दिलीप जैनमूल्य               :  रुपये…See More
yesterday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"मिलने वो मुझसे आएँगे अब के बहार मेंये उम्र कट न जाए इसी इन्तिज़ार में (रिप्लाई बॉक्स खुला है तो…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय, अमित जी आप सही कह रहे हैं। ऐसी अवस्था, सभी, में / पर / पे महर्षि पाणिनी की व्याकरण के…"
yesterday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service