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कुछ क्षणिकाएं :

कुछ क्षणिकाएं :

उल्फ़त की निशानी
आँख में
थिरकता
बूँद भर पानी

...........................

समाज
अंधेरों के घेरों में
सभ्यता
न साँझ में
न सवेरों में

..........................

माँ की लाश
बिलखता विश्वास
टूटा आकाश
बेटी के पास

.............................

जीवन रंग
हुए बदरंग
रिश्तों के संग

...............................

दृष्टि में विकार
बढ़ता व्यभिचार
नारी लाचार

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 30

Comment

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Comment by Sushil Sarna on April 18, 2019 at 11:53am
Comment by Samar kabeer on April 14, 2019 at 4:52pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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