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2122 1212 22

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पूछिये मत कि हादसा क्या है ।
पूछिये दिल मेरा बचा क्या है।।

दरमियाँ इश्क़ मसअला क्या है।
तेरी उल्फ़त का फ़लसफ़ा क्या है

सारी बस्ती तबाह है तुझसे ।
हुस्न तेरी बता रजा क्या है ।।

आसरा तोड़ शान से लेकिन ।
तू बता दे कि फायदा क्या है ।।

रिन्द के होश उड़ गए कैसे ।
रुख से चिलमन तेरा हटा क्या है।।

बारहा पूछिये न दर्दो गम ।
हाले दिल आपसे छुपा क्या है ।।


फूँक कर छाछ पी रहा है वो ।
आदमी दूध का जला क्या है ।।

चाँद दिखता नहीं है कुछ दिन से ।
घर पे पहरा कोई लगा क्या है ।।

अश्क़ उतरे हैं तेरी आंखों में ।
ख़त में उसने तुझे लिखा क्या है ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on July 20, 2019 at 8:19pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ालिब की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'सारी बस्ती तबाह है तुझसे'

इस मिसरे में तनाफ़ुर देखें,मिसरा यूँ कर लें तो ऐब निकल जायेगा:-

'सारी बस्ती तबाह की तूने'

'रुख से चिलमन तेरा हटा क्या है'

इस मिसरे में 'चिलमन' शब्द स्त्रीलिंग है,इसकी जगह "पर्दा" कर सकते हैं ।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on July 19, 2019 at 1:42pm

फूँक कर छाछ पी रहा है वो ।
आदमी दूध का जला क्या है ।।

चाँद दिखता नहीं है कुछ दिन से ।
घर पे पहरा कोई लगा क्या है ।।

गज़ब ख्याल

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