For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

2122  1122  1122  22/112

कोई पूछे तो मेरा हाल बताते भी नहीं,
आशनाई का सबब सबसे छुपाते भी नहीं।

शेर कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं।

जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,
शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं।

ये तुम्हारी है अदा या है कोई मजबूरी,
प्यार भी करते हो और उसको जताते भी नहीं।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान करोगे कैसे,
बात करते  हो मगर बात बताते भी नहीं।

ये मरासिम का अजब मोड़ है जिस पर तुमको,
याद हम करते नहीं दिल से भुलाते भी नहीं।

तिश्नगी दीद की वो और बढ़ा देते है,
"साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 287

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 1, 2018 at 9:15pm

आदरणीय रवि शुक्ला जी को सादर नमस्कार , बहुत अच्छी हुई गजल उस पर इस्लाह भी जानदार, मुग्ध हूँ  पढ़कर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 1, 2018 at 12:52pm

आ. भाई रवि जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।

Comment by Ajay Tiwari on August 31, 2018 at 6:55am

आदरणीय रवि शुक्ला जी, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 

'जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,
शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं'         

ये शेर ख़ास तौर पर अच्छा लगा. शेष समर साहब कह चुके हैं.

सादर  

Comment by Samar kabeer on August 30, 2018 at 3:31pm

जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,ग़ौर करें ।

'शेर भी कहते उस हुस्न की तमहीद के साथ'

ये मिसरा लय में नहीं है, इस शैर को यूँ कह सकते हैं:-

'शे'र कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं'

'सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान करोगे कैसे,
बात करते हैं ये और बात बताते भी नहीं'

इस शैर का सानी मिसरा यूँ करें :-

'बात करते हो मगर बात बताते भी नहीं'

बाक़ी शुभ शुभ

Comment by Samar kabeer on August 30, 2018 at 2:56pm

जनाब सत्यम सिंह "प्रभाकर" जी आदाब,आपकी टिप्पणी पहली बार देखी तो आपको ये बताना मेरा फ़र्ज़ है कि इस मंच पर सोशल मीडिया की तरह टिप्पणी नहीं की जाती,यहाँ रचनाकार को पूरे सम्मान के साथ संबोधित करके उसकी प्रस्तुत रचना पर अपनी प्रतिक्रया दी जाती है,अगर रचना अच्छी है तो उसकी तारीफ़ खुले दिल से की जाती है,और अगर उसमें कोई दोष नज़र आता है तो उसे भी शिष्टता के साथ इंगित किया जाता है, क्योंकि इस मंच का उद्देश्य सीखना सिखाना है, उम्मीद है आप मेरी बात की गम्भीरता समझ गए होंगे?

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on August 30, 2018 at 1:10pm

आद0 रवि शुक्ल जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल। मतला लाजबाब। हरेक शैर उम्दा। दाद के साथ मुबारकबाद पेश कर्रा हूँ इस ग़ज़ल पर।

Comment by Satyam singh ''prabhakar'' on August 29, 2018 at 9:19pm

अति उत्तम।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आ0 गोपाल नारायण जी आपका बहुत बहुत आभार।"
2 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"लिखने में टंकण त्रुटि हो गई है आदरणीय गोपाल सर जी।क्षमाप्रार्थी हूँ अभी सुधार लेता हूँ। सादर धन्यवाद"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर प्रणाम .... सृजन पर आपकी आत्मीय आशीर्वाद का दिल की असीम…"
3 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आ०, ग्यारह सम मात्रिक छंद जिसके प्रत्येक चरणात में १२१ अनिवार्य का कुशल निर्वाह  i इस छंद की…"
5 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"सरना जी , हमेशा की तरह अद्भुत i "
5 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

अहीर छंद "प्रदूषण"

अहीर छंद "प्रदूषण"बढ़ा प्रदूषण जोर। इसका कहीं न छोर।। संकट ये अति घोर। मचा चतुर्दिक शोर।।यह दावानल…See More
5 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"प्रिय राम बली जी . आपके सूत्र की मात्रिक व्यवस्था अधूरी है -  (122X 7+ 1 2 )और वर्णिक …"
5 hours ago
amod shrivastav (bindouri) updated their profile
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय   Samar kabeer  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदरणीय   Samar kabeer  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
7 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service