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करके वादा,
किसी से न कहेंगे,
दिल का दर्द मेरे जान लिया।
ढोंग था सब,
तब समझे हम कि,
महफ़िल में सरे-आम बदनाम हो गए।...........1

पहली नज़र में ही उनपर,
हम दिल अपना हार बैठे,
कहना कुछ चाहा था,
कह कुछ और गए।.......... 2

अक्सर देखा है हमने,
उनको रंग बदलते हुए,
पर हैरान हैं कि,
कोई तो पक्का होता।.......... 3


मौलिक व् अप्रकाशित।

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Comment by Sushil Sarna on November 15, 2019 at 1:52pm

आदरणीय ऊषा जी दिल को छूती क्षणिकाएँ ... दिल से बधाई।

Comment by Usha on November 15, 2019 at 8:54am

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी। बेहद ख़ुशी हुई कि आपको मेरी क्षणिकाएँ पसंद आयी। नया सोचने व् लिखने के लिए प्रोत्साहित करती है आपकी सकारात्मक टिप्पणी। हृदय से आभार। सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 14, 2019 at 8:34pm

आदरणीय सुश्री उषा जी , बहुत ही प्रभावशाली क्षणिकाएं बनी हैं , व्यंग भी है , तंज भी है। बधाई , सादर।

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