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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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Latest Activity

Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
15 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 नींद आँखों से मेरी कोई चुराने वाला आ गया फिर से नए ख्वाब दिखाने वाला  उन दुकानों पे मिलेंगे तुम्हें झंडे-डंडे  पास अपने तो है ये काम किराने वाला  जान लेने के लिए लोग खड़े लाइन से कोई दिखता ही नहीं जान लुटाने वाला आज रस्ते हैं बहुत, साथ मुसाफिर अनगिनचाह कर भी न मिला साथ निभाने वाला  जाम हाथों से छलक जाते हैं अक्सर देखा बात तब है मिले आँखों से पिलाने वाला "मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Saturday
बसंत कुमार शर्मा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"आदरणीय मनोज अहसास जी सादर नमस्कार, बधाई हो आपको खूबसूरत ग़ज़ल के क लिए "
Sep 13
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
"आदरणीय समर कबीर जी , आपके स्नेह को सादर नमन , बहुत बहुत आभार आपका हौसलाअफजाई के लिए "
Sep 13
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,आपकी ग़ज़लों पर दिन ब दिन निखार आता जा रहा है,ये देख कर प्रसन्नता हुई । ये ग़ज़ल भी अच्छी हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jul 20
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
"आदरणीय  C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi जी सादर नमस्कार, हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jul 19
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
""तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमर पुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने के लिए "वाह वाह ! शानदार शेर | ग़ज़ल के अन्य मिसरे भी बहुत बढ़िया हैं | बधाई  बसंत कुमार शर्मा जी | "
Jul 19
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए  छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला हो गया  अब न जाता पास कोई सिर छुपाने के लिए तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमरपुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने के लिए  हम नदी से बह रहे हैं खुद बनाकर रास्ता चाह कब है सिन्धु से आये बुलाने के लिए  दर्द में डूबे हुए कब तक गुजारें जिन्दगी कुछ गमों को छोड़ना बेहतर ज़माने के लिए"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Jul 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीया   विजय जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई दिली शुक्रिया "
Jun 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीया   Rakshita Singh जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई दिली शुक्रिया "
Jun 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई दिली शुक्रिया "
Jun 30
vijay nikore commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"बहुत ही सुन्दर गज़ल के लिए बधाई, मित्र बसंत कुमार जी।"
Jun 23
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत जी नमस्कार,  बहुत ही सुंदर रचना बहुत बहुत बधाई ।"
Jun 22
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत उम्द: ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jun 22
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

हो गए - ग़ज़ल

मापनी २१२*4 चाहते हम नहीं थे मगर हो गएप्यार में जून की दोपहर हो गए हर कहानी खुशी की भुला दी गईदर्द के सारे किस्से अमर हो गए खो गए आपके प्यार में इस कदरसारी दुनिया से हम बेखबर हो गए प्रेम के यज्ञ में हो गया सब हवनमंत्र जो थे सभी बेअसर हो गए जो कभी थे बड़े खूबसूरत महलदेखते देखते खंडहर हो गए कह दिया आपने जो हुआ सो हुआआँसुओं से नयन तरबतर हो गएसुर्ख़ियों में रहे रोज अख़बार की  वक़्त के साथ बासी खबर हो गए"मौलिक एवं अप्रकाशित" See More
Jun 17

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

 

नींद आँखों से मेरी कोई चुराने वाला 

आ गया फिर से नए ख्वाब दिखाने वाला 

 

उन दुकानों पे मिलेंगे तुम्हें झंडे-डंडे  

पास अपने तो है ये काम किराने वाला 

 

जान लेने के लिए लोग खड़े लाइन…

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Posted on September 13, 2019 at 8:44pm — 2 Comments

ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए 

जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए 

 

छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला हो गया  

अब न जाता पास कोई सिर छुपाने के लिए

 

तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमर

पुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने…

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Posted on July 19, 2019 at 9:26am — 4 Comments

हो गए - ग़ज़ल

मापनी २१२*4 

चाहते हम नहीं थे मगर हो गए

प्यार में जून की दोपहर हो गए

 

हर कहानी खुशी की भुला दी गई

दर्द के सारे किस्से अमर हो गए

 

खो गए आपके प्यार में इस कदर

सारी दुनिया से हम बेखबर हो…

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Posted on June 17, 2019 at 11:56am — 6 Comments

आदमी - ग़ज़ल

है कहाँ फूल जैसा खिला आदमी

हो गया है ग़मों का किला आदमी

 

मंदिरों, मस्जिदों में रहे ढूँढते  

जब मिला आदमी में मिला आदमी

 

गाँठ दिल में लगी तो खुली ही नहीं

भूल पाया न शिकवा-गिला आदमी

 …

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Posted on May 24, 2019 at 10:07am — 10 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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"आ. भाई समर जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद । क़वाफ़ी के संदर्भ में यदि सम्भव…"
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