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dandpani nahak
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"आदरणीय नाहक जी बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू."
Sunday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय राज़ नवादवी जी ! आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं !हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीया रचना भाटिया जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय खान हसनैन आक़िब  जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ह्रदय से बधाई स्वीकार करें ! वाह बहुत खूब !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय सूबे सिंह सुजान  जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं ! हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय मो. अनीस अरमान जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला बहुत उम्दा ! वाह !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी आदाब !बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब ! उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई  स्वीकार करें सभी शैर बेहतरीन हुए हैं "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीया अंजलि गुप्ता 'सिफ़र' जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ह्रदय से बधाई  क़ुबूल फरमाएं सभी शैर बहुत अच्छे हुए है खासकर 4 था शैर ! बहुत बहुत बधाई !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय अशफ़ाक़ अली जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार  करें "
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब ! हौसला बढ़ाने का बहुत बहुत shukriya!"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय राज़ नवादवी  जी आदाब ! बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला गजल  तक आये  अशआर आपको पसंद आये लिखना सार्थक हुआ हौसला बढ़ाने का बहुत शुक्रिया !"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय अशफ़ाक़ अली (गुलशन ख़ैराबादी ) जी नमस्कार ! आदाब ! आपको ग़ज़ल अच्छी लगी  मेरा लिखना सार्थक हुआ ! बहुत बहुत शुक्रिया आपने अपना कीमती वक़्त निकाला ! बहुत शुक्रगुज़ार हूँ !"
Saturday

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arang
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Dandpani nahak's Blog

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

ग़ज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
अगर सच भी जो बोलता हो

रहे गुण सभी आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता तो अच्छा
नहीं जानता क्या बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही बस दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 18, 2019 at 11:30am — 4 Comments

गज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
मगर जो जैसा है वैसा हो

यही गुण हो बस आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता है तो अच्छा
नहीं जानता क्यों बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही शुभ दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 8, 2019 at 3:07pm — 5 Comments

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At 6:03pm on March 29, 2020, Salik Ganvir said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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