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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Comments

Comment Wall (55 comments)

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At 5:44pm on November 7, 2014, Hari Prakash Dubey said…
आपका हार्दिक आभार, आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,आशा है आप से प्रोत्साहन मिलता रहेगा।
At 4:42pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 2:47pm on October 16, 2014, khursheed khairadi said…

आदरणीय गोपालनारायण साहब 

सादर प्रणाम |

आपने सदैव मेरा उत्साहवर्धन किया है ,आपके स्नेह की छाँव मुझ पर सदा बनी रहे|

सादर आभार |

At 10:08pm on September 24, 2014, savitamishra said…

बहुत बहुत आभार .....आपका चाचाजी ..सादर नमस्ते स्वाविकार कर हमे अनुग्रहित करें
बस ज्यादातर लोगो ने कहा पढ़ना चाहिए कुछ सिखने के लिय उसी ओर अग्रसर है ...जिसके कारण अनजाने में ही सही ...इस पुरस्कार के पात्र बन गये ...:)

At 11:23pm on September 21, 2014, Dr.Vijay Prakash Sharma said…

आग्रह स्वीकारने के लिए बहुत आभार माननीय .

At 10:46pm on August 10, 2014, Santlal Karun said…

आदरणीय डॉ. श्रीवास्तव जी,

'महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना' पर आप ने खुशी ज़ाहिर की, हार्दिक धन्यवाद !

At 11:28am on August 10, 2014, Dr. Vijai Shanker said…
Thank you very much , Sir .
Regards .
Vijai
At 8:20pm on July 30, 2014, पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम" said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी "रीतिरात्माकाव्यस्य" ऐसे शोधपूर्ण लेखन के लिये साधुवाद वैदर्भी,गौडी एवम् पांचाली रीति को हिन्दी काव्य से मथकर निकालने के लिये आपके श्रम और विद्वता का ऋणी हूँ / आशा है काव्य जगत की अगली पीढ़ी भी इससे लाभान्वित होगी / विशेष कर "कंकण किंकिणि नूपुर ध्वनि सुनि ‌‌‌‌‌..........में वैदर्भी रीति का विहंगावलोकन "देखि ज्वाल जाल दशकंध सुनि ......हाँकि हाँकि हुनै हनुमान हैं" में गौडी रीति का दिग्दर्शन / "मानव जीवन वेदी पर ......खेल आँख का मन का " में पांचाली  रीति का अन्वेषण बहुत अच्छा लगा /

पँ.प्रेम नारायाण दीक्षित "प्रेम"

At 5:43pm on July 20, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय गोपाल नारायण जी बहुत बहुत धन्यवाद रचना का अवलोकन करने के लिए एवं अपने सुझावों से अवगत करने के लिए। समर्पण में हारने जीतने का कोई ख्याल ही नहीं आता सच तो ये है। मेरा कहने का मतलब है नारी वाही महान होती है जो हर परिस्थितियों को सहज स्वीकार कर स्वयं भी उसके अनुकूल हो जाये उसे भीकोई शिकवा शिकायत न हो। आज हर बात पे नारियों का भी अहम सर उठा कर बोल रहा है। कुछ तो प्राकृतिक देन जो है उसे स्वीकार करने में कोई छोटापन बड़ापन नहीं होता मेरी समझ से। मै तो हर हाल में संतोष से सुख से जीना और जीने देना चाहती हूँ। वैसे आपकी भावनाओं को सादर प्रणाम।
At 11:02pm on June 30, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपने मुझे मित्र योग्य समझा, यह मेरा सौभाग्य है आदरणीय डा.गोपाल जी

सादर!

At 1:56pm on June 12, 2014, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय गोपाल सर..आपकी रचना महीने की सर्वश्रेस्ट रचना चुनी गयी है इस के लिए मेरी तरफ से कोत्सः बधाई सादर प्रणाम के साथ 

At 3:06pm on June 11, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी माह की सर्वश्रेष्ठ रचना से सम्मानित किये जाने पर मेरी ओर से हार्दिक हार्दिक बधाईयाँ। भविष्य के लिए हमारी शुभकामनाएं भी स्वीकार करें।  

At 10:27pm on June 10, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "अर्थ गौरव की ऊर्जा है शब्द शक्ति" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |

शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 12:04pm on May 21, 2014, Shyam Narain Verma said…

pranaam jee

 

bahut dinon ke baad  aapka  remark aa raha  hai .

saadar  

At 7:18pm on January 21, 2014, Alka Gupta said…

सबसे पहले आपका हार्दिक आभार मेरी रचना हेतु प्रेरक शब्दों के लिए .......
एवं आपका लेखन बहुत ही प्रभावी सुन्दर एवं भाव पूर्ण लगा ....सादर वन्दे 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी 

At 10:24pm on January 7, 2014, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

आदरणीय डा. गोपाल  भाई  , 

हार्दिक धन्यवाद , आभार और आपके पूरे  परिवार के लिए मंगलमय नव वर्ष की शुभकामनायें ॥ 

At 7:15pm on December 20, 2013, NEERAJ KHARE said…
BHAI SAHEB SAB AAPKI DEN HAI AASHIRWAD BANAY RAKKHEYEN...DHANYAWAD
At 6:58pm on December 17, 2013, NEERAJ KHARE said…
BHAI SAHEB MARGDARSHAN DETE RAHEYEN YE SAB AAPKI HI DEN HAI.DHANYAWAD
At 2:55pm on December 11, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सर ये तो मेरा सौभाग्य है की आपने मुझे स्नेह देते हुए मेरी मित्रता स्वीकार की ..बस यूं ही सतत स्नेह बनाएं रखें सादर 

At 10:53am on December 10, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय गोपाल सर ..महीने का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें..आपकी यह सक्रियता सतत बनी रहे और हम को आपसे सतत मार्गदर्शन और प्रेरणा मिलती रहे ...इन्हें शब्द्दों के साथ ...सादर प्रणाम करते हुए 

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