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SALIM RAZA REWA
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9 hours ago
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है मेरे दामन से लिपट कर के वो रो लेती है मेरी तन्हाई मेरे साथ ही सो लेती है वाह आदरणीय सलीम साहिब वाह क्या खूब दर्दीले अहसासों को आपने लफ्ज़ अता किये हैं। इस बेहतरीन…"
Thursday
SALIM RAZA REWA posted blog posts
Wednesday
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"भाई नीलेश जी (करो हौ ) का ज़बाब नहीं। खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मन की बात - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बहुत अच्छे दोहे लिखे आपने,मुबारकबाद।"
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लम्हों की तितलियाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर ' ( गजल )
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद।"
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post रौशन है उसके दम से - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आपकी महब्बत के लिए बहुत शुक्रिया जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहब।"
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post रौशन है उसके दम से - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आपकी महब्बत के लिए बहुत शुक्रिया जनाब दिगंबर नासवा  साहब।"
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post रौशन है उसके दम से - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आपकी महब्बत के लिए बहुत शुक्रिया जनाब तेजवीर साहब।"
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"अब बेहतर है लेकिन काम बाकी है .. दो शेर आदत के ऊला पर खटक रहे हैं सादर "
Nov 30
दिगंबर नासवा commented on SALIM RAZA REWA's blog post रौशन है उसके दम से - सलीम 'रज़ा' रीवा
"पागल सी हो गईं हैं शरारों की रौशनी ... वाह ... बेहद लाजवाब शेर ... डोली दाद कबूल फरमाएं ..."
Nov 28
SALIM RAZA REWA commented on Usha's blog post क्षणिकाएं।
"उषा जी ख़ूबसूरत कविता हुई है मुबारकबाद स्वविकारें।"
Nov 26
SALIM RAZA REWA commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post हिताय और सुखाय (संस्मरण)
"जनाब उस्मानी साहब ख़ूबसूरत सुख़न के लिए मुबारकबाद।"
Nov 26
SALIM RAZA REWA commented on Sushil Sarna's blog post पानी पर चंद दोहे :
"पानी पर सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई"
Nov 26
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"आदरणीय दिगंबर नासवा  जी मोहब्बत के लिए बहुत शुक्रिया."
Nov 26
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"भाई नीलेश जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया , मैंने कुछ तबदीली की है देखिएगा"
Nov 26

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कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'

 221 2121 1221 212      

  

कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया

राधा को श्याम श्याम को राधा बना दिया

उस बेर की मिठास तो बस जाने राम जी

सबरी ने जिसको चख के है मीठा बना दिया

यूसुफ़ तो नहीं था वो मेरा चाहने वाला

लेकिन उसी ने मुझको ज़ुलेख़ा बना दिया

ये इश्क़ है जुनूं है मोहब्बत है या नशा

मजनू बना दिया कहीं राँझा बना दिया

ज़िन्दा रहे ख़ुलूस-ओ- वफ़ा प्यार मोहब्बत

ये सोच के ख़ुदा ने है दुनिया बना…

Continue

Posted on December 8, 2019 at 5:01am

गुलशन-ए -दिल में टहलने वो अगर आएँगे   - सलीम रज़ा

2122 1122 1122 22

गुलशन-ए -दिल में टहलने वो अगर आएँगे      

फूल जितने है वो क़दमों में बिखर जाएंगे

 

उनके एल्बम में है तस्वीर पुरानी मेरी        

अब वो देखेंगे तो पहचान नहीं पाएंगे

 

उनको फलदार ज़रा और अभी होने दो

शाख़ की मिस्ल अभी और लचक जाएंगे

 

उनके यादों के हसीं ख़ाब पिरो रक्खे हैं

भूल जाऊँगा तो मोती ये बिखर जाएंगे

 

उम्र भर साथ निभाने का जो वादा कर लो

छोड़कर सब को तेरे पास चले…

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Posted on December 6, 2019 at 10:02pm

अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'

2122 1122 1122 22             

अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है

बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है

 

मेरे दामन से लिपट कर के वो रो लेती है

मेरी तन्हाई मेरे साथ ही सो लेती है

 

तब मुझे दर्द का एहसास बहुत होता है                 

जब मेरी लख़्त-ए-जिगर आंख भिगो लेती है      

 

मैं अकेला नहीं रोता हूँ शब-ए-हिज्राँ में 

मेरी तन्हाई मेरे साथ में रो लेती है 

 

अपने दुःख दर्द…

Continue

Posted on December 3, 2019 at 6:41pm — 1 Comment

रौशन है उसके दम से - सलीम 'रज़ा' रीवा

221 2121 1221 212

 -

रौशन है उसके दम से सितारों की रौशनी 

ख़ुश्बू लुटा रही है बहारों की रौशनी

 -

इक वो है माहताब फक़त आसमान में 

फीकी है जिसके आगे हज़ारों की रौशनी…

Continue

Posted on November 21, 2019 at 8:52pm — 6 Comments

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"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर प्रेरक प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया…"
22 hours ago

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