For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कंटक ही कंटक हैं, जीवन के पथ में

गीत 

कंटक ही कंटक हैं, जीवन के पथ में !

प्राणों पर संकट है, काया के रथ में !

क्षण-क्षण यह चिंतन

जीवन बीहड़ वन !

इस वन में एकाकी

प्राणों का विचरण !

पीड़ा ही पीड़ा है, जीवन के अथ में !

प्राणों पर संकट है, काया के रथ में !

पग-पग पर संयम

अन्यथा समक्ष यम !

द्वन्द्वात्मक नर्तन हो

आजीवन छम-छम !

अमरता की मृत्यु है, साहस के श्लथ में !

प्राणों पर संकट है, काया के रथ में !

जन-जन में समता

ममता ही ममता !

जनहित में अर्पित हो

पौरुष और क्षमता !

जीवन की सार्थकता सफल मनोरथ में !

प्राणों पर संकट है, काया के रथ में !!

मौलिक/अप्रकाशित

नंदकिशोर दुबे

Views: 451

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2018 at 1:42pm

बहुत सुन्दर गीत हुआ है आद० ननद किशोर दूबे जी हार्दिक बधाई आपको 

Comment by vijay nikore on March 3, 2018 at 2:16pm

सुन्दर रचना के लिए बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 3, 2018 at 11:08am

हार्दिक बधाई..बंधुवर

Comment by Mohammed Arif on March 2, 2018 at 10:57pm

आदरणीय किशोर कुमार दुबे जी आदाब,

                                 पीड़ा , शिकायत को बयाँ करता अच्छा गीत है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ने जिस तुकांतता की ओर इशारा किया है उस पर ध्यान दें ।

Comment by Samar kabeer on March 1, 2018 at 11:04pm

जनाब नन्द किशोर दुबे जी आदाब,बहुत उम्दा गीत लिखा है आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

क्या 'संयम' के साथ 'यम' की तुकान्तता सही है?

Comment by narendrasinh chauhan on March 1, 2018 at 10:32am

khub sundar rachna 

Comment by Shyam Narain Verma on February 28, 2018 at 8:06pm
बहूत ही उम्दा गीत, हार्दिक बधाई l सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"वाह...आपका सुझाव बहुत ही खूबसूरत है आदरणीय नीलेश जी किनारा हो नहीं सकता कभी मझधार के क़ाबिल "
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आ. बृजेश जी  जरा सा मसअला है ये नही तकरार के क़ाबिल... तकरार के क़ाबिल नहीं है तो अच्छा ही…"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"जी बिल्कुल...आप लोगों की तीखी बहस में भी काफी कुछ सीखने को ही मिलता है।"
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आ. बृजेश जी, आप तो आप .. मैं भी अक्सर समर सर के सानिध्य में सीखता हूँ.. कई बार तीखी बहस भी हो…"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"ऐसे कहता हूँ जरा सा मसअला है ये नही तकरार के क़ाबिल चलो माना नहीं हूँ मैं तुम्हारे प्यार के क़ाबिल"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"उचित है आदरणीय नीलेश जी...ये सच है कि साहित्य में मेरी जानकारी बहुत ही अल्प है...बस कुछ कहना चाहता…"
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. सौरभ सर, आग के उच्चारण का ग और चराग़ के उच्चारण के ग़ का अंतर  आप भी…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"देवनागरी लिपि में हिंदी भाषा का व्याकरण या छंदशास्त्र ऐसे किसी नियम की चर्चा नहीं करता कि आग और…"
5 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. सुशिल जी,चराग़ के साथ दाग़ बाग़ फ़राग़ दिमाग़ सुराग़ आदि तुकांत लिए जा सकते हैं."
7 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आप मुद्द आ का उर्दू रूप देखें .. مدعا  मीम , दाल , ऐन मिलकर मुद्द और बाद का अलिफ़ आ बना रहे…"
7 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आ. बृजेश जी,मुद्दआ को आम बोलचाल में मुद्दा ही पढ़ा जाने लगा है लेकिन साहित्य में लिखते समय शुद्ध रूप…"
7 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"आभार आ.उस्मानी जी।"
17 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service