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AMAN SINHA
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सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on AMAN SINHA's blog post काश कहीं ऐसा हो जाता
"आदरणीय अमन सिन्हा जी इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर। ना तू मेरे बीन रह पाता (बिन)"
Jun 2

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on AMAN SINHA's blog post यह धर्म युद्ध है
"आदरणीय अमन सिन्हा जी, इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई। सादर"
Jun 2
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यह धर्म युद्ध है

रण भूमी में अस्त्र को त्यागे अर्जुन निःस्तब्ध सा खडा हुआ बेसुध सा निःसहाय सा केशव के चरणों मे पडा हुआ कहता था ना लड पायेगा, वार एक ना कर पायेगा शत्रु का है भेष भले पर वो अपना है जो अडा हुआ कैसे मैं उनपर प्रहार करूँ, जिनका मैं इतना सम्मान करूँ वे अनुज है मेरे, अग्रज भी हैं, उनपर कैसे मैं आघात करूँ वहाँ प्राण प्रिये पितामह हैं और क्रूर सही पर मामा हैहै पथ से भटके भ्रात मेरे भले आततायी का जामा है है मात प्रिये वो चाची घर पर कैसे उनका आँचल सूना कर दूँ हाँ प्रण लिया पर कैसे मैं रक्त रंजित वो झोली कर…See More
Mar 23
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Mar 19
AMAN SINHA posted a blog post

हर बार नई बात निकल आती है

बात यहीं खत्म होती तो और बात थी यहाँ तो हर बात में नई बात निकल आती है यूँ लगता है जैसे कि ये कोई बरगद का पेड़ है जहां से भी खोदो एक नई साख निकल आती है उलझने ऐसी है कि कोई छोड़ मिलती ही नहीं एक को खींचो तो संग मे दो चार चली आती है खुला है माँझा पड़े है बिखरे कई तार यहाँ खुले छत पर जैसे कोई पडी जाल नजर आती है कही थी जो बात तुमने जो बर्फी में लपेटे हमको परत जो उतरी नीम कि बौछार नजर आती है बड़ा सोचकर पड़ता है नज़र करना लफ्जों को ज़ुबां से फिसलकर जो निकली तो गुनहगार नज़र आती है जिसे होता है ग़ुमा अपने…See More
Feb 26

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on AMAN SINHA's blog post आँख मिचौली
"रचना की विषयवस्तु बहुत रोचक है एक बहुत सुदर बाल रचना बन सकती है यह बस थोड़ा मात्राओं और तुकांत पर ध्यान दीजिये सुन्दर प्रयास है .. बहुत बधाई प्रिय अमन भाई "
Jan 16
AMAN SINHA posted a blog post

आँख मिचौली

आ जा खेले आँख मिचौली, तू मेरा मैं तेरी हमजोली बंद करूँ मैं आँखों को तू जाकर कहीं छूप जाए पर देख मुझे तू सतना ना दूर कहीं छिप जाना ना ऐसा न हो तू पुकारे मुझे, मैं दूर कहीं खो जाऊं मैं आऊँ मैं आऊँ मैं आऊँकहाँ है तू पर्दे के पीछे, या जा छुपा पलंग के नीचे कैसे मैं तुझे ढूंढ निकालूँ जाने कहाँ छुप के बैठा है गर तू बाहर ना आया सूरत ना अपनी दिखलाया मैं तुझे मिल पाने में फिर विफल कहीं ना हो जाऊँ मैं आऊँ मैं आऊँ मैं आऊँघर का कोना कोना देखा बाग देखा बगीचा देखा किधर तू छुप के जा बैठा है थक जाऊँ तुझे खोज ना…See More
Jan 7
AMAN SINHA posted a blog post

किसे बताएं

किसे बताए फिक्र किसे है, मेरे रहने की मर जाने की किसे पड़ी यहाँ पर मेरी लिखी बात दोहराने की मेरे खातिर यहाँ भले क्यूँ अपने आँसू बर्बाद करे किसको इतनी मोहब्बत मुझसे जो समय अपना बेकार करे सब अपने है बस अपने हैं, अपने बनकर रह जाएंगे मगर कभी आफनो के खातिर अपने ना हो पाएंगे किससे किसको चाहत इतनी, जो खड़ा रहे बाज़ार में भरी दोपहरी बिन छाया के अपनाने के इंतजार में आज जो मुझको कहने ना दे, गीत मुझे जो गाने न देचाहे मेरे लिखने का हक़ साथ हो मगर लिखने ना दे  मैं ना बोला बात मेरी, तो दीवारें बतियाएंगे मेरे…See More
Dec 31, 2023
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सुख या संतोष

दोनों में से क्या तुम्हें चाहिए सुख या के संतोष क्षणभंगुर सा हर्ष चाहिए, या जीवन भर का रोष खुशी का जीवन लम्हो सा है, अब आए अब जाए छोटी सी उदासी मन की पहाड़ हर्ष का ढाए खुशी स्वभाव से चंचल पानी, कल कल बहता जाए कभी यहाँ है कभी वहाँ है स्थिर ना होने पाए खूशी है फूटे गागर जैसा कभी पूरा ना पड़ने पाए जिस गति से पहुंचे हम तक, दो गुनी चाल से जाए जितना पास जगाए हममे अपने आने की राह जाते समय अफसोस सहारे अलविदा हमें कह जाए पर संतोष है पूजी के जैसी हर दिन बढ़ता जाए चाहे समय हो ऊंचा नीचा हर समय काम ये आए संतोष…See More
Nov 9, 2023
Dr. Vijai Shanker commented on AMAN SINHA's blog post किसे अपना कहेंं हम यहाँ
"आदरणीय अमन सिन्हा जी , बहुत ही सार गर्भित , व्यंगात्मक और ज्ञानवर्धक प्रस्तुति के लिए ह्रदय से बधाई, सादर ,"
Nov 8, 2023
Sushil Sarna commented on AMAN SINHA's blog post किसे अपना कहेंं हम यहाँ
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति सर"
Nov 5, 2023
AMAN SINHA posted a blog post

किसे अपना कहेंं हम यहाँ

किसे अपना कहें हम यहाँ खंजर उसी ने मारी जिसको गले लगाया किससे कहें हाल-ए-दिल यहाँ हर राज उसी ने खोला जिसे हमराज़ बनाया किसे जख्म दिखाये दिल का हार घाव उसी ने कुरेदा जिसको भी मरहम लगाया किसे साथी समझे अपना यहाँ मेरी जमीन उसी ने खींची जिसको कंधे पर बैठाया किसी चुने हमसफर अपना गड्ढा उसी ने खोदा जिसको रास्ता दिखलाया किसे बनाए मीत यहाँ मौके पर पीठ दिखाया जिसपर सबकुछ लुटायाकिससे करें उम्मीद यहाँ निवाला उसी ने छिना जिसको भूखा ना सुलाया कौन रहेगा साथ यहाँहर डोर उसी ने तोरी जिसको माला पहनाया किससे मांगे…See More
Oct 27, 2023
AMAN SINHA posted a blog post

सुनो, एक बात कहानी है

सुनो,एक बात कहानी हैगर गलत न समझो तोतो कह कर हल्का हो लूँहाँ अगर तुम्हें भली ना लगेतो कुछ ना कहना और चली जाना तुमपर एक इल्तजा है सुन लो “ना” ना कहनादिल कहीं भारी ना हो जाएबड़ी हिम्मत सेहिम्मत मैंने जुटाई हैतुमसे बात कर पानी की जुगत मैंने लगाई हैपर कहीं इंकार तेरा हो जाएतो फिर कहीं बिन कहे ना रह जाऊँपता हैं मुझको की मैं तेरा प्यार नहींतेरी नज़रों में तो मैं हूँ तेरा प्यार नहींलेकिन क्या करूँ मैं अपने दुश्मन दिल काबिना तेरे कहीं इसको मिलता करार नहींमेरा दिल हीं मेरा दुश्मन ब बैठा हैसमझाया लाख मगर…See More
Oct 8, 2023
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Sep 10, 2023
Dr. Vijai Shanker commented on AMAN SINHA's blog post फोन आया
"बदलते वक़्त में बहुत कुछ बदल जाता है. प्रस्तुति अच्छी है, बधाई आदरणीय अमन सिन्हा जी।"
Aug 29, 2023
AMAN SINHA posted a blog post

फोन आया

फोन आया, कई सालों के बाद फिर उसका फोन आया पहले जब घंटी बजती थी, दिल की धड़कन भी बढ़ती थी लेकिन आज फोन बजा तो धड़कन ने इशारा नहीं किया अंजान नंबर को भी पहले हम पहचान लेते थे फोन उसिका है ये जान लेते थे लेकिन आज नाम दिखा तो भी पहले सा एहसास ना हुआ नंबर वही पुराना था कोई गुज़रा हुआ जमाना थामेरे जैसा उस लड़की का ना कोई दीवाना था लेकिन आज फोन बजा तो दीवानापन नहीं आया पहले एक फोन की खातिर रातों जागा करते थे पड़ोसी चाची के घर बर्तन माँजा करते थे मगर आज घंटी बजी तो वो चाची भी रही नहीं"मौलिक व अप्रकाशित" अमन…See More
Aug 20, 2023

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यह धर्म युद्ध है

रण भूमी में अस्त्र को त्यागे अर्जुन निःस्तब्ध सा खडा हुआ 

बेसुध सा निःसहाय सा केशव के चरणों मे पडा हुआ 

कहता था ना लड पायेगा, वार एक ना कर पायेगा 

शत्रु का है भेष भले पर वो अपना है जो अडा हुआ 

कैसे मैं उनपर प्रहार करूँ, जिनका मैं इतना सम्मान…

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Posted on March 23, 2024 at 5:57am — 1 Comment

काश कहीं ऐसा हो जाता

काश कहीं ऐसा हो जाता, 

मैं जगता तू सो जाता 

मेरी हंसी तुझे मिल जाती 

तेरे बदले मैं रो लेता 

काश कहीं ऐसा हो जाता 

तू चलता मैं थक जाता 

पैर तेरे कभी ना रुकते…

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Posted on March 19, 2024 at 6:02am — 1 Comment

आँख मिचौली

आ जा खेले आँख मिचौली, तू मेरा मैं तेरी हमजोली 

बंद करूँ मैं आँखों को तू जाकर कहीं छूप जाए 

पर देख मुझे तू सतना ना दूर कहीं छिप जाना ना 

ऐसा न हो तू पुकारे मुझे, मैं दूर कहीं खो जाऊं 

मैं आऊँ मैं आऊँ…

Continue

Posted on March 16, 2024 at 6:16am

मेरे नाम की पाति

आज गाँव से पाति आई,

माँ के चरणों की मिट्टी लायी

वैसे तो ये बस धूल है लेकिन,

इसमे अपनों की महक समाई

पाति में सबके हिस्से है,

सबके अपने-अपने किस्से है

कहीं प्रेम है, कहीं…

Continue

Posted on March 8, 2024 at 11:09pm

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