For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ चलना बस निरंतर

रेल गाड़ी की तरह सहकार का संदेश गाएं

 

प्यार से जो भी मिले तो हर कली दिल की खिलेगी

किन्तु आतंकी अधर्मी की चुनौती जब मिलेगी

स्वाभिमानी भारतीयों की तरह हम पेश आएं

 

शौर्य गाथा चंद्र के अभियान की चहुँ ओर है

अग्नि का, ब्रह्मोस का अब शत्रु दल में शोर है

अब समर्थन दे रही संयुक्त राष्ट्रों की सभाएं  

 

देश है कश्मीर से कन्या कुमारी तक सलामत

एक इसकी रूह है कानून करता है हिफाजत

क्यूँ मतांतर की बिना पर हों विभाजित टूट जाएं

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 419

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 11, 2017 at 12:39pm

 Ravi Shukla जी,
देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत शानदार गीत के लिए बधाई स्वीकार करें | यूँ तो पूरा गीत ही भावों  और सधे शिल्प का संगम है पर रेल सेवा में कार्य करने और अभी भी ट्रेड यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण मुझे ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आईं :
" रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ चलना बस निरंतर

रेल गाड़ी की तरह सहकार का संदेश गाएं"
बस एक ही सुझाव है कि जहाँ-जहाँ  "एं" लिखा है वहाँ "एँ"  कर लें तो सुंदरता और बढ़ जाएगी | 

 

Comment by आशीष यादव on July 30, 2017 at 2:16pm
आदरणीय रवि शुक्ला जी सुंदर एवं संदेशपरक गीत पर बहुत बहुत बधाई।
Comment by Ravi Shukla on July 26, 2017 at 1:12pm

हमारे गीत का मान देने के लिये आपका बहुत बहुत आभार आदरणी बसंत कुमार जी

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 26, 2017 at 8:35am

मुग्ध हूँ पढ़कर, देशभक्ति और उर्जा से भरपूर लाजबाब गीत के लिए बहुत बहुत बधाई आपको  आदरणीय रवि शुक्ला जी 

Comment by Mohit mishra (mukt) on July 26, 2017 at 12:07am

आदरणीय शुक्ला जी बहुत हीं ऊर्जापूर्ण गीत लिखा आपने | बधाई कुबूल करें | 

Comment by Ravi Shukla on July 25, 2017 at 4:36pm

जी सही कह रहे है आप आदरणीय समर साहब हैं में अनुस्‍वार नहीं लगाना टंकण त्रुटि हो गई है इसको और भी टिप्‍पणिया आने के बाद एक साथ संशो‍धन करते है । सादर

Comment by Samar kabeer on July 25, 2017 at 3:04pm
जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,बहुत सुंदर और सन्देशप्रद गीत लिखा। आपने,बहुत पसंद आया,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
दूसरे बन्द की दूसरी पंक्ति 'चली है टोलियां सब' को "चली ह्रें टोलियां सब" कर लीजियेग ।
Comment by Ravi Shukla on July 25, 2017 at 2:03pm

आदरणीय मोहम्‍मद आरिफ साहब गीत पर आपकी स्‍नेहिल प्रतिक्रिया पाकर प्रसन्‍नता हुई गीतकार के रूप में हम मानते है कि गीतों में सामाजिक सरोकार भी होना चाहिये । केवल मनोरंजन साहित्‍य का उद्देश्‍य नहीं हो सकता । आपको गीत पंसद आया हार्दिक आभार स्‍वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on July 25, 2017 at 12:09pm
आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब, देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत बेहतरीन गीत । आजकल ऐसे गीतों की काफी आवश्यकता है। गीत में आक्रोश भी है,बदलाव का विशेष आग्रह भी है और परिवर्तन की छटपटाहट भी है । ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

JAWAHAR LAL SINGH left a comment for TEJ VEER SINGH
"हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी!"
12 minutes ago
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post कैसा घर-संसार?
"आदरणीय सुश्री उषा जी , आज के घोर सांसारिकता पूर्ण युग में एक अत्यंत संवेदन शील मानवीय विषय पर लिखी…"
6 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय प्रतिभा पांडे भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
7 hours ago
TEJ VEER SINGH left a comment for pratibha pande
"आदरणीय प्रतिभा पांडे भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
7 hours ago
TEJ VEER SINGH left a comment for योगराज प्रभाकर
"आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
8 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
8 hours ago
Usha posted a blog post

क्षणिकाएँ

दिन ढलते, शाम चढ़ते, उसका डर बढ़ने लगता है, क़िस्मत, दस्तक भी देगी और भीनी यादें तूफान भी उठायेंगी…See More
8 hours ago
vijay nikore posted blog posts
8 hours ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय समर कबीर साहब, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। हृदय से आपका आभार। जी ज़रूर सर, 'मेरे और…"
9 hours ago
Usha commented on Usha's blog post कैसा घर-संसार?
"आदरणीय समर कबीर साहब, मेरी लघु कथा का प्रयास आपको पसंद आया, मेरे लिए हर्ष का विषय है। जी सर अवश्य…"
9 hours ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय विजय शंकर सर, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। उनपर आपके द्वारा दी गयी टिप्पणी से हर्ष हुआ कि…"
9 hours ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय सुशील सरना साहब, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। हृदय से आपका आभार। सादर।"
9 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service