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मौजूँ मत

राजनीति की दूषित दरिया,मिलकर स्वच्छ बनाएं
मतदाता परिपक्व हृदय से,अपना फर्ज निभाएं ll

माननीय बन वीर बहूटी,नित नव रूप दिखाएं
ये बर्राक करें बर्राहट ,इनको सबक सिखाएं ll

किरकिल सा बहुरूप बदलते,झटपट चट कर जाते
ये बरजोर करें बरजोरी, खाकर नहीं अघाते ll

वक्त आ गया समझाने का,अब इनको मत छोड़ो
सेवक नहीं बतोला बनजी, दोखी दंश मरोड़ो.ll

हर मत की कीमत को समझें,है मतदान जरूरी
बूथों पर मौजूँ मत करके, इच्छा कर लें पूरी.ll

मत बिन वजूद है खतरे में,मत से मान बढ़ाएं
राजनीति के बड़े वदावद, अबकी बाहर जाएं.ll

विकटाकार विकर्म करें जो, उनको मत मत देना
समाज को विकलित करता जो,सारे सुख हर लेना.

विकारमय मन नहीं बनाना, मत करने जब जाना
विचलन से विचार दूषित कर,हरगिज ना विचलाना.

विगुण व्यक्ति होवें निर्वासित,तब यह देश बनेगा
मतदाता मर्यादित होगा, सुंदर चमन सजेगा ll

डॉ. छोटेलाल सिंह

मौलिक एवं अप्रकाशित
(वीर बहूटी-लाल बरसाती कीड़ा,बर्राक-चालाक,बर्राहट-बकवास,किरकिल गिरगिट,बरजोरी-जबरदस्ती,बनजी-व्यापारी,दोखी दोषी,बतोला-धोखा,मौजूँ-ठीक ठाक,वंचक-धोखेबाज,वंचन-ठगी धोखा,वंटक-बाँटने वाला,वदाहद-वाचाल,विकलित-पीड़ित,विकर्म-दूषित कर्म,विकटाकार-भीषण रूप वाला)

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Comment by Samar kabeer on May 2, 2019 at 10:57am

जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 1, 2019 at 7:52pm

भाई सुरेन्द्र जी आपका बहुत बहुत आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 1, 2019 at 7:51pm

आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on May 1, 2019 at 6:09pm

आद0 डॉ छोटेलाल भैया सादर अभिवादन। समसामयिक बेहतरीन रचना पर आपको बधाई प्रेषित है। सादर

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2019 at 3:25pm

वाह आदरणीय डॉ छोटे लाल जी , वर्तमान को जीती बेहद प्रभावी सृजन। दिल से बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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