For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जुलाहा ....

मैं
एक जुलाहा बन
साँसों के धागों से
सपनों को बुनता रहा
मगर

मेरी चादर
किसी के स्वप्न की
ओढ़नी न बन सकी
जीवन का कैनवास
अभिशप्त सा  बीत गया
पथ की गर्द में
निज अस्तित्व
विलीन हुआ
श्वासों का सफर
महीन हुआ
मैं जुलाहा
फिर भी
सपनों की चादर
बुनता रहा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 497

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on November 2, 2017 at 8:00pm

आदरणीय विजय निकोर साहिब , प्रणाम ... सृजन के भावों को अपने कोमल शब्दों से मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on November 2, 2017 at 8:00pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब .. प्रस्तुति के अहसासों को आत्मीय सम्मान देने का दिल से आभार।

Comment by vijay nikore on November 1, 2017 at 4:54pm

इतने कोमल एहसास ! वाह !

आनन्द आ गया, आदरणीय भाई सुशील जी।

Comment by Samar kabeer on November 1, 2017 at 2:39pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत प्यारी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 3:59pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब , सृजन आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 3:59pm

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 3:59pm

कल्पना भट्ट (रौनक़) जी सृजन के भावों की सराहना हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on October 30, 2017 at 10:21pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 30, 2017 at 7:13pm
आदरणीय सुशील जी बहुत ही मनभावन हम जैसे कितनो की ही कहानी आप की जुवानी बेहद भाई रचना पर हार्दिक बधाई सादर
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 30, 2017 at 5:57pm

वाह बहुत ही बढ़िया रचना हुई है ,आदरणीय सुशिल जी , हार्दिक बधाई |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब,  रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक…"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी इस छंद पर आपका प्रयास सचमुच प्रशंसनीय है। हार्दिक बधाई। गजल का मुझे कोई ज्ञान…"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी  छंद की प्रशंसा के लिए हार्दिक  धन्यवाद आभार आपका।"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी छंद और चित्र को देखने के नजरिये की प्रशंसा के लिए हृदयतल से धन्यवाद् आभार आपका।…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"2122 - 2122 - 2122 - 212 झाँकी इक तालीम की आओ मैं दिखला दूँ तुम्हें सीखना चाहो अगर कुछ आओ सिखला…"
5 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब, सुंदर व सार्थक रचना के लिए बधाई स्वीकार करें। "
5 hours ago
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाई साहब,  आपकी सार्थक रचना का सर्वप्रथम प्रस्तुत हो जाना बताता है कि…"
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"गीतिका छंद   +++++++++   पंक्ति लम्बी है थमी आगे नहीं बढ़ पा रही। राजनेता की सवारी इस तरफ…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ‘गुनगुन करता गीत नया है’
"इस रचना की सभी पंक्तियाँ 16 मात्रा पर हैं लेकिन ये पंक्ति :-  'कहा सभी, कुछ कह न…"
13 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम "
22 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service